
बजट सत्र में केंद्र सरकार नया बीज बिल लेकर आ सकती है. लेकिन इसे लेकर किसानों से लेकर आम लोगों तक के मन में कई सवाल और उलझन है. जहां भारतीय किसान अपने बीज अब तक बचाकर रखते आए हैं वहीं अब एक ऐसा नया बीज बिल लाया जा रहा है, जिसमें विदेश से आने वाले बीजों को खास छूट दी जाएगी. कई संगठन और विशेषज्ञ इसे भारत की खेती-किसानी के सामने एक नए संकट के तौर पर देख रहे हैं. इस बिल में ऐसे प्रावधान बताए गए हैं, जिससे विदेशी कंपनियां बिना ज्यादा जांच के अपने बीज भारत में बेच सकेंगी. उन्हें मोटा मुनाफा होगा. दूसरी ओर बीज बनाने में जुटे छोटे प्रोजेक्ट के लिए रास्ता कठिन कर दिया गया है.
किसानों को तीन चीजें सबसे ज्यादा चाहिए-
लेकिन इस नए बीज विधेयक में इन बातों का साफ तौर पर जिक्र नहीं है. इससे किसानों को डर है कि उन्हें अच्छे और सस्ते बीज मिलना मुश्किल हो सकता है.
इस कानून में कहा गया है कि विदेश से आने वाले बीजों को खास छूट मिलेगी. इन बीजों की भारत में गुणवत्ता जांच जरूरी नहीं होगी. कंपनियां खुद ही कह देंगी कि उनका बीज अच्छा है, और सरकार उस पर भरोसा कर लेगी. इसे सेल्फ सर्टिफिकेट खुद को देना कहा जाता है.
इसका मतलब है कि विदेशी कंपनियां आसानी से अपने बीज भारत में बेच सकेंगी, लेकिन देश के छोटे किसान और बीज बेचने वाले मुश्किल में पड़ जाएंगे.
1960 के समय में भारत में खाने का संकट था. तब गेहूं और धान के बीज विदेश से मंगाए गए. इन बीजों से पैदावार तो बढ़ी, लेकिन उन्हें ज्यादा खाद, दवा और पानी चाहिए था.
बाद में बीटी कपास आया. शुरू में अच्छा लगा, लेकिन फिर कीड़े लगने लगे. किसानों को और ज्यादा दवाइयां खरीदनी पड़ीं. इससे कई किसान कर्ज में फंस गए और दुख की बात है कि कई किसानों ने आत्महत्या तक कर ली.
अब विदेशी कंपनियां भारत में जीएम (जेनेटिकली मॉडिफाइड) बीज लाना चाहती हैं. ये बीज बहुत महंगे होते हैं और हर साल नए बीज खरीदने पड़ते हैं. इससे किसानों का खर्च और बढ़ेगा. साथ ही, इससे पर्यावरण, पौधों और कीड़ों पर भी बुरा असर पड़ेगा.
अगर विदेशी बीजों को ज्यादा बढ़ावा मिला, तो भारत की पारंपरिक किस्में खत्म हो सकती हैं.
जैसे-
ये सब हमारी पहचान हैं, लेकिन विदेशी बीजों के आने से ये धीरे-धीरे गायब हो सकती हैं.
अगर बीज बाजार पर बड़ी कंपनियों का कब्जा हो गया, तो वे वही बीज बेचेंगी जिनसे उन्हें फायदा होगा. इससे आत्मनिर्भर खेती और देश की खाद्य सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी. पहले भी ठेका खेती और मंडी कानून लाए गए थे, लेकिन किसानों के आंदोलन से उन्हें वापस लेना पड़ा.
नया बीज विधेयक विदेशी कंपनियों को फायदा पहुंचा सकता है, लेकिन किसानों के लिए खतरा बन सकता है. अगर समय रहते आवाज नहीं उठाई गई, तो किसानों की परेशानी बढ़ेगी और खेती पर बुरा असर पड़ेगा. हमें अपनी देसी खेती, देसी बीज और किसानों को बचाना बहुत जरूरी है.
ये भी पढ़ें:
सेहत वाली मक्का, IIMR 10 नई बायोफोर्टिफाइड मक्का किस्मों से से बढ़ेगा मुनाफा और पोषण
Stray Animals: अब तक जनता की परेशानी थे छुट्टा पशु, लेकिन अब अफसरों के लिए बने सिरदर्द