
उत्तर प्रदेश सरकार ने बुंदेलखंड क्षेत्र में मिल्क प्रोसेसिंग कैपिसिटी बढ़ाने के लिए अहम फैसला लिया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में डेयरी क्षेत्र से जुड़ी दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है. इन फैसलों के जरिए क्षेत्र में दूध के बेहतर प्रबंधन, किसानों की आय में वृद्धि और रोजगार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है. कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, बुंदेलखंड पैकेज के अंतर्गत जनपद बांदा में 20 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता वाला नया डेयरी प्लांट स्थापित किया जाएगा.
यह प्लांट स्थानीय स्तर पर मिल्क कलेक्शन और प्रोसेसिंग को मजबूत करेगा, जिससे आसपास के जिलों के दूध उत्पादकों को भी लाभ मिलने के अवसर बनेंगे. नई इकाई के शुरू होने से क्षेत्र में दूध की प्रोसेसिंग क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी और किसानों को अपने उत्पाद के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध हो सकेगा.
इसके साथ ही झांसी में पहले से संचालित डेयरी प्लांट का भी विस्तार किया जाएगा. वर्तमान में 10 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले इस प्लांट को बढ़ाकर 30 हजार लीटर प्रतिदिन तक करने का निर्णय लिया गया है. क्षमता बढ़ने से अधिक मात्रा में दूध का संग्रहण और प्रसंस्करण संभव होगा, जिससे क्षेत्र में डेयरी गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है.
इन दोनों परियोजनाओं के सिविल और मैकेनिकल कार्य टर्न-की आधार पर कराने के लिए इंडियन डेयरी मशीनरी कंपनी लिमिटेड को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है. कंपनी को निर्धारित नियमों के अनुसार सेंटेज चार्ज भी दिया जाएगा. इस कार्य से जुड़े खर्च का वहन राज्य सरकार अपने संसाधनों से करेगी.
बुंदेलखंड क्षेत्र में लंबे समय से मिल्क प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी महसूस की जा रही थी. नई परियोजनाओं से यह समस्या काफी हद तक कम होने की उम्मीद है. बता दें कि उत्तर प्रदेश पहले ही देश के प्रमुख दुग्ध उत्पादक राज्यों में पहले स्थान पर मौजूद है.
प्रदेश में दूध और दुग्ध उत्पादों की खपत लगातार बढ़ रही है. ऐसे में प्रसंस्करण क्षमता का विस्तार करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है. बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों में डेयरी ढांचे को मजबूत करने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिल सकती है.