
केंद्र सरकार ने प्याज और धान की ढुलाई को सस्ता करने के लिए बड़ा फैसला लिया है. रेलवे बोर्ड ने मालगाड़ी के वैगनों में इन दोनों फसलों की लोडिंग की तय क्षमता घटा दी है. इससे किसानों और व्यापारियों को माल ढुलाई के खर्च में राहत मिलने की उम्मीद है. नए नियम 28 अक्टूबर 2026 से लागू हो गए हैं और 27 अक्टूबर 2027 तक प्रभावी रहेंगे. रेलवे बोर्ड के नए आदेश के मुताबिक, BCN और BCNA श्रेणी के मालगाड़ी वैगनों में धान के लिए लोडिंग की सीमा 52 टन और प्याज के लिए 45 टन तय की गई है. यह नियम अलग-अलग रेलवे रूट पर लागू होगा. पहले इन वैगनों में धान और प्याज की ढुलाई के लिए 59.8 से 64 टन तक की क्षमता निर्धारित थी. अब इसे घटाकर दोनों फसलों के लिए अलग-अलग सीमा तय कर दी गई है.
रेलवे बोर्ड ने कहा है कि नए नियम एक साल तक लागू रहेंगे. यानी 28 अक्टूबर 2026 से 27 अक्टूबर 2027 तक प्याज और धान की ढुलाई इसी नई व्यवस्था के तहत होगी. रेलवे के मुताबिक, कई बार मालगाड़ी में वास्तव में लोड किए गए वजन और मालभाड़े की गणना के लिए तय वजन के बीच अंतर रहता है. इसी अंतर को कम करने के लिए लोडिंग क्षमता में बदलाव किया गया है. रेलवे का कहना है कि इससे धान और प्याज के परिवहन पर मालभाड़े का बोझ कम होगा और कृषि कारोबार से जुड़े लोगों को राहत मिलेगी.
महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक किसान संगठन ने रेलवे के इस फैसले का स्वागत किया है. संगठन के संस्थापक अध्यक्ष भरत दिघोले ने कहा कि प्याज के लिए मालगाड़ी के BCN और BCNA वैगनों की अनुमत लदान क्षमता 45 टन तय होने से रेलवे माल ढुलाई शुल्क में करीब 29 फीसदी की कमी आएगी. इससे प्याज के व्यापारियों और निर्यातकों को राहत मिलने की उम्मीद है.
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र से देश के अलग-अलग राज्यों और बंदरगाहों तक प्याज भेजने वाले कारोबारियों को इस फैसले का फायदा मिलेगा. रेल से कम लागत पर प्याज की ढुलाई होने से सड़क परिवहन पर निर्भरता भी घट सकती है. इससे घरेलू बाजार के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय प्याज की प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मदद मिलेगी.
भरत दिघोले ने कहा कि महाराष्ट्र देश का सबसे बड़ा प्याज उत्पादक राज्य है. नासिक, अहिल्यानगर, पुणे, सोलापुर, धुले और जलगांव समेत कई जिलों में बड़े पैमाने पर प्याज की खेती होती है. किसानों को उत्पादन लागत, बाजार में कम भाव, भंडारण और परिवहन खर्च जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है.
उन्होंने कहा कि रेलवे की ओर से माल ढुलाई खर्च में की गई कमी का फायदा केवल व्यापारियों और निर्यातकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए. इसका लाभ प्याज उत्पादकों को मिलने वाले खरीद मूल्य में भी दिखाई देना चाहिए.
महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक किसान संगठन ने केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय से प्याज की ढुलाई के लिए विशेष मालगाड़ियां चलाने और नासिक, लासलगांव, मनमाड और पिंपलगांव बसवंत जैसी प्रमुख प्याज मंडियों को रेलवे नेटवर्क से बेहतर तरीके से जोड़ने की मांग की है.
संगठन ने प्याज निर्यात के लिए बंदरगाहों तक विशेष रेल परिवहन सुविधा देने, मालभाड़े में अतिरिक्त छूट देने और अलग-अलग रूट पर प्रति क्विंटल होने वाली बचत की जानकारी सार्वजनिक करने की भी मांग की है. इसके अलावा, संगठन ने ऐसी व्यवस्था बनाने की मांग की है, जिससे माल ढुलाई में होने वाली बचत का वास्तविक लाभ किसानों तक पहुंच सके.
भरत दिघोले ने कहा कि प्याज की ढुलाई सस्ती करना किसानों के हित में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए उन्हें उपज का उचित दाम मिलना भी जरूरी है. इसके लिए बेहतर भंडारण व्यवस्था, कम परिवहन लागत और स्थिर निर्यात नीति पर काम करना होगा.
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक किसान संगठन इस फैसले का स्वागत करता है और किसानों को इसका वास्तविक लाभ दिलाने के लिए केंद्र सरकार, रेल मंत्रालय, APEDA और महाराष्ट्र सरकार के सामने अपनी मांगें उठाता रहेगा.