
राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने भारत के सुपारी किसानों और वैध कारोबार को नुकसान पहुंचाने वाले बड़े अवैध आयात नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है. जांच में सामने आया है कि इंडोनेशिया, थाईलैंड, मलेशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के दूसरे देशों से सुपारी भारत लाई जा रही थी, लेकिन दस्तावेजों में उसका मूल देश बांग्लादेश बताया जा रहा था. इसके जरिए आरोपी SAFTA के तहत मिलने वाली सीमा शुल्क छूट का गलत फायदा उठा रहे थे. DRI की जांच में हाल के वर्षों में इस तरीके से हुए आयात से सरकारी खजाने को 2,500 करोड़ रुपये से ज्यादा के सीमा शुल्क के नुकसान का पता चला है. मामले में अब तक नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है. यह कार्रवाई कई महीनों से चल रही खुफिया जांच के बाद की गई है.
अवैध तरीके से कम या बिना सीमा शुल्क के भारत पहुंच रही सुपारी का असर घरेलू बाजार पर पड़ा. इससे देश के सुपारी उत्पादकों और वैध कारोबारियों के लिए प्रतिस्पर्धा का माहौल प्रभावित हुआ. DRI के अनुसार, ऐसे अवैध आयात से घरेलू सुपारी उत्पादकों को नुकसान होता है, बाजार में कीमतों का असंतुलन पैदा होता है और वैध कारोबार करने वालों के लिए समान अवसर प्रभावित होते हैं.
भारत में सुपारी के आयात पर 100 फीसदी बेसिक कस्टम ड्यूटी लगती है. हालांकि, SAFTA के तहत तय नियमों के मुताबिक पात्र आयात को सीमा शुल्क से छूट मिलती है. बांग्लादेश मूल की सुपारी भी निर्धारित रूल्स ऑफ ऑरिजिन की शर्तें पूरी करने पर इस छूट के दायरे में आती है.
DRI को जानकारी मिली कि कुछ सिंडिकेट इंडोनेशिया, थाईलैंड, मलेशिया और अन्य दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से सुपारी मंगाकर उसका मूल देश बांग्लादेश दिखा रहे थे. इस तरह वे SAFTA की शुल्क छूट का गलत तरीके से फायदा उठा रहे थे.
जांच में सामने आया कि नेटवर्क के मुख्य आरोपी दक्षिण-पूर्व एशिया से आने वाली सुपारी को पहले बांग्लादेश के एक एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग जोन (EPZ) तक पहुंचाते थे. इसके बाद केवल कंटेनर और पैकिंग बैग बदलकर उसी माल को बांग्लादेशी मूल की सुपारी के तौर पर भारत भेजा जाता था.
आरोपियों ने बांग्लादेशी अधिकारियों से SAFTA Certificate of Origin भी गलत तरीके से हासिल किए. भारतीय आयातकों के लिए माल की रूटिंग, दस्तावेज, क्लीयरेंस और ट्रांसपोर्टेशन की व्यवस्था कराने के बदले नेटवर्क के सदस्य मोटा कमीशन लेते थे.
DRI ने कोलकाता और विशाखापट्टनम में आयातकों, कस्टम ब्रोकर और IEC धारकों से जुड़े कई ठिकानों पर एक साथ तलाशी ली. इस दौरान दक्षिण-पूर्व एशियाई मूल की सुपारी से जुड़े कई दस्तावेज और अहम सबूत मिले. अधिकारियों ने करीब 75 लाख रुपये नकद जब्त किए. DRI के मुताबिक, यह रकम अवैध तरीके से आयात किए गए माल की बिक्री से मिली रकम मानी जा रही है. इसके अलावा करीब 160 मीट्रिक टन सुपारी की एक खेप भी जब्त की गई.
जांच में अवैध कमाई के लेनदेन और उसे अलग-अलग स्तरों पर घुमाने के लिए हवाला चैनल और डमी संस्थाओं के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है. नेटवर्क के सदस्य भारतीय आयातकों से बड़ी रकम नकद में भी वसूल रहे थे.
DRI की जांच में एक कस्टम ब्रोकर फर्म की भूमिका भी सामने आई, जो मामले में पहचाने गए ज्यादातर फर्जी सुपारी आयात की क्लीयरेंस के लिए जिम्मेदार थी. कार्रवाई के बाद सक्षम प्राधिकारी ने इस कस्टम ब्रोकर का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया है. इस मामले में अब तक नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है. DRI की जांच जारी है.