बिहार के इथेनॉल सेक्टर को राहत: केंद्र सरकार जल्द बढ़ाएगी कोटा, लिमिट हटाने का फैसला

बिहार के इथेनॉल सेक्टर को राहत: केंद्र सरकार जल्द बढ़ाएगी कोटा, लिमिट हटाने का फैसला

केंद्र सरकार ने बिहार के इथेनॉल कोटे में बढ़ोतरी और कैप हटाने पर सहमति जताई है, जिससे राज्य के इथेनॉल उद्योग को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. इस फैसले से उत्पादन बढ़ेगा, किसानों की आय में सुधार होगा और 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी.

Ethanol Production Sugarcane FRP and Sugar MSP Issue Ethanol Production Sugarcane FRP and Sugar MSP Issue
क‍िसान तक
  • New Delhi ,
  • Apr 08, 2026,
  • Updated Apr 08, 2026, 1:00 PM IST

केंद्र सरकार बिहार के इथेनॉल कोटे में बढ़ोतरी करने और मौजूदा सीमा (Cap) को हटाने पर सहमत हो गई है, जिससे राज्य के संकटग्रस्त इथेनॉल क्षेत्र को बड़ी राहत मिली है. बिहार के उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल ने यह घोषणा की. इस संबंध में जल्द ही एक आधिकारिक आदेश जारी किया जाएगा.

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब आवंटन में कमी के कारण बिहार का इथेनॉल उद्योग कई चुनौतियों का सामना कर रहा है. मौजूदा समय में राज्य में लगभग 15 इथेनॉल प्लांट हैं जिनकी कुल वार्षिक उत्पादन क्षमता करीब 50 करोड़ लीटर है. हालांकि, केंद्र ने पहले कोटा 38-40 करोड़ लीटर तय किया था, जिसे बाद में घटाकर 30 करोड़ लीटर और फिर लगभग 18-20 करोड़ लीटर कर दिया गया था. इसके कारण बिहार के आवंटन में लगभग 45-55% की गिरावट आई थी, जिससे प्लांटों को अपना उत्पादन कम करने के लिए मजबूर होना पड़ा, जबकि कुछ अन्य राज्यों को उनकी क्षमता का लगभग 100% आवंटन मिला था.

बिहार के इथेनॉल प्लांटों से बढ़ेगी खरीद

मीडिया से बात करते हुए जायसवाल ने कहा कि केंद्र सरकार जल्द ही तेल मार्केटिंग कंपनियों को निर्देश देगी कि वे बिहार के इथेनॉल प्लांटों से खरीद बढ़ाएं. उन्होंने कहा, "यह कैपिंग जल्द ही खत्म हो जाएगी. राज्य सरकार की गुजारिश मान ली गई है और अगले एक-दो महीनों में इस बारे में आदेश आने की उम्मीद है."

बिहार में अभी अनाज पर आधारित 12 इथेनॉल प्लांट हैं, जिनकी कुल क्षमता सालाना लगभग 70 करोड़ लीटर है. लेकिन, पिछले एक साल से तेल कंपनियां उत्पादन का सिर्फ 50% ही खरीद रही थीं, जिसकी वजह से प्लांटों को उत्पादन आधा करना पड़ा और लागत पर काबू पाने के लिए हर महीने 15 दिनों के लिए काम बंद रखना पड़ा.

कोटा बढ़ने के इस कदम से इंडस्ट्री को बहुत जरूरी राहत मिलने की उम्मीद है. मक्का और दूसरे कच्चे माल की मांग बढ़ने से किसानों की आमदनी में भी बढ़ोतरी होगी.

इथेनॉल में बिहार की बड़ी जिम्मेदारी

भारत में ट्रांसपोर्ट के लिए इस्तेमाल होने वाले ईंधन में पेट्रोल के साथ इथेनॉल मिलाने का काम दो दशक से भी पहले शुरू हुआ था. 5% और फिर 10% इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य हासिल करने के बाद, केंद्र सरकार ने 2020 में, 2025 तक 20% इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य रखा. इस लक्ष्य को हासिल करने की जिम्मेदारी बिहार पर भी रही और उसके मुताबिक इथेनॉल उत्पादन बढ़ाने का जिम्मा दिया गया था.

इस नीति का मकसद ईंधन के आयात पर निर्भरता कम करना, करीब 300 अरब रुपये की बचत करना और कार्बन का स्तर घटाना था, क्योंकि इथेनॉल को कम प्रदूषण फैलाने वाला ईंधन माना जाता है, जिसे अनाज और शीरे (चीनी उद्योग का एक उप-उत्पाद) से बनाया जाता है.

हालांकि, उस समय भारत की इथेनॉल उत्पादन क्षमता करीब 6.84 अरब लीटर थी, जिसमें से 4.26 अरब लीटर शीरे से और 2.58 अरब लीटर अनाज से आता था. लेकिन, नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुमान के मुताबिक, 2025 का लक्ष्य पूरा करने के लिए सालाना 10.16 अरब लीटर इथेनॉल की जरूरत थी. इथेनॉल की मांग की वजह से, पूरे देश में खास तौर पर इथेनॉल बनाने वाले डिस्टिलेशन प्लांट का तेजी से विस्तार हुआ. इसमें बिहार ने भी बड़ी भागीदारी निभाई, लेकिन बाद में इसका कोटा घटा दिया गया था. अब इसे फिर बढ़ाने की कवायद तेज कर दी गई है.

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