मुजफ्फरपुर के अनिल ने नौकरी छोड़ टिशू कल्चर फार्मिंग को बनाया करियर, किसानों काे महंगे फलों के पौधे कर रहे सप्‍लाई

मुजफ्फरपुर के अनिल ने नौकरी छोड़ टिशू कल्चर फार्मिंग को बनाया करियर, किसानों काे महंगे फलों के पौधे कर रहे सप्‍लाई

मुजफ्फरपुर के अनिल कुमार ने नौकरी छोड़कर टिशू कल्चर तकनीक से अंजीर, अनार, एवोकाडो और अन्य कीमती फलों के पौधे तैयार करने का काम शुरू किया. उनके फार्म से अब तक करीब 5 हजार किसान जुड़ चुके हैं.

Muzaffarpur farmer anil kumarMuzaffarpur farmer anil kumar
मणि भूषण शर्मा
  • Muzaffarpur,
  • Sep 14, 2026,
  • Updated Sep 14, 2026, 10:46 AM IST

बिहार का मुजफ्फरपुर शाही लीची के लिए मशहूर है, लेकिन अब यहां आधुनिक और महंगे फलों की खेती भी पहचान बना रही है. जिले के शिरकोहिया गांव के रहने वाले अनिल कुमार ने नौकरी छोड़कर खेती को अपना करियर बनाया और टिशू कल्चर तकनीक के जरिए अंजीर समेत कई फलों के पौधे तैयार कर रहे हैं. उनका दावा है कि अब तक करीब 5 हजार किसान उनसे जुड़ चुके हैं और उनके फार्म से बिहार के अलावा कई राज्यों में पौधों की सप्लाई हो रही है.

नौकरी छोड़कर खेती को बनाया करियर

अनिल कुमार ने केमिस्ट्री से स्नातकोत्तर तक की पढ़ाई की और इसके बाद नौकरी भी की. हालांकि, बचपन से ही खेती को अपना करियर बनाने का सपना था. इसी सोच के साथ उन्होंने आधुनिक खेती की दिशा में कदम बढ़ाया. आज वह टिशू कल्चर तकनीक से अंजीर, सीडलेस नींबू, अनार, एवोकाडो समेत कई कीमती फलों के पौधे तैयार कर रहे हैं. इस काम से उन्हें खुद आमदनी हो रही है और दूसरे राज्यों के किसानों को भी नई किस्मों की खेती का विकल्प मिल रहा है.

अंजीर के पौधों में फलन शुरू

अनिल के फार्म में टिशू कल्चर से तैयार अंजीर के पौधों में अब फल भी लगने लगे हैं. उनका कहना है कि अंजीर की खेती किसानों के लिए लंबे समय तक आमदनी का जरिया बन सकती है. अनिल के मुताबिक, एक बार अंजीर का पौधा लगाने के बाद करीब 25 वर्षों तक फलन मिलने की संभावना रहती है. उन्होंने बताया कि आने वाले 20 से 30 वर्षों तक कृषि क्षेत्र में बड़ी संभावनाएं हैं और किसानों को अब तकनीक के साथ आगे बढ़ना होगा.

एक एकड़ में 440 पौधे, दो साल में पूरी क्षमता का दावा

अनिल के अनुसार, एक एकड़ जमीन में करीब 440 अंजीर के पौधे लगाए जा सकते हैं. पौधों में लगभग छह महीने बाद उत्पादन शुरू होने की संभावना रहती है, जबकि करीब दो वर्षों में वे पूरी क्षमता में आ सकते हैं. एक पौधे से लगभग 30 किलो तक उत्पादन की संभावना भी उन्होंने बताई है. हालांकि, वास्तविक उत्पादन किस्म, मौसम, मिट्टी और खेती की देखभाल पर निर्भर करेगा.

कई राज्यों तक पहुंची पौधों की सप्लाई

अंजीर के अलावा उनके फार्म में ड्रैगन फ्रूट, सेब, लोगान, चीकू और स्ट्रॉबेरी समेत कई फलों के पौधे तैयार किए जा रहे हैं. अनिल के मुताबिक, राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक तक किसानों को पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं. कंपनी किसानों को पौधे देने के साथ उनकी उपज की खरीद और मार्केटिंग की व्यवस्था विकसित करने पर भी काम कर रही है.

नई किस्मों का पहले फार्म पर ट्रायल

अनिल का कहना है कि किसानों को पौधे उपलब्ध कराने से पहले नई किस्मों का ट्रायल अपने फार्म पर किया जाता है. जब किसी किस्म का परिणाम अच्छा आता है, तभी उसे बड़े स्तर पर किसानों तक पहुंचाया जाता है. सीडलेस नींबू, सुपर भगवा अनार और एवोकाडो जैसी फसलों पर भी काम किया जा रहा है. इस तरह मुजफ्फरपुर में परंपरागत खेती के साथ आधुनिक तकनीक और कीमती फलों पर आधारित नया कृषि मॉडल उभर रहा है.

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