गन्ने के साथ मूंगफली की खेती से बढ़ी कमाई, मेरठ के किसान का मॉडल बना मिसाल

गन्ने के साथ मूंगफली की खेती से बढ़ी कमाई, मेरठ के किसान का मॉडल बना मिसाल

मेरठ के किसान विनोद सैनी ने गन्ने के साथ मूंगफली की सहफसली खेती का एक मॉडल तैयार किया है. किसान का कहना है कि इससे गन्ने की पैदावार बढ़ी, रस की मात्रा बेहतर हुई और मिट्टी की सेहत में भी सुधार आया. मूंगफली की जड़ों में मौजूद राइजोबियम जीवाणु नाइट्रोजन स्थिरीकरण में मदद करता है, जिससे मृदा उर्वरता बढ़ती है और फसल को प्राकृतिक पोषण मिलता है.

धर्मेंद्र सिंह
  • मेरठ ,
  • May 13, 2026,
  • Updated May 13, 2026, 12:05 PM IST

पश्चिम उत्तर प्रदेश के किसान अब पारंपरिक गन्ने की खेती को और लाभकारी बनाने के लिए नई तकनीक और दूसरी फसलों का सहारा ले रहे हैं. किसान अब सहफसली खेती के जरिए खेती को अधिक लाभकारी बनाने में जुट गए हैं. गन्ना बेल्ट के रूप में पहचान रखने वाले मेरठ, शामली और सहारनपुर जैसे जिलों में किसान अब केवल एक फसल पर निर्भर नहीं रहना चाहते, बल्कि नई फसलों और आधुनिक मॉडल को अपनाकर अपनी आय बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।

मेरठ जिले की सरधना तहसील के कुसावली गांव के प्रगतिशील किसान विनोद सैनी ने इसका एक सफल उदाहरण पेश किया है. उन्होंने गन्ने के साथ मूंगफली की सहफसली खेती कर न केवल अतिरिक्त आय हासिल की बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता और गन्ने की पैदावार में भी सुधार देखा.

वैज्ञानिकों की सलाह पर शुरू किया प्रयोग

विनोद सैनी ने बताया कि उन्होंने मोदीपुरम स्थित भारतीय फसल प्रणाली अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों की सलाह पर पिछले वर्ष गन्ने के साथ मूंगफली की खेती का प्रयोग शुरू किया था.शुरुआती परिणाम उम्मीद से बेहतर मिले, जिसके बाद इस बार उन्होंने दो एकड़ क्षेत्र में गन्ने के साथ मूंगफली की फसल लगाई.

किसान के अनुसार, इस प्रयोग से गन्ने की वृद्धि बेहतर हुई, रस की मात्रा बढ़ी और मिट्टी की उर्वरता में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिला. मूंगफली की फसल से अतिरिक्त आमदनी होने के साथ खेत की सेहत भी मजबूत हुई.

मिट्टी को प्राकृतिक रूप से मिल रहा पोषण

विशेषज्ञों के मुताबिक मूंगफली की जड़ों में पाए जाने वाले राइजोबियम जीवाणु वातावरण से नाइट्रोजन लेकर उसे मिट्टी में स्थिर करने का काम करते हैं. इससे खेत की उर्वरता बढ़ती है और फसल को प्राकृतिक पोषण मिलता है. यही वजह है कि सहफसली खेती का यह मॉडल किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रहा है.

गन्ने के साथ पॉपुलर की खेती भी बढ़ रही

किसान कारवां के दौरान पश्चिम उत्तर प्रदेश के मेरठ, शामली और सहारनपुर जिलों में यह देखने को मिला कि किसान अब गन्ने के साथ पॉपुलर जैसे पेड़ों की खेती भी तेजी से अपना रहे हैं. किसान बताते हैं कि पॉपुलर के पौधे लगाने के बाद शुरुआती तीन से चार वर्षों तक खेत में गन्ना, सब्जियां, धान और गेहूं जैसी फसलें आसानी से उगाई जा सकती हैं.

करीब पांच साल बाद पॉपुलर की फसल तैयार हो जाती है, जिससे किसानों को एकमुश्त बड़ी आय प्राप्त होती है.इस दौरान खेत में दूसरी फसलों से भी लगातार कमाई होती रहती है. यही कारण है कि पश्चिम उत्तर प्रदेश में अब किसान बहुफसली और सहफसली खेती की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं.

किसानों के लिए बन रहा नया मॉडल

भारतीय फसल प्रणाली अनुसंधान संस्थान मोदीपुरम के विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते समय में खेती को टिकाऊ और लाभकारी बनाने के लिए सहफसली खेती सबसे बेहतर विकल्पों में से एक है. इससे न केवल किसानों की आय बढ़ती है बल्कि मिट्टी की सेहत और उत्पादन क्षमता भी लंबे समय तक बनी रहती है.मेरठ के किसान विनोद सैनी का यह प्रयोग अब दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है.

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