बिजली बिल 5 हजार से जीरो! अंबिकापुर की नीधि वर्मा की छत बन गई 'कमाई का मीटर', जानिए कैसे बदली किस्मत

बिजली बिल 5 हजार से जीरो! अंबिकापुर की नीधि वर्मा की छत बन गई 'कमाई का मीटर', जानिए कैसे बदली किस्मत

अंबिकापुर की नीधि वर्मा का बिजली बिल 5000 से हुआ जीरो. पीएम सूर्य घर योजना से मिली 1.08 लाख की सब्सिडी, अब छत से बन रही बिजली. स्मार्ट मीटर से खपत पर नजर.छत्तीसगढ़ में हर घर बन रहा ऊर्जा आत्मनिर्भर.

धर्मेंद्र सिंह
  • Raipur ,
  • Sep 22, 2026,
  • Updated Sep 22, 2026, 10:11 AM IST

छत्तीसगढ़ में हरित ऊर्जा की क्रांति अब घर-घर पहुंच रही है.सरगुजा जिले के अंबिकापुर में लोग अपनी छतों को ही बिजली का कारखाना बना रहे हैं. प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से जुड़कर परिवार न सिर्फ बिजली बिल से राहत पा रहे हैं, बल्कि कमाई भी कर रहे हैं.

नीधि वर्मा की कहानी: 5 हजार का बिल हुआ जीरो  

मायापुर, अंबिकापुर की रहने वाली श्रीमती नीधि वर्मा का परिवार पहले हर महीने 4 से 5 हजार रुपये बिजली बिल भरता था. घर का बजट बिगड़ जाता था। लेकिन प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना से जुड़ने के बाद तस्वीर बदल गई.

नीधि वर्मा ने अपनी छत पर सोलर पैनल लगवाया। योजना के तहत उन्हें 1.08 लाख रुपये की सब्सिडी मिली.इसमें केंद्र सरकार से 78 हजार और राज्य सरकार से 30 हजार रुपये की मदद शामिल थी. अब उनका घर खुद बिजली बना रहा है. घर की जरूरत पूरी होने के बाद बची हुई बिजली ग्रिड में चली जाती है.नीधि वर्मा कहती हैं, "पहले हम सिर्फ बिजली जलाते थे.अब हम बिजली बनाते भी हैं. बिल की टेंशन खत्म हो गई." 

विनोद राय भी बने ऊर्जा उत्पादक  

अंबिकापुर के ही विनोद कुमार राय ने भी सोलर रूफटॉप लगवाया है. उनके घर में स्मार्ट मीटर और 'मोर बिजली' ऐप से रोज की खपत पर नजर रखी जाती है. इससे पता चलता है कि कौन सा उपकरण फालतू चल रहा है. परिवार अब बिजली को लेकर ज्यादा समझदार हो गया है.

सिर्फ बचत नहीं, पर्यावरण की भी रक्षा  

सोलर ऊर्जा का फायदा सिर्फ पैसों की बचत नहीं है. इससे कोयले और तेल पर निर्भरता कम होती है. हवा साफ रहती है.एक घर की छत छोटी लग सकती है, लेकिन जब लाखों घर जुड़ेंगे तो यह देश के लिए बड़ी ताकत बन जाएगी.

उपभोक्ता से बने उत्पादक  

पहले लोग सिर्फ ग्रिड से बिजली लेते थे और बिल भरते थे. अब प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना ने खेल बदल दिया है.अब हर नागरिक अपनी छत पर बिजली बना सकता है. पहले खुद इस्तेमाल करो, फिर बची हुई बिजली सरकार को दो. यानी अब आम आदमी भी देश की ऊर्जा व्यवस्था का हिस्सा है.

गांव-शहर सबमें बढ़ रही मांग  

सरगुजा में सोलर के लिए आवेदन तेजी से बढ़ रहे हैं.शहर ही नहीं, गांव के लोग भी आगे आ रहे हैं. जहां पहले बिजली बिल घर के बजट का बड़ा हिस्सा खा जाता था, वहीं अब छतें कमाई का जरिया बन रही हैं.

विकसित भारत की ओर एक कदम  

यह योजना 'विकसित भारत, विकसित छत्तीसगढ़' के सपने को मजबूत कर रही है. जब हर छत पर सोलर पैनल होगा, तो देश ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनेगा. हर परिवार का छोटा सा योगदान मिलकर बड़े बदलाव की नींव रख रहा है.प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना सिर्फ पैनल लगाने की स्कीम नहीं है. यह लोगों को बिजली बचाना सिखा रही है, स्मार्ट बनना सिखा रही है और पर्यावरण बचाने के लिए प्रेरित कर रही है.

 

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