
हरियाणा के सिरसा में 5 अगस्त को किसानों और मजदूरों का बड़ा प्रदर्शन होने जा रहा है. भारतीय किसान एकता (BKE) ने इस आंदोलन का ऐलान किया है. संगठन का कहना है कि किसानों और खेत मजदूरों से जुड़े कई अहम मुद्दे लंबे समय से सरकार के सामने रखे जा रहे हैं, लेकिन अब तक उनका समाधान नहीं हुआ है. इसी वजह से बड़ी संख्या में किसान और मजदूर सिरसा पहुंचकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे. संगठन ने गांव-गांव जाकर लोगों से इस आंदोलन में शामिल होने की अपील भी की है.
भारतीय किसान एकता के हरियाणा अध्यक्ष लखविंदर सिंह औलख ने बताया कि आंदोलन को सफल बनाने के लिए शाहपुरिया, तरकांवाली, गुसैनियाना, खेड़ी, साहूवाला, बिरूवाला गुड़ा, थिराज, झोरड़ रोही, फग्गू, खरिया, जलालाना बाछेर, नाथोर और रोहिरांवाली समेत कई गांवों में बैठकें की गई हैं. इन बैठकों में किसानों और मजदूरों से बड़ी संख्या में सिरसा पहुंचने की अपील की गई. सभी लोग 5 अगस्त को सुबह 10:30 बजे सिरसा की जाट धर्मशाला में इकट्ठा होंगे. इसके बाद वहां से रैली निकालकर उपायुक्त (डीसी) कार्यालय तक मार्च किया जाएगा.
किसान संगठन प्रदर्शन के बाद दो अलग-अलग ज्ञापन सौंपेगा. पहला ज्ञापन देश से जुड़े मुद्दों पर भारत के राष्ट्रपति के नाम जिला प्रशासन के माध्यम से भेजा जाएगा. वहीं दूसरा ज्ञापन हरियाणा के मुख्यमंत्री के नाम होगा, जिसमें राज्य और जिले से जुड़ी समस्याओं को उठाया जाएगा. संगठन का कहना है कि यदि किसानों की मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया गया तो आगे भी आंदोलन जारी रहेगा.
किसानों की सबसे बड़ी मांग न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी गारंटी देना है. संगठन चाहता है कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार किसानों को उनकी फसल की लागत (सी2) पर 50 प्रतिशत लाभ जोड़कर एमएसपी दिया जाए. इसके अलावा सभी किसानों का कृषि ऋण पूरी तरह माफ करने, अमेरिका और अन्य देशों के साथ हुए शुल्क-मुक्त मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) को रद्द करने, बिजली संशोधन विधेयक और बीज विधेयक को वापस लेने की भी मांग की गई है.
संगठन ने कहा कि ज्ञापन में दिल्ली में छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई और पंजाब में सफाई कर्मचारियों पर हुए लाठीचार्ज का भी विरोध दर्ज कराया जाएगा. उनका कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वालों पर बल प्रयोग नहीं होना चाहिए.
राज्य स्तर पर किसानों ने नहरों में पर्याप्त पानी देने, बिना कटौती बिजली उपलब्ध कराने और समय पर खाद की व्यवस्था करने की मांग की है. इसके साथ ही तकनीकी ग्रेड के बैग में कृषि उपयोग वाली यूरिया बेचने के मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग भी की गई है. किसानों का कहना है कि इस तरह की गड़बड़ियों से उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है.
किसान संगठन ने वर्ष 2020 की खरीफ फसल के लंबित मुआवजे को जल्द जारी करने की मांग की है. यह मुआवजा खासतौर पर कालांवाली, डबवाली और गोरीवाला क्षेत्र के किसानों को दिया जाना है. इसके अलावा वर्ष 2023, 2024 और 2025 की खरीफ फसल के लंबित फसल बीमा दावों का भुगतान जल्द करने की भी मांग की गई है. शाहपुरिया गांव के किसानों के लंबित बीमा दावों को भी जल्द निपटाने की मांग उठाई जाएगी.
संगठन ने वैदवाला गांव में बिजली ट्रांसमिशन टावरों से प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की है. साथ ही घग्घर नदी से रंगोई चैनल के लंबे समय से लंबित निर्माण कार्य को जल्द पूरा करने की भी मांग की गई है. किसानों का कहना है कि फसल बीमा की प्रीमियम राशि कटने के तुरंत बाद उन्हें उनकी बीमा पॉलिसी की प्रति उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े.
भारतीय किसान एकता का कहना है कि यह आंदोलन किसानों और मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई है. संगठन का दावा है कि जब तक किसानों की प्रमुख मांगों पर सरकार ठोस फैसला नहीं लेती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा. 5 अगस्त का सिरसा मार्च इसी आंदोलन की एक अहम कड़ी माना जा रहा है.
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