
इस बार खाद-बीज से लेकर कीटनाशक कंपनियों का धंधा अच्छा चलेगा. किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए भी अच्छे रिजल्ट की उम्मीद है. ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि मॉनसून की बारिश ने मिट्टी को भरपूर नमी दी है. मिट्टी में पोषक तत्वों की मात्रा भी बरकरार है. दूसरी ओर, सिंचाई की टेंशन नहीं है क्योंकि मॉनसूनी बारिश से देश के सभी जलाशय लबालब भरे हैं. जलाशयों में पिछले साल के मुकाबले इस बार पर्याप्त पानी है. जब सिंचाई के लिए पानी की कमी नहीं है, मिट्टी में नमी बरकरार है तो खेती-बाड़ी की गतिविधियां तेज रहने की पूरी संभावना है. ऐसे में किसान खाद, बीज से लेकर कीटनाशक तक की खपत अधिक करेंगे. इस लिहाज से इन कंपनियों का धंधा चमकने की पूरी उम्मीद है.
केंद्रीय जल आयोग ने बीते हफ्ते अपनी रिपोर्ट में बताया है कि देश के बड़े 155 जलाशयों में पानी का स्टोरेज 86 परसेंट तक है जो कि पिछले साल से बेहतर है. सिंचाई का पानी पर्याप्त होने से रबी सीजन में खेती बंपर होने की संभावना है जिससे खादों की मांग बढ़ेगी. दूसरी ओर, इस बार सब्जी फसलों के अच्छे दाम देखे जा रहे हैं. आलू और प्याज के दाम लगातार बढ़े हुए हैं. इससे किसानों को फायदा हो रहा है. इस फायदे की उम्मीद में मौजूदा सीजन में किसान इसकी खेती को बढ़ाएंगे जिससे खाद-बीज और कीटनाशकों की अच्छी मांग रहेगी.
एक्सपर्ट बताते हैं कि मॉनसून अच्छा रहने की वजह से इस बार यूरिया और एनपीके जैसी खादों की बहुत मांग है. इससे पता चलता है कि किसान अपने खेतों में पोषक तत्वों को बनाए रखने पर अधिक जोर दे रहे हैं जो कि कंपनयियों की लिहाज से अच्छा है. कई राज्यों में ठंड की प्रमुख फसलें जैसे कि सरसों, चना और गेहूं की बुवाई में तेजी दर्ज की जा रही है जिससे आने वाले समय में कृषि इनपुट की मांग और अधिक बढ़ेगी.
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यूपीएल एसएएस के सीईओ आशीष डोभाल ने 'बिजनेसलाइन' से कहा कि रबी सीजन अच्छा दिख रहा है. अच्छी बारिश से पानी का स्तर बढ़ा हुआ है. हालांकि सितंबर-अक्टूबर की बारिश ने खरीफ फसलों को कुछ नुकसान जरूर पहुंचाया, लेकिन रबी के लिए इसका रिजल्ट अच्छा दिखेगा. इससे रबी फसलें जैसे कि गेहूं, सरसों, जीरा और मक्का आदि का उत्पादन बेहतर मिलने की संभावना है.
कुछ ऐसी ही राय धानुका एग्रीटेक के एमडी राहुल धानुका ने रखी और कहा कि जलाशयों में पानी का स्तर अच्छा होने से रबी सीजन के धान की खेती सकारात्मक रहेगी. दक्षिण भारत में रबी सीजन के अंत में धान की बुवाई बढ़ेगी. इसके अलावा महाराष्ट्र और पूरे दक्षिण भारत में चना, अरहर और उड़द की खेती में तेजी रहेगी. पूर्वी भारत के अधिकांश क्षेत्रों में धान की खेती बढ़िया रहेगी. बंगाल और ओडिशा में दाना चक्रवात ने थोड़ा असर डाला है, लेकिन ओवरऑल धान की खेती अच्छी रहने की उम्मीद है.
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