धान-गेहूं छोड़ इस किसान ने उगाई ईरानी अकरकरा, 8 महीने की औषधीय फसल से कई गुना कमाई; अब बन गए मिसाल

धान-गेहूं छोड़ इस किसान ने उगाई ईरानी अकरकरा, 8 महीने की औषधीय फसल से कई गुना कमाई; अब बन गए मिसाल

जबलपुर के किसान कृष्ण कुमार सिंह लोधी ने पारंपरिक खेती छोड़ ईरानी अकरकरा जैसी औषधीय फसल अपनाकर नई मिसाल पेश की है.कम पानी, कम लागत और 6-8 महीने में तैयार होने वाली इस फसल से उन्हें बेहतर मुनाफे की उम्मीद है और अब दूसरे किसान भी इससे प्रेरित हो रहे हैं.

धर्मेंद्र सिंह
  • Jabalpur ,
  • Aug 04, 2026,
  • Updated Aug 04, 2026, 9:39 AM IST

मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के पाटन विकासखंड के ग्राम महगवा के प्रगतिशील किसान कृष्ण कुमार सिंह लोधी ने यह साबित कर दिया है कि खेती में नई सोच और सही फसल का चयन किसानों की आय में बड़ा बदलाव ला सकता है. पिछले दो वर्षों से वे पारंपरिक फसलों की जगह ईरानी अकरकरा जैसी औषधीय फसल की खेती कर रहे हैं. कम पानी, कम लागत और बाजार में लगातार बनी रहने वाली मांग के कारण यह फसल उनके लिए लाभ का सौदा साबित हो रही है.आज उनकी सफलता दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा बन चुकी है.

दो साल पहले लिया बड़ा फैसला

कृष्ण कुमार सिंह लोधी ने परंपरागत खेती से हटकर कुछ नया करने का निर्णय लिया. उन्होंने ईरानी अकरकरा की खेती शुरू की, जो एक महत्वपूर्ण औषधीय फसल मानी जाती है.शुरुआत में उन्होंने फसल की पूरी जानकारी जुटाई और वैज्ञानिक तरीके से इसकी खेती शुरू की। आज उनका यह प्रयोग सफल मॉडल के रूप में सामने आया है.

औषधीय फसल की बाजार में हमेशा रहती है मांग

कृष्ण कुमार बताते हैं कि ईरानी अकरकरा का उपयोग आयुर्वेदिक दवाइयों, जड़ी-बूटियों, दंत मंजन, शक्तिवर्धक औषधियों और कई हर्बल उत्पादों के निर्माण में किया जाता है. यही वजह है कि इसकी बाजार में सालभर मांग बनी रहती है और किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना रहती है.

कम पानी, कम बीमारी और ज्यादा मुनाफा

ईरानी अकरकरा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें पारंपरिक फसलों की तुलना में पानी की आवश्यकता काफी कम होती है. साथ ही इस फसल पर कीट और रोगों का प्रकोप भी बेहद कम होता है, जिससे दवाइयों पर खर्च घट जाता है. केवल 6 से 8 महीने में तैयार होने वाली यह फसल किसानों को पारंपरिक खेती की तुलना में कई गुना अधिक लाभ देने की क्षमता रखती है.

कृषि अधिकारियों ने किया खेत का निरीक्षण

कृष्ण कुमार सिंह लोधी की इस अभिनव खेती का निरीक्षण करने के लिए अनुविभागीय कृषि अधिकारी डॉ. इंदिरा त्रिपाठी के नेतृत्व में वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी सीमा राउत, कृषि विस्तार अधिकारी इशिता श्रीवास्तव और देवआनंद सिंह उनके खेत पहुंचे. अधिकारियों ने फसल की प्रगति का अवलोकन किया और किसान के प्रयासों की सराहना की.

किसानों को नई राह दिखा रही यह खेती

अनुविभागीय कृषि अधिकारी डॉ. इंदिरा त्रिपाठी ने कहा कि आज के समय में खेती को लाभकारी बनाने के लिए किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ-साथ औषधीय और नकदी फसलों की ओर भी कदम बढ़ाना चाहिए. ईरानी अकरकरा जैसी फसलें किसानों की आय बढ़ाने का बेहतर विकल्प बन सकती हैं. उन्होंने कहा कि किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग ऐसे नवाचारी किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन और हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है.

दूसरे किसानों के लिए बने प्रेरणा

कृष्ण कुमार सिंह लोधी की सफलता यह संदेश देती है कि यदि किसान बाजार की मांग, वैज्ञानिक तकनीक और नई फसलों को अपनाने का साहस करें तो कम संसाधनों में भी बेहतर आमदनी हासिल की जा सकती है. उनकी यह पहल अब क्षेत्र के अन्य किसानों को भी औषधीय खेती की ओर आकर्षित कर रही है.

 

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