
मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के पाटन विकासखंड के ग्राम महगवा के प्रगतिशील किसान कृष्ण कुमार सिंह लोधी ने यह साबित कर दिया है कि खेती में नई सोच और सही फसल का चयन किसानों की आय में बड़ा बदलाव ला सकता है. पिछले दो वर्षों से वे पारंपरिक फसलों की जगह ईरानी अकरकरा जैसी औषधीय फसल की खेती कर रहे हैं. कम पानी, कम लागत और बाजार में लगातार बनी रहने वाली मांग के कारण यह फसल उनके लिए लाभ का सौदा साबित हो रही है.आज उनकी सफलता दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा बन चुकी है.
कृष्ण कुमार सिंह लोधी ने परंपरागत खेती से हटकर कुछ नया करने का निर्णय लिया. उन्होंने ईरानी अकरकरा की खेती शुरू की, जो एक महत्वपूर्ण औषधीय फसल मानी जाती है.शुरुआत में उन्होंने फसल की पूरी जानकारी जुटाई और वैज्ञानिक तरीके से इसकी खेती शुरू की। आज उनका यह प्रयोग सफल मॉडल के रूप में सामने आया है.
कृष्ण कुमार बताते हैं कि ईरानी अकरकरा का उपयोग आयुर्वेदिक दवाइयों, जड़ी-बूटियों, दंत मंजन, शक्तिवर्धक औषधियों और कई हर्बल उत्पादों के निर्माण में किया जाता है. यही वजह है कि इसकी बाजार में सालभर मांग बनी रहती है और किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना रहती है.
ईरानी अकरकरा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें पारंपरिक फसलों की तुलना में पानी की आवश्यकता काफी कम होती है. साथ ही इस फसल पर कीट और रोगों का प्रकोप भी बेहद कम होता है, जिससे दवाइयों पर खर्च घट जाता है. केवल 6 से 8 महीने में तैयार होने वाली यह फसल किसानों को पारंपरिक खेती की तुलना में कई गुना अधिक लाभ देने की क्षमता रखती है.
कृष्ण कुमार सिंह लोधी की इस अभिनव खेती का निरीक्षण करने के लिए अनुविभागीय कृषि अधिकारी डॉ. इंदिरा त्रिपाठी के नेतृत्व में वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी सीमा राउत, कृषि विस्तार अधिकारी इशिता श्रीवास्तव और देवआनंद सिंह उनके खेत पहुंचे. अधिकारियों ने फसल की प्रगति का अवलोकन किया और किसान के प्रयासों की सराहना की.
अनुविभागीय कृषि अधिकारी डॉ. इंदिरा त्रिपाठी ने कहा कि आज के समय में खेती को लाभकारी बनाने के लिए किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ-साथ औषधीय और नकदी फसलों की ओर भी कदम बढ़ाना चाहिए. ईरानी अकरकरा जैसी फसलें किसानों की आय बढ़ाने का बेहतर विकल्प बन सकती हैं. उन्होंने कहा कि किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग ऐसे नवाचारी किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन और हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है.
कृष्ण कुमार सिंह लोधी की सफलता यह संदेश देती है कि यदि किसान बाजार की मांग, वैज्ञानिक तकनीक और नई फसलों को अपनाने का साहस करें तो कम संसाधनों में भी बेहतर आमदनी हासिल की जा सकती है. उनकी यह पहल अब क्षेत्र के अन्य किसानों को भी औषधीय खेती की ओर आकर्षित कर रही है.