Bundelkhand Model Farm: रिटायर्ड इंजीनियर का गजब दिमाग, 7 एकड़ बंजर जमीन पर किया ऐसा कमाल, हर कोई हैरान

Bundelkhand Model Farm: रिटायर्ड इंजीनियर का गजब दिमाग, 7 एकड़ बंजर जमीन पर किया ऐसा कमाल, हर कोई हैरान

बुंदेलखंड की सूखी धरती में प्राकृतिक खेती का एक ऐसा मॉडल तैयार करना किसी चुनौती से कम नहीं है. सिंचाई विभाग के रिटायर्ड इंजीनियर ने इसे मूर्त रूप दे डाला. आज उनके इस मॉडल की तारीफ पूरे जनपद में हो रही है.

धर्मेंद्र सिंह
  • Jhansi ,
  • Feb 26, 2026,
  • Updated Feb 26, 2026, 3:11 PM IST

बुंदेलखंड की सूखी धरती पर खेती करना किसानों के लिए हमेशा से ही चुनौती रहा है, क्योंकि यहां बारिश के दिनों को छोड़कर सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पाता है. सिंचाई विभाग से रिटायर होने के बाद बी.के. तिवारी ने अपनी दूरदर्शिता और मेहनत से खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदल दिया है. सेवानिवृत्त सिंचाई अभियंता तिवारी ने कृषि विविधीकरण और प्राकृतिक खेती को अपनाकर न सिर्फ अपनी आय बढ़ाई, बल्कि क्षेत्र के किसानों के लिए एक प्रेरणादायक तैयार किया है.

बंजर जमीन से उपजाऊ फार्म तक का सफर

वर्ष 2010 में झांसी के ग्वालियर रोड स्थित अंबाबाई क्षेत्र में 7 एकड़ जमीन खरीदने के बाद बी. के. तिवारी ने सबसे पहले जमीन को खेती योग्य बनाने का काम किया. पत्थरों को हटाकर और मिट्टी सुधार कर उन्होंने यहां बागवानी की मजबूत नींव रखी.

आज उनके फार्म में 3000 वर्गमीटर क्षेत्र में अत्याधुनिक पॉलीहाउस तैयार है, जहां शतावर, काली हल्दी, अदरक और टमाटर जैसी फसलें उगाई जा रही हैं. साथ ही ड्रैगन फ्रूट की नर्सरी भी विकसित की गई है.

पॉलीहाउस से लाखों की आमदनी

तिवारी बताते हैं कि केवल 3000 वर्गमीटर के पॉलीहाउस से ही उन्हें सालाना 4 से 5 लाख रुपये तक की आय हो रही है. नियंत्रित वातावरण में बहुफसली उत्पादन ने उनकी आमदनी को स्थिर और लाभकारी बना दिया है.

प्राकृतिक खेती और देसी गायों का सहारा

उनका पूरा फार्म प्राकृतिक खेती पर आधारित है. वे 18 देसी नस्ल की गायों का पालन करते हैं और गोबर व गोमूत्र से तैयार जैविक खाद और कीटनाशक का उपयोग करते हैं. इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ी है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता समाप्त हो गई है.

सोलर ड्रायर से बढ़ा मूल्य संवर्धन

सरकारी सहयोग से उन्होंने 22 लाख रुपये की लागत से सोलर ड्रायर स्थापित किया, जिस पर 40% सब्सिडी मिली. इस ड्रायर में एक साथ 3 क्विंटल से अधिक फल और सब्जियां सुखाई जा सकती हैं. इससे उत्पादों का मूल्य बढ़ता है और बर्बादी कम होती है.

जल संरक्षण की अनूठी पहल

झांसी क्षेत्र में पानी की कमी को देखते हुए उन्होंने अपने फार्म में दो तालाब खुदवाए हैं. इनमें वर्षा जल संग्रहित किया जाता है, जो सिंचाई के साथ-साथ भूजल स्तर को भी रिचार्ज करता है.

किसानों और छात्रों के लिए बना अध्ययन केंद्र

बीके तिवारी का यह मॉडल इतना सफल रहा है कि अब स्थानीय किसान, कृषि अधिकारी और छात्र दल यहां अध्ययन के लिए पहुंचते हैं. वे स्वस्थ अनाज, फल और सब्जियां पैदा कर रहे हैं, जिन्हें बाजार में बेहतर दाम मिल रहा है.

प्रेरणा बना झांसी का यह मॉडल

बी. के तिवारी का इंदिरा फार्म उत्तर प्रदेश में कृषि विविधीकरण और प्राकृतिक खेती का जीवंत उदाहरण बन चुका है. यह साबित करता है कि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग और वैज्ञानिक सोच के साथ की गई मेहनत से छोटे स्तर पर भी खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है.

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