
चाय की क्वालिटी बेहतर बनाने और उसकी सही जानकारी रखने के लिए सरकार का चाय बोर्ड 'टी मार्क' नाम की नई गुणवत्ता प्रमाणन योजना शुरू करने जा रहा है. जानकारी के मुताबिक, यह योजना इस साल मई में लागू होगी. 'टी मार्क' का मतलब होगा कि जिस चाय पर यह निशान लगा है, उसकी सही तरीके से जांच की गई है और वह सभी सरकारी नियमों और खाद्य सुरक्षा मानकों पर खरी उतरती है. इससे लोगों को अच्छी और सुरक्षित चाय मिल सकेगी.
सरकार के आदेश के मुताबिक 'टी मार्क' योजना वैकल्पिक होगी. इसे वही चाय निर्माता इस्तेमाल कर सकेंगे, जो चाय (मार्केटिंग) नियंत्रण आदेश, 2003 के तहत रजिस्टर्ड हैं. इस मार्क का मतलब होगा कि चाय सिर्फ नियमों के मुताबिक ही नहीं बनी है, बल्कि उसकी क्वालिटी भी अच्छी है. इस योजना के जरिए चाय बोर्ड मिलावट, घटिया चाय मिलाने और चाय की असली जगह (origin) के बारे में गलत जानकारी देने जैसी समस्याओं को कम करना चाहता है.
बता दें कि चाय बोर्ड ही 'टी मार्क' का लोगो बनाएगा, उसे चुनेगा, रजिस्टर करेगा और उसका प्रचार करेगा. जिन चाय कंपनियों को इसकी अनुमति मिलेगी, वे तय नियमों का पालन करने के बाद अपने प्रोडक्ट पर यह निशान लगा सकेंगी. इससे यह सुनिश्चित होगा कि चाय कहां से आई है और उसकी जांच सही तरीके से हुई है, इसकी पूरी जानकारी डिजिटल तरीके से ट्रैक की जा सकेगी. साथ ही तय लैब में इसकी जांच भी कराई जाएगी. अगर कोई इस लोगो का गलत इस्तेमाल करता है या गलत जानकारी देता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
इसके अलावा, चाय बोर्ड 'टी मार्क' वाली चाय की बिक्री बढ़ाने के लिए एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म (ई-कॉमर्स) भी बना सकता है, ताकि लोग आसानी से अच्छी क्वालिटी की चाय खरीद सकें. बता दें कि भारत दुनिया में चाय उत्पादन में दूसरे नंबर पर है और काली चाय बनाने में पहले नंबर पर आता है. साल 2023 में देश में करीब 1197 करोड़ किलोग्राम चाय की खपत होने का अनुमान है. भारत में एक व्यक्ति औसतन साल में करीब 840 ग्राम चाय पीता है. गांवों में यह खपत करीब 797 ग्राम है, जबकि शहरों में यह बढ़कर करीब 925 ग्राम तक पहुंच जाती है.