
गुजरात स्थित औषधीय और सुगंधित पौधे अनुसंधान निदेशालय (Directorate of Medicinal and Aromatic Plants Research- ICAR DMAPR) को जमा किए गए अनाज और बीजों को कीटों से सुरक्षित रखने के लिए विकसित की गई नई हर्बल बीज कोटिंग तकनीक का पेटेंट मिला है. यह तकनीक पर्यावरण के अनुकूल तरीके से भंडारित अनाज को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों पर नियंत्रण करने के उद्देश्य से विकसित की गई है. संस्थान के अनुसार, इस तकनीक को फूड-ग्रेड पॉलीमर और बायो-पॉलीमर की मदद से तैयार किया गया है. इसमें लेमनग्रास, पामारोसा, दालचीनी, नीम और लौंग जैसे सुगंधित पौधों से निकाले गए एसेंशियल ऑयल का इस्तेमाल किया गया है.
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह हर्बल मिश्रण अनाज और बीजों को कीटों से बचाने में प्रभावी साबित हुआ है. संस्थान ने बताया कि इस तकनीक का बीजों की अंकुरण क्षमता या उनकी भौतिक गुणवत्ता पर कोई नकारात्मक असर नहीं पाया गया. परीक्षण के दौरान इस यौगिक ने पल्स बीटल यानी Callosobruchus chinensis के खिलाफ प्रभावी जीवाणुनाशक और भगाने वाले गुण दिखाए. यह कीट भंडारित दालों और अनाज को भारी नुकसान पहुंचाने के लिए जाना जाता है.
इस तकनीक के विकास में डॉ. जितेंद्र कुमार और डॉ. अश्विन त्रिवेदी ने अहम भूमिका निभाई. इस शोध कार्य को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) से वित्तीय सहायता मिली थी. अधिकारियों के मुताबिक, नई तकनीक से सिंथेटिक कीटनाशकों के उपयोग को कम करने में मदद मिल सकती है.
साथ ही इससे बीजों की जीवन शक्ति और भंडारण क्षमता को बनाए रखने में भी सहायता मिलने की उम्मीद है. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तकनीक भंडारित अनाज और दालों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में उपयोगी साबित हो सकती है.
डॉ. मनीष दास ने ने कहा कि यह उपलब्धि टिकाऊ कृषि और फसल कटाई के बाद प्रबंधन के लिए हर्बल और पौधे आधारित तकनीकों को विकसित करने की संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाती है. उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी तकनीकें पर्यावरण के अनुकूल कृषि मॉडल को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं.
DMAPR भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के तहत काम करने वाला एक प्रमुख राष्ट्रीय संस्थान है. यह संस्थान कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के मार्गदर्शन में औषधीय और सुगंधित पौधों के अनुसंधान और विकास से जुड़े विभिन्न कार्यों पर काम करता है.