ड्राईलैंड खेती से किसानों की आय बढ़ी: संसद में बोले शिवराज, CRIDA तकनीकों से 6000 रुपये/एकड़ का फायदा

ड्राईलैंड खेती से किसानों की आय बढ़ी: संसद में बोले शिवराज, CRIDA तकनीकों से 6000 रुपये/एकड़ का फायदा

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यसभा में बताया कि ICAR-CRIDA की तकनीकों और जल संरक्षण उपायों से किसानों की आय में प्रति एकड़ 6000 रुपये तक बढ़ोतरी हुई है. सरकार ड्राईलैंड खेती, जलवायु-अनुकूल किस्मों और श्री अन्न (मिलेट्स) को बढ़ावा देकर किसानों की आमदनी बढ़ाने पर जोर दे रही है.

Union Minister Shivraj In LoksabhaUnion Minister Shivraj In Loksabha
क‍िसान तक
  • New Delhi ,
  • Mar 27, 2026,
  • Updated Mar 27, 2026, 5:59 PM IST

केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने शुक्रवार को राज्यसभा में शुष्क खेती, जलवायु-अनुकूल फसल किस्मों, श्री अन्न (मिलेट्स) और किसानों की आय बढ़ाने से जुड़े मुद्दों पर सरकार का पक्ष रखा. उन्होंने बताया कि नई तकनीकों और योजनाओं के जरिए किसानों की आय में बड़ा सुधार हुआ है.

मंत्री ने कहा कि हैदराबाद स्थित ICAR-CRIDA (केंद्रीय बरानी/शुष्क कृषि अनुसंधान संस्थान) द्वारा विकसित तकनीकों के प्रभाव के आकलन में यह सामने आया है कि मौसम आधारित सलाह से किसानों की आय में औसतन 6,000 रुपये प्रति एकड़ की बढ़ोतरी हुई है. वहीं खेत-तालाब, चेक-डैम और अन्य जल संरक्षण उपायों के जरिए प्रति खेत-तालाब करीब 73,895 रुपये तक अतिरिक्त आय दर्ज की गई.

खाद्यान्न उत्पादन में तेजी

शिवराज सिंह ने बताया कि हरित क्रांति के दौरान जहां खाद्यान्न उत्पादन में तेजी आई, वहीं शुष्क और वर्षा-आधारित क्षेत्र अपेक्षाकृत पीछे रह गए थे. अब सरकार देश की करीब 48 प्रतिशत शुष्क भूमि पर विशेष ध्यान दे रही है. इसके चलते 2021 में इन क्षेत्रों में खाद्यान्न उत्पादन में 82 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई और राष्ट्रीय उत्पादन में इनकी हिस्सेदारी 29 प्रतिशत से बढ़कर 39 प्रतिशत हो गई.

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा जैसे सूखा-प्रभावित क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि यहां के 23 जिलों के लिए विशेष परियोजनाएं चलाई जा रही हैं. कृषि विज्ञान केंद्रों और विश्वविद्यालयों के माध्यम से किसानों तक नई तकनीकें पहुंचाई जा रही हैं. राज्य के लिए 808 जलवायु-अनुकूल और उच्च उत्पादकता वाली फसल किस्में विकसित या चयनित की गई हैं, जिनमें अनाज, तिलहन, दलहन और अन्य फसलें शामिल हैं.

श्री अन्न देश की कृषि विरासत

मंत्री ने श्री अन्न यानी मिलेट्स को भारत की पारंपरिक कृषि विरासत बताते हुए कहा कि इन्हें बढ़ावा देने के लिए विशेष मिशन चलाया जा रहा है. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत मिलेट्स पर उप-मिशन भी संचालित है. उन्होंने बताया कि 2015 से 2025 के बीच पंजाब में ज्वार, बाजरा और अन्य मिलेट्स की 45 किस्में जारी की गई हैं और कई जिलों में इनकी खेती बढ़ रही है.

इसके साथ ही सरकार ने ज्वार, बाजरा और रागी जैसी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में भी बढ़ोतरी की है. वर्ष 2024-25 के दौरान 11 लाख टन से अधिक श्री अन्न की सरकारी खरीद की गई, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिल सके. कृषि मंत्री ने कहा कि “लैब से लैंड” अभियान के तहत नई तकनीकों को तेजी से खेतों तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे उत्पादन, उत्पादकता और किसानों की आय—तीनों में सुधार हो रहा है.

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