Fertilizer Subsidy: रबी फसलों के लिए नई उर्वरक सब्सिडी घोषित, इस बार मिलेगी इतनी ज्यादा राहत

Fertilizer Subsidy: रबी फसलों के लिए नई उर्वरक सब्सिडी घोषित, इस बार मिलेगी इतनी ज्यादा राहत

रबी फसलों की अच्छी पैदावार के लिए सरकार ने पोषक-तत्व आधारित सब्सिडी (NBS) की नई दरों को मंजूरी दे दी है.यह नीति 1 अक्टूबर 2025 से 31 मार्च 2026 तक लागू रहेगी.इस बार सरकार डीएपी खाद पर पिछले साल की तुलना में 36 फीसदी ज्यादा सब्सिडी दे रही है. इसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों के बावजूद किसानों को महंगाई से बचाना है.

क‍िसान तक
  • नई दिल्ली,
  • Jan 06, 2026,
  • Updated Jan 06, 2026, 9:41 AM IST

रबी की फसलों की बेहतर पैदावार सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने पोषक-तत्व आधारित सब्सिडी NBS की नई दरों को मंजूरी दी है. यह नीति 1 अक्टूबर 2025 से 31 मार्च 2026 तक लागू रहेगी. सरकार का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव से किसानों को बचाना है. इस नीति के जरिए यह सुनिश्चित किया जाता है कि किसानों को सभी प्रमुख उर्वरक, जैसे डीएपी और एनपीके किफायती और उचित दामों पर मिल सकें.कृषि क्षेत्र को मजबूती देने के लिए सरकार ने इस बार वित्तीय सहायता में बड़ी वृद्धि की है. रबी 2025–26 के लिए अनुमानित बजटीय जरूरत लगभग ₹37,952.29 करोड़ निर्धारित की गई है.अगर  हम इसकी तुलना पिछले खरीफ सीजन से करें, तो इसमें 736 करोड़ की बढ़ोतरी की गई है. पिछले तीन वर्षों 2022-23 से 2024-25  के दौरान सरकार ने कुल मिलाकर ₹2.04 लाख करोड़ से अधिक का आवंटन किया है.

 डीएपी की सब्सिडी में ईजाफा

NBS योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें सब्सिडी केवल खाद की बोरी पर नहीं, बल्कि उसमें मौजूद पोषक तत्वों के वास्तविक वजन के आधार पर दी जाती है. नाइट्रोजन फॉस्फेट + पोटाश  और सल्फरजैसे तत्वों के लिए प्रति किलोग्राम की दरें तय की गई हैं. उदाहरण के तौर पर, इस बार नाइट्रोजन के लिए ₹43.02 और फॉस्फेट के लिए ₹47.96 प्रति किलोग्राम की सब्सिडी दी जा रही है. यही कारण है कि डीएपी जैसे उर्वरकों पर सब्सिडी इस बार बढ़कर ₹29,805 प्रति मीट्रिक टन हो गई है, जो पिछले साल की तुलना में काफी अधिक है.जो रबी 2024–25 में रही ₹21,911 प्रति मीट्रिक टन के मुकाबले काफी अधिक है.

रबी सीजन की नई उर्वरक सब्सिडी घोषित

देश की जलवायु विविधता क ध्यान रखकर भारत सरकार ने देश की अलग-अलग क्षेत्रों की मिट्टी और विभिन्न फसलों की विशिष्ट जरूरतों को समझते हुए कुल 28 प्रकार के उर्वरक ग्रेड पर सब्सिडी देने का निर्णय लिया है. प्रमुख उर्वरकों पर मिलने वाली सब्सिडी प्रति टन इस प्रकार हैसबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले डीएपी (18-46-0-0) खाद पर सरकार प्रति टन ₹29,805 की भारी सब्सिडी दे रही है, जिससे इसकी कीमतें किसानों के बजट में बनी रहती हैं. पोटाश के लिए एमओपी (0-0-60-0) का उपयोग करते हैं, उन्हें सरकार की ओर से प्रति टन ₹1,428 की आर्थिक मदद दी जा रही है.मिट्टी को संतुलित पोषण देने वाले एनपीके (19-19-19) उर्वरक के लिए सब्सिडी की राशि ₹17,738 प्रति टन तय की गई हैइसी एनपीके (12-32-16) पर भी सरकार ₹20,890 प्रति टन की सहायता प्रदान कर रही है.सिंगल सुपर फॉस्फेट यानी एसएसपी (0-16-0-11) खाद का उपयोग करने वाले किसानों को प्रति टन ₹7,408 की सब्सिडी का लाभ मिलेगा.

सूक्ष्म पोषक तत्वों और फोर्टिफिकेशन को बढ़ावा

सरकार ने यूरिया-एसएसपी कॉम्प्लेक्स पर भी विशेष ध्यान दिया है और इसके लिए ₹9,088 प्रति टन की सब्सिडी मंजूर की है.इन सब्सिडी दरों का सबसे बड़ा लाभ यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की कीमतें बढ़ने के बावजूद स्थानीय बाजार में खादों के दाम स्थिर और नियंत्रण में रहते हैं.किसान अब बिना किसी वित्तीय बोझ के अपनी फसल और मिट्टी की जांच के आधार पर सबसे सही और सटीक खाद का चुनाव कर सकते हैं.मिट्टी में केवल मुख्य तत्वों की ही नहीं, बल्कि सूक्ष्म पोषक तत्वों की भी कमी देखी जा रही है. इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने सुक्ष्म उर्वरकों को विशेष प्रोत्साहन दिया है. अगर कोई खाद बोरॉन या जिंक से लेपित है, तो कंपनियों को अतिरिक्त सब्सिडी दी जाती है इसमें बोरॉन 300 रूपये प्रति मीट्रिक टन और जिंक500 रूपये प्रति मीट्रिक टन है .

घरेलू उर्वरक उत्पादन में 50 फीसदी ज्यादा बढोत्तरी 

उर्वरक नीति का एक अहम  पहलू देश को आत्मनिर्भर बनाना भी है. आंकड़ों के अनुसार, एनबीएस योजना के माध्यम से भारत में उत्पादन के उत्पादन में भारी वृद्धि हुई है. साल 2014 में जहाँ घरेलू उत्पादन 112.19 लाख मीट्रिक टन था, वह साल 2025 के अंत तक बढ़कर 168.55 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचने का अनुमान है. यह 50% से ज्यादा की बढ़त है. इसका मतलब है कि अब हम विदेशों से आने वाली महंगी खाद पर कम निर्भर हैं और हमारे अपने कारखाने देश की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हो रहे हैं.

सरकार करेगी कड़ी निगरानी 

सरकार ने केवल सब्सिडी की घोषणा ही नहीं की है, बल्कि इसकी कड़ी निगरानी की व्यवस्था भी की है. उर्वरक कंपनियों के लिए यह अनिवार्य है कि वे खाद की लागत और उसके अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) की पूरी जानकारी सरकार को दें. उर्वरक विभाग नियमित रूप से इन कीमतों की जांच करता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कंपनियां सब्सिडी का पूरा लाभ किसानों तक पहुंचा रही हैं. यदि कोई कंपनी अनुचित दाम वसूलती है, तो उस पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है. यह व्यवस्था बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और ईमानदारी बनाए रखती है.

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