
देशभर में किसान पारंपरिक खेती से अलग हटकर अब बागवानी के महत्व को समझ रहे हैं, जिससे उनकी आय में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है. उत्तर प्रदेश में भी अब किसान इसमें तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए सहारनपुर के एक प्रगतिशील किसान अश्वनी सैनी ने गुलाब की खेती से नई पहचान बनाई है. फरवरी का महीना उनके लिए किसी त्योहार से कम नहीं है. वैलेंटाइन डे वीक जैसे ही आता है, वैसे ही मंडियों में गुलाब की मांग कई गुना बढ़ जाती है. खासतौर पर लाल गुलाब की डिमांड इतनी ज्यादा हो जाती है कि दाम सामान्य दिनों के मुकाबले चार गुना तक पहुंच जाते हैं. यही वजह है कि किसान इस सीजन को अपनी कमाई का ‘पीक टाइम’ मानते हैं.
किसान अश्वनी सैनी ने जानकारी देते हुए बताया कि फरवरी में वैलेंटाइन वीक में गुलाब के फूलों की जबरदस्त मांग रहती है. उनका गुलाब मंडी में 35 से 40 रुपये और कई बार 50 रुपये प्रति फूल तक बिक रहा है. उन्होंने बताया कि यह पूरी तरह नेचुरल खेती है, जिसे किसी फैक्ट्री में तैयार नहीं किया जा सकता. इसलिए इसका उत्पादन मौसम और समय पर ही निर्भर करता है. सामान्य दिनों की तुलना में इस समय रेट करीब चार गुना ज्यादा मिल रहे हैं, जिससे अच्छा मुनाफा हो रहा है.
अश्वनी सैनी ने 4000 वर्ग मीटर क्षेत्र में गुलाब की खेती की है और एक एकड़ के पॉलीहाउस में ‘ताजमहल’ वैरायटी का गुलाब लगाया हुआ है. यह पौधे उन्होंने जुलाई में लगाए थे और नवंबर तक फसल तैयार हो गई. गुलाब तैयार होने में चार से पांच महीने का समय लगता है. वे एक दिन छोड़कर फूल तोड़ते हैं, जिससे करीब 1000 फूल निकलते हैं. उनके पास लाल और सफेद दोनों रंग के गुलाब हैं, लेकिन वैलेंटाइन डे पर सबसे ज्यादा मांग लाल गुलाब की रहती है.
न्होंने बताया कि एक पॉलीहाउस पर करीब 60 लाख रुपये की लागत आती है, जिसमें सरकार 50 प्रतिशत तक सब्सिडी देती है. करीब 30 से 35 लाख रुपये किसान को स्वयं लगाने पड़ते हैं, लेकिन शुरुआती दो साल में ही लागत निकल आती है. फरवरी के महीने में वैलेंटाइन डे की वजह से बढ़ी मांग किसानों के लिए कमाई का सुनहरा अवसर बन जाती है. यही कारण है कि अब पारंपरिक खेती छोड़ कई किसान फूलों की खेती की ओर रुख कर रहे हैं.