अब बीज होंगे ‘स्मार्ट’, इतने फीसदी बढ़ेगी फसलों की पैदावार! ICAR ने तैयार की नई सीड कोटिंग तकनीक

अब बीज होंगे ‘स्मार्ट’, इतने फीसदी बढ़ेगी फसलों की पैदावार! ICAR ने तैयार की नई सीड कोटिंग तकनीक

हैदराबाद स्थित भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान (IIOR) ने एक नई सीड कोटिंग तकनीक विकसित की है.  इस तकनीक से बीजों की क्वालिटी, अंकुरण क्षमता और पौधों की शुरुआती बढ़त को बेहतर किया जा सकता है.

सीड कोटिंग तकनीकसीड कोटिंग तकनीक
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jun 19, 2026,
  • Updated Jun 19, 2026, 11:00 AM IST

खेती में बेहतर उत्पादन के लिए अब सिर्फ अच्छी मिट्टी और खाद ही नहीं, बल्कि बेहतर बीज तकनीक भी अहम भूमिका निभा रही है. इसी दिशा में हैदराबाद स्थित भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान (IIOR) ने एक नई जैव-पॉलिमर आधारित स्मार्ट सीड कोटिंग तकनीक विकसित की है. इस तकनीक से बीजों की क्वालिटी, अंकुरण क्षमता और पौधों की शुरुआती बढ़त को बेहतर किया जा सकता है. वैज्ञानिकों का दावा है कि इस तकनीक के इस्तेमाल से कई फसलों की पैदावार में मौजूदा स्तर के मुकाबले 37 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होने की संभावना है.

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अनुसार, स्मार्ट सीड कोटिंग तकनीक में बीजों पर एक खास जैव-अपघटनीय (Biodegradable) परत चढ़ाई जाती है. यह परत बीज और मिट्टी के बीच संपर्क के समय सूक्ष्मजीवों, पोषक तत्वों और फसल सुरक्षा से जुड़े तत्वों को सीधे बीज तक पहुंचाने का काम करती है. इससे बीज जल्दी और बेहतर तरीके से अंकुरित होते हैं और पौधों की शुरुआती वृद्धि मजबूत होती है.

सात फसलों पर किया गया परीक्षण

ICAR ने बताया कि इस तकनीक का परीक्षण सोयाबीन, मक्का, मूंगफली, चना, कपास, सरसों और अरहर जैसी सात प्रमुख फसलों पर किया गया है. फील्ड परीक्षण में बिना उपचारित बीजों की तुलना में इन फसलों की उत्पादकता में 12 प्रतिशत से 37 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई. तेलंगाना में किए गए प्रदर्शन परीक्षणों में मूंगफली और सोयाबीन की पैदावार में लगभग 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखने को मिली. वैज्ञानिकों के अनुसार, यह तकनीक खासतौर पर उन क्षेत्रों के किसानों के लिए फायदेमंद हो सकती है, जहां बारिश की कमी रहती है या सूखे जैसी परिस्थितियां रहती हैं.

बीजों को मिलेगा पोषण और सुरक्षा कवच

कई बार अच्छी खेती के बावजूद शुरुआती अवस्था में पौधों का विकास कमजोर रह जाता है, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है. स्मार्ट सीड कोटिंग इसी समस्या को दूर करने के लिए तैयार की गई है. बीज पर मौजूद यह प्राकृतिक परत पौधे को शुरुआती दौर में जरूरी पोषण और सुरक्षा उपलब्ध कराती है. ICAR का कहना है कि इस तकनीक को अनाज, बाजरा, दालें, सब्जियां और बागवानी फसलों के लिए भी इस्तेमाल के अनुसार तैयार किया जा सकता है. खासतौर पर बारिश आधारित खेती वाले क्षेत्रों में यह तकनीक किसानों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकती है.

भारत में कराया गया इसका पेटेंट

ICAR ने इस स्मार्ट सीड कोटिंग तकनीक का भारत में पेटेंट भी करा लिया है. अब इसे ज्यादा से ज्यादा किसानों तक पहुंचाने के लिए राज्य बीज निगमों, किसान उत्पादक संगठनों (FPO) और निजी बीज कंपनियों के साथ साझेदारी की योजना बनाई जा रही है. वैज्ञानिकों के अनुसार, अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर किसानों तक पहुंचती है तो कम लागत में बेहतर उत्पादन हासिल करने में मदद मिल सकती है. बदलते मौसम, अनियमित मॉनसून और बढ़ती कृषि चुनौतियों के बीच स्मार्ट बीज तकनीक किसानों के लिए एक नई उम्मीद बन सकती है. 

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