मॉनसून लेट, अल नीनो का साया, ऐसे निपटे खेती में आए संकट से! 

मॉनसून लेट, अल नीनो का साया, ऐसे निपटे खेती में आए संकट से! 

इस साल मानसून की सुस्त रफ्तार और अल नीनो के खतरे ने देश के बड़े हिस्से में संकट खड़ा कर दिया है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और केंद्रीय बारानी कृषि अनुसंधान संस्थान (CRIDA) के अनुसार, जून के महीने में देश भर के कई प्रमुख कृषि प्रधान राज्यों में उम्मीद से काफी कम बारिश हुई है, जिससे पानी की भारी किल्लत देखी जा रही है. केवल इक्का-दुक्का राज्यों को छोड़कर बाकी अधिकांश हिस्सों में सूखे जैसे हालात हैं। इस गंभीर स्थिति और आने वाले मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को बेहद मुस्तैद रहने और अपनी फसलों को बचाने के लिए खास रणनीतियां अपनाने की पुरजोर हिदायत दी है.

बारिश कम, अल नीनो का सायाबारिश कम, अल नीनो का साया
जेपी स‍िंह
  • नई दिल्ली,
  • Jun 27, 2026,
  • Updated Jun 27, 2026, 10:09 AM IST

इस साल मानसून की रफ्तार थोड़ी सुस्त होने की वजह से देश के कई हिस्सों में उम्मीद से कम बारिश दर्ज की गई है.भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और केंद्रीय बारानी कृषि अनुसंधान संस्थान (CRIDA) के मुताबिक, जून के महीने में देश के ज्यादातर कृषि प्रधान राज्यों में पानी की भारी किल्लत देखी गई है. आंकड़ों के आईने में देखें तो 1 जून से 21 जून 2026 के बीच उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से में 52 फीसदी और पश्चिम उत्तर प्रदेश 15  फीसद तथा उत्तराखंड में 40 फीसद कम पानी गिरा है.

 इसी तरह बिहार में 42 फीसद छत्तीसगढ़ में 67 फीसद, मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में 69 फीसद और महाराष्ट्र के कोंकण व मध्य क्षेत्रों में 80% से 86% तक की भारी कमी दर्ज की गई है, बस के केवल पंजाब में सामान्य से 14 फीसद ज्यादा बारिश हुई है। इस कम बारिश और आने वाले वक्त में अल नीनो के साये को देखते हुए वैज्ञानिकों ने देश के  किसानोंको बेहद मुस्तैद रहने और खास रणनीतियां अपनाने की पुरजोर हिदायत दी है.

यूपी, बिहार में ऊंचे खेतों में धान की जिद्द छोड़ें 

इस नाजुक वक्त में उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड के किसानों के लिए सही फसलों का चुनाव और बीजों का सही इलाज ही सबसे बड़ा सहारा है. उत्तर प्रदेश के किसानों को मशविरा दिया गया है कि वे धान की नर्सरी के लिए सिर्फ मध्यम अवधि वाली किस्में ही चुनें और जीवाणु झुलसा से बचाव के लिए बीजों को स्ट्रेप्टोसाइक्लिन से उपचारित जरूर करें.

 उत्तर प्रदेश बिहार के किसानों को सलाह है कि वे ऊंचे खेतों में धान लगाने की जिद्द छोड़ें और उनकी जगह खरीफ की सब्जियों जैसे भिंडी, कद्दू, खीरा और लौकी की बुवाई को तवज्जो दें, जबकि उत्तराखंड के किसान धान की रोपाई कम गहराई पर करें ताकि कल्ले  बेहतर निकल सकें. इसके अलावा, जहां भी माइक्रोन्यूट्रिएंट की कमी दिखे, वहां यूरिया के साथ जिंक सल्फेट या फेरस सल्फेट का छिड़काव करना बेहद मुफीद रहेगा। 

MP-CG में बढ़ता पारा, नमी बचाने का जुगाड़

मध्य भारत के राज्यों, यानी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में दिन का तापमान बहुत तेजी से बढ़ रहा है, जिससे फसलों को बचाने के लिए खास इंतजाम करने होंगे.मध्य प्रदेश के किसान  सब्जियों और बागों की सिंचाई सुबह जल्दी या देर शाम को हफ्ते के अंतराल पर करें और किसी भी कीटनाशक का छिड़काव सिर्फ शाम के वक्त ही करें ताकि दवा का पूरा असर हो सके.

 मानसून की देरी को देखते हुए खरीफ की बुवाई के लिए सिर्फ वही बीज खरीदें जिनकी अंकुरण क्षमता  दालों में 70 फीसद और अनाजों में 80 फीसद से ज्यादा हो, और सोयाबीन व गन्ने के लिए 'उठी हुई क्यारी' या 'ब्रॉड-बेड-फरो'  तरीका अपनाएं ताकि कम पानी में भी नमी बरकरार रहे. वहीं छत्तीसगढ़ के किसान बादलों की आवाजाही को देखते हुए कतार में बुवाई  के लिए खेत तैयार रखें और मिट्टी जनित बीमारियों को कम करने के लिए पॉलीथिन से 'सॉइल सोलराइजेशन'  का सहारा लें.

महाराष्ट्र में अभी टालें बुवाई,

दूसरी तरफ, महाराष्ट्र और पंजाब की खेती का मिजाज इस बार बिल्कुल जुदा रहने वाला है, इसलिए यहां के किसानों को बेहद एहतियात बरतनी होगी.महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में जब तक पर्याप्त मानसूनी बारिश न हो जाए, तब तक सोयाबीन, कपास और अरहर की बुवाई को टाल देना ही अक्लमंदी है, जबकि मराठवाड़ा के किसान भाई सोयाबीन की बुवाई के वक्त बीजों का कार्बोक्सिन या थिरम जैसे फफूंदनाशकों के साथ राइजोबियम और पीएसबी  से संवर्धन  जरूर करें.पंजाब में स्थिति थोड़ी बेहतर है,

इसलिए वहां के किसान जून के आखिर तक धान की 25-35 दिन पुरानी पौध की रोपाई का काम सिलसिलेवार ढंग से  निपटाएं. पंजाब के किसान भाई नर्सरी में आयरन की कमी को दूर करने के लिए फेरस सल्फेट का छिड़काव करें और मक्के की बुवाई के लिए नमी वाले क्षेत्रों में ट्रेंचप्लांटिंग को तवज्जो दें ताकि पानी की बचत हो सके.

पशुओ को हीट स्ट्रेस से बचाव के जरूरी सलाह

खेती-किसानी के साथ-साथ इस तपिश और कम बारिश के मौसम में हमारे मवेशियों और पशुधन  की हिफाजत करना भी बेहद जरूरी है. सभी राज्यों के किसानों को चाहिए कि वे अपने पशुओं को दिन के सबसे गर्म घंटों में चरने के लिए बाहर न भेजें और उन्हें छांवदार, हवादार और साफ-सुथरे ठिकानों पर रखकर दिन में कम से कम तीन बार साफ और ठंडा पानी पिलाएं. 

दुधारू पशुओं के चारे में नमक, खनिज मिश्रण और बाईकार्बोनेट जरूर मिलाएं ताकि वे हीट स्ट्रैस  का शिकार न हों, और मुर्गियों व भेड़ों-बकरियों को बीमारियों से बचाने के लिए वक्त पर जरूरी टीके लगवाएं। बदलते मौसम के इस दौर में किसी भी तरह के नुकसान से बचने के लिए किसानअपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से राब्ता कायम रखें और 'ग्रामीण कृषि मौसम सेवा'  के बुलेटिन के हिसाब से ही अपनी फसलों और पशुओं का ख्याल रखें

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