
इंदौर में आयोजित BRICS देशों के कृषि मंत्रियों की बैठक के जरिए भारत ने कृषि क्षेत्र में सहयोग, नवाचार और छोटे किसानों के सशक्तिकरण को वैश्विक चर्चा के केंद्र में रखने का प्रयास किया. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह सम्मेलन केवल देशों के बीच संवाद का मंच नहीं है, बल्कि भविष्य की कृषि व्यवस्था को अधिक समावेशी और टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है.
मीडिया से बातचीत के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विकास और अपनी सांस्कृतिक विरासत दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है और इसी सोच की झलक इस अंतरराष्ट्रीय कृषि बैठक में भी दिखाई दे रही है.
उन्होंने बताया कि BRICS समूह दुनिया की बड़ी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है और इन देशों की कृषि व्यवस्था में छोटे किसानों की भूमिका बेहद अहम है. ऐसे में बैठक का मुख्य उद्देश्य ऐसे मॉडल और नीतियों पर चर्चा करना है, जिनसे किसानों की आय बढ़े, खेती अधिक उत्पादक बने और कृषि क्षेत्र लंबे समय तक टिकाऊ रह सके.
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कृषि विकास को अब केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रखा जा सकता. खाद्य और पोषण सुरक्षा को मजबूत करना भी उतना ही जरूरी है ताकि लोगों तक बेहतर और संतुलित आहार पहुंच सके. इसी सोच के साथ सदस्य देशों के बीच अनुभव और रणनीतियों को साझा किया जा रहा है.
बैठक में महिलाओं की कृषि क्षेत्र में बढ़ती भागीदारी और युवाओं को खेती से जोड़ने पर भी विशेष चर्चा रखी गई. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आधुनिक तकनीक, नवाचार और डिजिटल कृषि के माध्यम से खेती को नई पीढ़ी के लिए अधिक आकर्षक और उपयोगी बनाया जा सकता है. साथ ही जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीक आधारित समाधान पर भी विचार किया जा रहा है.
उन्होंने बताया कि सम्मेलन के दौरान विदेशी प्रतिनिधियों को भारत की सांस्कृतिक पहचान और विरासत से परिचित कराने के लिए ऐतिहासिक स्थलों का भी अनुभव कराया जाएगा, ताकि वे भारतीय परंपराओं और जीवन मूल्यों को करीब से समझ सकें. केंद्रीय मंत्री ने उम्मीद जताई कि बैठक के समापन पर जारी होने वाला ‘इंदौर डिक्लेरेशन’ कृषि सहयोग, खाद्य सुरक्षा और किसानों के हितों को मजबूत करने के लिए साझा दृष्टिकोण तैयार करने में अहम भूमिका निभाएगा.