मधुमक्खी पालकों को इस 'हाईटेक मशीन' से मिलेगी बड़ी राहत, CM योगी ने भी गोरखपुर के राजू सिंह को सराहा

मधुमक्खी पालकों को इस 'हाईटेक मशीन' से मिलेगी बड़ी राहत, CM योगी ने भी गोरखपुर के राजू सिंह को सराहा

Gorakhpur News: स्नातक स्तर की शिक्षा प्राप्त करने वाले राजू सिंह बताते हैं कि मशीन से शहद सीधे छत्ते से निकलने और हाथ न लगने के कारण 100 प्रतिशत शुद्ध रहता है. जहां पुराने तरीकों में शहद निकालने में घंटों का समय और कई मजदूरों की जरूरत पड़ती थी, लेकिन, इस नई तकनीक से एक किसान मात्र 5 से 10 मिनट में अकेले शहद निकाल सकता है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी राजू सिंह और उनके पुत्र को सराहा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी राजू सिंह और उनके पुत्र को सराहा
नवीन लाल सूरी
  • LUCKNOW,
  • Jan 21, 2026,
  • Updated Jan 21, 2026, 7:14 AM IST

मधुमक्खी पालन (Beekeeping) करने वाले किसानों के लिए यह खबर बड़े काम की है. दरअसल, उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के हरपुर गांव के रहने वाले राजू सिंह ने एक 'फ्लो बी हाइव' नामक हाईटेक मशीन को तैयार किया है. जिससे बिना बाक्स को खोले और बिना मधुमक्खियों को नुकसान पहुंचाए शुद्ध शहद निकाला जा सकता है. इस अधुनिक मशीन को तैयार करने में उनके इंजीनियर पुत्र आदर्श सिंह ने काफी मदद की. बीते दिनों से इस अनोखे आविष्कार को देखकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी राजू सिंह और उनके पुत्र को सराहा था. उनका बेहतरीन प्रयास और उनकी सफलता दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा स्रोत हो सकता है.

'फ्लो बी हाइव' तकनीक की खासियत

इंडिया टुडे के किसान तक से बातचीत में गोरखपुर के पीपीगंज निवासी राजू सिंह ने बताया कि 'फ्लो बी हाइव' तकनीक पर बनी यह मशीन एक विशेष चाबी घुमाते ही फ्रेम के भीतर बनी कोशिकाएं खुल जाती हैं और शहद सीधे पाइप के माध्यम से जार या बोतल में निकल आता है. यह प्रक्रिया बिल्कुल नल खोलने जैसी है. इस तकनीक की खासियत यह है कि इसमें मधुमक्खियां सुरक्षित रहती हैं. उन्हें किसी प्रकार की परेशानी और नुकसान नहीं होता.

मात्र 5 से 10 मिनट में निकलेगा शहद 

स्नातक स्तर की शिक्षा प्राप्त करने वाले राजू सिंह बताते हैं कि मशीन से शहद सीधे छत्ते से निकलने और हाथ न लगने के कारण 100 प्रतिशत शुद्ध रहता है. जहां पुराने तरीकों में शहद निकालने में घंटों का समय और कई मजदूरों की जरूरत पड़ती थी,
लेकिन, इस नई तकनीक से एक किसान मात्र 5 से 10 मिनट में अकेले शहद निकाल सकता है. ऐसे काम करता है बाक्स ‘फ्लो बी हाइव' बॉक्स के अंदर खास तरह के प्लास्टिक/फूड-ग्रेड फ्रेमों में पहले से बनी आंशिक षट्कोणीय कोशिकाएं होती हैं, जिन पर मधुमक्खियां प्राकृतिक मोम चढ़ा शहद भरती हैं.

एक स्पेशल चाबी के जरिए काम करती मशीन

राजू सिंह ने बताया कि जब मशीन के अंदर शहद पक जाता है, तो मधुमक्खियां उन कोशिकाओं को मोम से सील कर देती हैं. यह संकेत होता है कि शहद निकालने के लिए तैयार है. बॉक्स के बाहर बने स्लॉट में एक स्पेशल चाबी डालकर घुमाई जाती है, फ्रेम के अंदर की कोशिकाएं हल्के से खिसक जाती हैं. उनके बीच बने चैनल से शहद गुरुत्वाकर्षण के कारण नीचे की ओर बहता है. वहीं पाइप के जरिए सीधे जार या बोतल में इकट्ठा हो जाता है.

मधुमक्खियों के परेशान करने का खतरा कम

इस दौरान बॉक्स खोलने की जरूरत नहीं पड़ती. शहद निकालने के समय मधुमक्खियां फ्रेम की सतह पर रहती हैं, इसलिए उन्हें परेशान करने का खतरा नहीं होता. जबकि धुआं देने की भी जरूरत नहीं पड़ती. सिंह ने आगे बताया कि शहद निकल जाने के बाद चाबी को वापस घुमाने पर कोशिकाएं फिर अपनी पहली वाली स्थिति में आ जाती हैं. वहीं मधुमक्खियां तुरंत दोबारा उन पर मोम चढ़ा शहद भरना शुरू कर देती हैं.

मधुमक्खी पालन से करोड़ों का टर्नओवर

बता दें कि1992 में राजू सिंह ने मधुमक्खी पालन महज दो बक्से से शुरू किया था. इसके बाद उन्होंने मधुमक्खी पालन को एक व्यवसाय रूप में विकसित किया. आज वे 1000 बक्सों के साथ मधुमक्खी पालन करके 350 क्विंटल शहद का उत्पादन करते हैं. वे करोड़ों के टर्नओवर का व्यवसाय करके हर साल लाखों रुपये की आमदनी कर रहे हैं. इसके साथ, उन्होंने मधुमक्खी बक्से, पराग, प्रोपोलीज और रॉयल जेली के व्यवसाय को भी विकसित किया है.

राजू सिंह ने बनाई देश में राष्ट्रीय पहचान

बेहतर गुणवत्ता का शहद उत्पादन और किसानों को प्रशिक्षण देने के लिए राजू सिंह को राज्य स्तर पर सम्मान भी मिल चुका है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल द्वारा उन्हें सम्मानित किया जा चुका है. वे अब सिर्फ़ एक किसान नहीं, बल्कि मधुमक्खी पालन के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के साथ एक देश में राष्ट्रीय पहचान बन चुके हैं. 

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