
सहारनपुर की पूजा ने मशरूम उत्पादन को कमाई का जरिया बनाकर मिसाल कायम की है. शादी के बाद घर और बच्चों की जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने वर्ष 2018 में मशरूम की खेती शुरू की. कृषि विज्ञान केंद्र, सहारनपुर से प्रशिक्षण लेने के बाद पूजा ने महज दो बैग से शुरुआत की थी. आज वह 4 से 5 हजार बैग में अलग-अलग किस्म के मशरूम तैयार कर रही हैं और सालाना 15 से 20 लाख रुपये तक का टर्नओवर हासिल कर रही हैं.
पूजा ने बताया कि शादी के करीब दो-तीन महीने बाद उन्होंने मशरूम उत्पादन की ट्रेनिंग ली थी. इसके बाद उन्होंने घर पर ही दो बैग लगाकर काम शुरू किया. धीरे-धीरे उत्पादन बढ़ा और उन्होंने मशरूम की कई किस्मों को अपने काम में शामिल कर लिया. अब उनके यहां किंग ऑयस्टर, ऑयस्टर, मिल्की, बटन और पोर्टबेलो मशरूम का उत्पादन होता है.
पूजा ने बताया कि उनके यहां रोजाना करीब 40 से 50 किलो मशरूम का उत्पादन होता है और कई बार यह मात्रा इससे ज्यादा भी हो जाती है. तैयार मशरूम की बिक्री दिल्ली और देहरादून के बाजारों में की जाती है. उनके पति तैयार मशरूम को इन बाजारों तक पहुंचाते हैं. बिक्री के दौरान उन्हें करीब 200 से 250 रुपये प्रति किलो तक भाव मिल जाता है. इससे कारोबार का सालाना टर्नओवर करीब 15 से 20 लाख रुपये तक पहुंच गया है.
पूजा ने बताया कि मशरूम उत्पादन के लिए सबसे पहले भूसे को पानी में भिगोया जाता है. इसके बाद पानी निकालकर भूसे में मशरूम का बीज मिलाया जाता है. तैयार मिश्रण को पन्नियों में भरकर बैग बनाए जाते हैं. करीब 15 से 20 दिन बाद इन बैगों से मशरूम निकलना शुरू हो जाता है.
एक यूनिट करीब तीन से चार महीने तक उत्पादन देती है. एक छोटे बैग को तैयार करने में करीब 60 से 70 रुपये खर्च आता है. वहीं बड़े बैग की लागत करीब 100 से 130 रुपये तक पहुंच जाती है. उत्पादन बढ़ने के साथ उन्होंने बैगों की संख्या भी लगातार बढ़ाई और अब उनके पास करीब 4 से 5 हजार बैग रहते हैं.
पूजा मशरूम उत्पादन का काम घर से ही करती हैं. सुबह मशरूम की तुड़ाई और बैग की देखभाल से लेकर नए बैग तैयार करने तक की जिम्मेदारी वह संभालती हैं. उनके पति खेती के साथ तैयार मशरूम को बाजार तक पहुंचाते हैं. इस तरह परिवार की जिम्मेदारियों के साथ मशरूम उत्पादन का काम भी चलता रहता है.
पूजा का कहना है कि महिलाओं को यह नहीं सोचना चाहिए कि वह कुछ नहीं कर सकतीं या कमाई के लिए उन्हें घर से बाहर जाना जरूरी है. बच्चों की जिम्मेदारियों के साथ भी घर पर रहकर मशरूम उत्पादन शुरू किया जा सकता है. उन्होंने बताया कि सरकारी योजनाओं और लोन जैसी सुविधाओं से भी उन्हें इस काम में मदद मिली है.
पूजा की कहानी छोटे स्तर से शुरू होकर कारोबार को लगातार बढ़ाने की मिसाल है. दो बैग से शुरू हुआ उनका मशरूम उत्पादन अब हजारों बैग तक पहुंच चुका है और इसी काम ने उन्हें सहारनपुर में ‘मशरूम लेडी’ के रूप में पहचान दिलाई है.