डीएसआर तकनीक से धान की खेती फायदे का सौदाहरियाणा में जल संरक्षण को लेकर अब किसानों के बीच जागरुकता तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही है. प्रदेश सरकार की ओर से धान की सीधी बिजाई यानी डायरेक्ट सीडिंग ऑफ राइस (DSR) को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है और इसका असर भी खेतों में साफ नजर आने लगा है. पूरे राज्य में इस तकनीक के जरिए 5 लाख एकड़ क्षेत्र में धान की बुवाई का लक्ष्य रखा गया है, जबकि करनाल जिले में 30 हजार एकड़ का टारगेट तय किया गया है. अब तक करनाल में करीब 15 हजार किसानों ने धान की सीधी बिजाई के लिए अपना रजिस्ट्रेशन करवा लिया है, जो इस योजना के प्रति बढ़ते भरोसे को दिखाता है.
करनाल के कृषि विभाग के उप निदेशक डॉ. वजीर सिंह के मुताबिक, हरियाणा में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है और कई इलाकों में हर साल पानी दो से तीन फीट तक नीचे जा रहा है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है. इसी खतरे को देखते हुए राज्य सरकार ने ‘डीएसआर’ और ‘मेरा पानी, मेरी विरासत’ जैसी योजनाएं शुरू की हैं, जिनका मकसद पानी की बचत और खेती को टिकाऊ बनाना है.
डॉ. वजीर सिंह ने बताया कि पारंपरिक तरीके में धान की रोपाई के दौरान खेतों में काफी अधिक पानी की जरूरत होती है, जबकि डीएसआर तकनीक में मशीन के जरिए सीधे खेत में बीज बोया जाता है. इससे न केवल पानी की खपत में 25 से 30 फीसदी तक कमी आती है, बल्कि पूरी प्रक्रिया तेजी से पूरी होती है. इस तकनीक में मजदूरों पर निर्भरता भी खत्म हो जाती है, जो वर्तमान समय में एक बड़ी समस्या बन चुकी है.
उन्होंने कहा कि आजकल किसानों को रोपाई के समय मजदूरों की भारी कमी का सामना करना पड़ता है, जिससे लागत बढ़ जाती है और समय पर काम भी नहीं हो पाता. डीएसआर तकनीक इस समस्या का प्रभावी समाधान बनकर सामने आई है. कम समय, कम लागत और कम पानी में धान की बुवाई संभव होने के कारण किसान तेजी से इस ओर आकर्षित हो रहे हैं.
सरकार की ओर से किसानों को इस तकनीक के लिए आर्थिक प्रोत्साहन भी दिया जा रहा है. जिन किसानों ने धान की सीधी बिजाई की है, उनके खेतों का वेरिफिकेशन करने के बाद प्रति एकड़ 4500 रुपये की सहायता राशि दी जाएगी. इससे किसानों को नई तकनीक अपनाने के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन मिल रहा है.
कृषि विभाग लगातार गांव-गांव जाकर कैंप आयोजित कर रहा है और किसानों को डीएसआर तकनीक के फायदे समझा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि अगर बड़े पैमाने पर किसान इस तकनीक को अपनाते हैं तो राज्य में जल संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. बदलते मौसम और घटते पानी के बीच हरियाणा के किसानों का यह रुख इस बात का संकेत है कि अब खेती केवल उत्पादन का मामला नहीं रह गया, बल्कि संसाधनों के संरक्षण के साथ टिकाऊ भविष्य की दिशा में भी कदम बढ़ाए जा रहे हैं.
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