महाराष्ट्र में बांस से बदलेगी किसानों-आदिवासियों की किस्मत, राज्यपाल ने बताया नई अर्थव्यवस्था का रास्ता

महाराष्ट्र में बांस से बदलेगी किसानों-आदिवासियों की किस्मत, राज्यपाल ने बताया नई अर्थव्यवस्था का रास्ता

महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने राज्य में बांस आधारित अर्थव्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया है. उन्होंने गढ़चिरौली जैसे जिलों में बांस की पूरी वैल्यू चेन तैयार कर किसानों, आदिवासी समुदायों, महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की बात कही.

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क‍िसान तक
  • Noida,
  • Sep 28, 2026,
  • Updated Sep 28, 2026, 12:52 PM IST

महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने राज्य में बांस आधारित अर्थव्यवस्था विकसित करने की जरूरत बताई है. उन्होंने कहा कि बांस ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर पैदा करने के साथ-साथ प्लास्टिक के विकल्प के तौर पर हरित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे सकता है. मुंबई में आयोजित बैम्‍बू इकोनॉमी एंड सस्‍टेनेबिलिटी समिट (Bamboo Economy and Sustainability Summit) को संबोधित करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र में बांस की पूरी वैल्यू चेन विकसित करने पर जोर दिया.

त्रिपुरा के मॉडल से सीखने की सलाह

राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने कहा कि महाराष्ट्र बांस के क्षेत्र में अपने गृह राज्य त्रिपुरा के अनुभवों से सीख सकता है. उन्होंने गढ़चिरौली जैसे जिलों को बांस उत्पादन और उससे जुड़े कारोबार के प्रमुख केंद्र के तौर पर विकसित करने का सुझाव दिया. उन्‍हाेंने कहा कि इससे स्थानीय किसानों और आदिवासी समुदायों को आर्थिक रूप से मजबूत करने में मदद मिल सकती है.

जलवायु परिवर्तन से निपटने में बांस की भूमिका

राज्यपाल ने बांस को जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों से भी जोड़ा. उन्होंने कहा कि बांस तेजी से दोबारा तैयार होने वाला प्राकृतिक संसाधन है, इसलिए टिकाऊ उत्पादन और खपत को बढ़ावा देने में इसकी अहम भूमिका हो सकती है. इससे भारत को हरित और सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में आगे बढ़ने में मदद मिल सकती है.

राज्‍यपाल जिष्णु देव वर्मा ने बांस से उत्पाद बनाने वाले भारतीय कारीगरों के पारंपरिक कौशल की सराहना की. उन्होंने कहा कि अगर इस हुनर को आधुनिक डिजाइन, प्रोसेसिंग तकनीक, ब्रांडिंग और डिजिटल मार्केटिंग से जोड़ा जाए तो महाराष्ट्र के बांस उत्पादों के लिए देश और विदेश में बड़े बाजार तैयार किए जा सकते हैं.

युवाओं और महिलाओं के लिए बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

राज्यपाल ने कहा कि देश की बड़ी युवा आबादी को देखते हुए बांस आधारित उद्योग युवाओं और महिला उद्यमियों के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है. स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमों को भी इससे जोड़कर स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के साधन विकसित किए जा सकते हैं.

वहीं, महाराष्ट्र राज्य कृषि मूल्य आयोग के अध्यक्ष और मुख्यमंत्री की पर्यावरण एवं सतत विकास टास्क फोर्स के कार्यकारी अध्यक्ष पाशा पटेल ने बांस को जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने में अहम बताया. उन्होंने कहा कि राज्य में 33 प्रतिशत हरित क्षेत्र का लक्ष्य तेजी से हासिल करने के लिए बांस उपयोगी हो सकता है.

पेड़-पौधों की तुलना में बांस की तेज वृद्धि

पाशा पटेल ने कहा कि पीपल और बरगद जैसे पेड़ों को पूरी तरह विकसित होने में 40 से 50 साल तक लग सकते हैं, जबकि बांस अपेक्षाकृत कम समय में तेजी से बढ़ता है. उनके अनुसार बड़े पैमाने पर बांस लगाने से हरित क्षेत्र को तेजी से बढ़ाने में मदद मिल सकती है.

पाशा पटेल ने कहा कि बांस वातावरण से बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करता है और पर्याप्त ऑक्सीजन छोड़ता है. इसी वजह से जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने के प्रयासों में बांस को महत्वपूर्ण संसाधन के तौर पर देखा जा सकता है.

किसानों के लिए लंबी अवधि की आय का जरिया

पाशा पटेल ने बांस की खेती को किसानों के लिए अपेक्षाकृत स्थिर और जलवायु अनुकूल विकल्प बताया. उन्होंने कहा कि कपास और सोयाबीन जैसी फसलें मौसम में अनियमितता से प्रभावित हो सकती हैं, जबकि बांस लगाने के बाद इसकी देखभाल की जरूरत अपेक्षाकृत कम रहती है और यह लंबे समय तक किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने वाला विकल्प बन सकता है.

कार्बन स्तर बढ़ने को लेकर जताई चिंता

पाशा पटेल ने वायुमंडल में कार्बन के बढ़ते स्तर को लेकर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि हवा में कार्बन की मात्रा 350 पार्ट्स पर मिलियन यानी पीपीएम को सुरक्षित स्तर माना जाता है, जबकि मौजूदा स्तर करीब 430 पीपीएम बताया जा रहा है. वर्ष 2050 तक यह स्तर 450 पीपीएम तक पहुंच सकता है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि कार्बन का स्तर 450 पीपीएम तक पहुंचने पर पृथ्वी पर जीवन की परिस्थितियां बेहद कठिन हो सकती हैं. (पीटीआई)

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