
महाराष्ट्र में सूखे के गंभीर हालात को देखते हुए राज्य सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए कई बड़े फैसले लिए हैं. राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जिन किसानों के निजी कुओं का इस्तेमाल पिछले दो साल में पानी की कमी दूर करने के लिए किया गया था, उन्हें 20 नवंबर तक बकाया भुगतान कर दिया जाए. मंत्री ने चेतावनी दी है कि अगर किसानों को समय पर पैसा नहीं मिला, तो वे आगे अपने कुओं का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देंगे.
बुधवार को सूखा प्रबंधन को लेकर राज्य कैबिनेट की उप-समिति की बैठक हुई. इसकी अध्यक्षता मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने की. बैठक में सूखे से निपटने और किसानों के साथ ग्रामीण इलाकों के लोगों को राहत देने के लिए कई फैसले लिए गए. सरकार ने बताया कि महाराष्ट्र के 358 में से 304 तालुकों में सूखा घोषित किया गया है. यानी राज्य के करीब 85 प्रतिशत हिस्से में सूखे जैसे हालात हैं. इससे पहले सरकार ने दिवाली से पहले किसानों को 5,000 रुपये की शुरुआती आर्थिक मदद देने का ऐलान किया था.
बैठक में जल जीवन मिशन के तहत अधूरे पड़े कामों को तेजी से पूरा करने का फैसला लिया गया. सरकार के अनुसार, इस योजना के करीब 75 प्रतिशत काम पूरे हो चुके हैं, जबकि बाकी 25 प्रतिशत कामों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं. इसके अलावा सूखे से प्रभावित इलाकों में फलों के बागों को बचाने, पानी के स्रोतों को दोबारा उपयोगी बनाने और चारे की कमी दूर करने पर भी जोर दिया गया है, जिन जिलों में चारा अधिक मात्रा में उपलब्ध है, वहां से जरूरत वाले जिलों तक चारा पहुंचाया जाएगा.
सरकार ने 5 करोड़ रुपये से कम लागत वाली योजनाओं के लिए कम से कम 500 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने का फैसला किया है. इन योजनाओं की अगले तीन महीनों में केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार तैयारी की जाएगी. इसके साथ ही जिला योजना समिति (DPC) का बजट बढ़ाने और मनरेगा की योजनाओं को जिला स्तर की योजनाओं से जोड़ने का फैसला किया गया है, ताकि एक ही काम पर दोबारा पैसा खर्च न हो.
सरकार ऐसे परिवारों की मदद के लिए भी योजना बना रही है, जो सरकारी, मंदिर या दूसरी जमीनों पर खेती तो करते हैं, लेकिन उनके पास खेती से जुड़े औपचारिक दस्तावेज नहीं हैं. ऐसे परिवारों की संख्या करीब 4 से 5 लाख बताई गई है. मंत्री बावनकुले ने अधिकारियों को इसके लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने का निर्देश दिया है, ताकि इन परिवारों को भी केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ मिल सके. इसके अलावा किसानों को परती और दूसरी जमीनों पर ज्वार, मक्का और चना जैसी फसलें उगाने की अनुमति देने की बात कही गई है.
सरकार सूखा प्रभावित क्षेत्रों की सूची में 13 और तालुकों को शामिल करने पर भी विचार कर रही है. अधिकारियों को 15 नवंबर तक उन तालुकों की विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा गया है, जहां सूखा घोषित करने की जरूरत हो सकती है. ऐसे में महाराष्ट्र सरकार सूखे से प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए आर्थिक मदद, पानी, चारा, रोजगार और कर्ज वसूली जैसे मुद्दों पर कदम उठाने की तैयारी कर रही है. अब देखना होगा कि इन फैसलों को जमीन पर कितनी तेजी से लागू किया जाता है और किसानों को इनका कितना फायदा मिलता है. (PTI)