
भारत में खेती के लिए यूरिया बहुत जरूरी खाद है. किसानों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार की ओर से नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (NFL) ने विदेश से यूरिया मंगाने के लिए एक टेंडर निकाला. इस टेंडर में सबसे सस्ती बोली करीब 425 डॉलर प्रति टन पर आई है. इसका मतलब यह है कि सरकार को यूरिया कम दाम में मिलेगी और किसानों तक समय पर खाद पहुंचाने में मदद मिलेगी. यह खबर इसलिए भी खास है क्योंकि पिछले कुछ समय से देश के कई हिस्सों में यूरिया की कमी और कालाबाजारी की शिकायतें सामने आ रही थीं.
NFL ने सरकार की ओर से कुल 15 लाख टन यूरिया आयात करने की योजना बनाई है. इसके लिए 17 दिसंबर को वैश्विक स्तर पर बोली मंगाई गई थी और 2 जनवरी तक कंपनियों ने अपनी बोली जमा की. 5 जनवरी को इन बोलियों को खोला गया. इस पूरी प्रक्रिया का मकसद यह था कि देश को सबसे सस्ते और सही दाम पर यूरिया मिल सके, ताकि किसानों की जरूरत पूरी हो सके.
इस टेंडर में Koch Fertilizer LLC नाम की विदेशी कंपनी ने सबसे कम दाम की बोली लगाई. कंपनी ने गुजरात के पश्चिमी तट के बंदरगाहों के लिए यूरिया का दाम 424.80 डॉलर प्रति टन बताया, जबकि आंध्र प्रदेश के पूर्वी तट के बंदरगाहों के लिए 426.80 डॉलर प्रति टन का भाव रखा. इससे साफ है कि पश्चिमी तट पर यूरिया थोड़ी सस्ती दर पर उपलब्ध होगी.
इस टेंडर में कई और कंपनियों ने भी हिस्सा लिया. कुछ कंपनियों ने बहुत ज्यादा दाम की बोली भी लगाई. उदाहरण के लिए, सुवर्णभूमि एंटरप्राइजेज नाम की कंपनी ने 510 से 523 डॉलर प्रति टन तक का भाव बताया, जो सबसे ज्यादा था. इसके अलावा भारत और विदेश की कई जानी-मानी कंपनियां इस बोली प्रक्रिया में शामिल रहीं, जिससे यह पता चलता है कि भारत दुनिया के बड़े यूरिया आयातकों में से एक है.
इससे पहले सरकार की ओर से इंडियन पोटाश लिमिटेड ने यूरिया आयात का टेंडर निकाला था. उस समय आयातित यूरिया का भाव करीब 418.40 डॉलर प्रति टन था. हालांकि तब सरकार ने 20 लाख टन के बजाय 15 लाख टन यूरिया ही खरीदने का फैसला किया था. इस बार दाम थोड़ा बढ़ा जरूर है, लेकिन जरूरत को देखते हुए सरकार फिर से 15 लाख टन यूरिया मंगा रही है.
विदेश से मंगाई गई यूरिया बहुत महंगी होती है, लेकिन किसानों को यह बहुत सस्ते दाम पर मिलती है. सरकार किसानों को 45 किलो की एक बोरी सिर्फ 267 रुपये में उपलब्ध कराती है, जबकि आयातित यूरिया का असली दाम करीब 38 हजार रुपये प्रति टन होता है. इस बड़े अंतर को सरकार सब्सिडी के जरिए भरती है, ताकि किसानों पर बोझ न पड़े और खेती करना आसान बना रहे.
फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अनुसार, इस वित्त वर्ष में यूरिया का आयात करीब 120 प्रतिशत बढ़कर 7.17 मिलियन टन तक पहुंच गया है. इसकी मुख्य वजह यूरिया की मांग में बढ़ोतरी और देश में उत्पादन में थोड़ी कमी है. इसी दौरान यूरिया की बिक्री बढ़ी है, लेकिन घरेलू उत्पादन कुछ कम हुआ है, इसलिए आयात पर ज्यादा निर्भरता बढ़ी है.
फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महानिदेशक सुरेश कुमार चौधरी के अनुसार, सरकार एक संतुलित रास्ता अपना रही है. जरूरत पड़ने पर जरूरी खाद विदेश से मंगाई जा रही है और साथ ही देश में बनी खाद के उत्पादन को भी मजबूत किया जा रहा है. आने वाले समय में सही योजना और समझदारी से खाद की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी, ताकि किसानों को समय पर खाद मिले और खेती मजबूत बनी रहे.
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