लाल मिर्च में मेथामिडोफोस पेस्टिसाइड, चीन ने कैसे बढ़ाई भारत के निर्यात की मुश्किलें?

लाल मिर्च में मेथामिडोफोस पेस्टिसाइड, चीन ने कैसे बढ़ाई भारत के निर्यात की मुश्किलें?

भारत की सूखी मिर्च के निर्यात पर मेथामिडोफोस नाम के जहरीले कीटनाशक के अवशेषों के कारण संकट खड़ा हो गया है. जानिए यह क्या होता है, कैसे बनता है और इंसानी सेहत और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर इसका क्या असर पड़ता है.

भारतीय मिर्च की खेप पर चीन ने लगाया बैनभारतीय मिर्च की खेप पर चीन ने लगाया बैन
क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Jun 11, 2026,
  • Updated Jun 11, 2026, 1:50 PM IST

भारत से निर्यात होने वाली सूखी लाल मिर्च पर चीन ने सख्ती दिखाते हुए कम से कम तीन खेपों (कंसाइनमेंट) को खारिज कर दिया है और तीन भारतीय निर्यातकों को सस्पेंड कर दिया है. कारण है—मिर्च में ‘मेथामिडोफोस’ नाम के जहरीले कीटनाशक के अवशेष पाए जाना. यह मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि चीन भारत की लाल मिर्च का सबसे बड़ा खरीदार है और कुल निर्यात का बड़ा हिस्सा वहीं जाता है. ऐसे में अब यह सवाल उठ रहा है कि आखिर मेथामिडोफोस क्या है और यह इतना खतरनाक क्यों माना जाता है.

मेथामिडोफोस क्या है?

मेथामिडोफोस एक बहुत ही जहरीला ऑर्गेनोफॉस्फेट (Organophosphate) कीटनाशक है. इसका इस्तेमाल खेतों में कीटों को मारने के लिए किया जाता है, लेकिन इसका खतरा इतना ज्यादा है कि कई देशों में इस पर सख्त नियंत्रण या प्रतिबंध लागू है. यह खासतौर पर कोलिनेस्टरेज इनहिबिटर (Cholinesterase inhibitor) होता है, यानी यह शरीर के नर्वस सिस्टम (तंत्रिका तंत्र) को सीधे प्रभावित करता है.

शरीर पर कैसे असर डालता है?

विशेषज्ञों के मुताबिक मेथामिडोफोस का प्रभाव बहुत खतरनाक हो सकता है, खासकर जब यह खाने के जरिए शरीर में पहुंचता है. इसके प्रभावों की बात करें तो इसमें बहुत अधिक लार आना, उल्टी और पसीना, मांसपेशियों में कमजोरी, सांस लेने में दिक्कत और गंभीर मामलों में नर्वस सिस्टम फेल होने जैसे लक्षण शामिल हैं. विशेषज्ञों के अनुसार इसे अधिक मात्रा में लेने पर यह तेज जहर (Acute poisoning) का कारण बन सकता है.

मिर्च में यह कीटनाशक कैसे पहुंचता है?

मेथामिडोफोस सीधे इस्तेमाल के अलावा एक और तरीके से भी पैदा होता है. किसान अक्सर ऐसिफेट (Acephate) नाम का कीटनाशक इस्तेमाल करते हैं जो खेत में जाकर रासायनिक प्रक्रिया से टूटकर मेथामिडोफोस में बदल जाता है. इसके अवशेष मिर्च और अन्य मसालों में लंबे समय तक बने रहते हैं. यही कारण है कि सूखी मिर्च, शिमला मिर्च (कैप्सिकम) और पपरिका जैसे मसालों में इसके अवशेष अक्सर पाए जाते हैं.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सख्त नियम

दुनियाभर में खाद्य सुरक्षा एजेंसियां इस केमिकल को लेकर बेहद सतर्क हैं. यूरोपीय संघ (EU) ने इसके लिए अधिकतम सीमा (MRL) 0.01 mg/kg तय कर रखी है. इससे ज्यादा मात्रा मिलने पर माल तुरंत खारिज कर दिया जाता है. FAO और RASFF जैसे अंतरराष्ट्रीय सिस्टम लगातार ऐसे मामलों को ट्रैक करते रहते हैं. इसी सख्ती के चलते सीमा पार व्यापार में बार-बार रोक लग रही है.

चीन ने क्यों उठाया कदम?

चीन ने भारतीय मिर्च में मेथामिडोफोस की अधिक मात्रा पाए जाने के बाद तीन कंपनियों के निर्यात पर रोक लगा दी और कई खेपों को वापस लौटा दिया. चीन का कहना है कि यह कीटनाशक इंसानों के नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए खाद्य सुरक्षा के नियमों का पालन जरूरी है.

समाधान क्या हैं?

विशेषज्ञों के अनुसार इस समस्या से बचने के लिए कीटनाशकों का संतुलित और नियंत्रित इस्तेमाल, खेती के सही तौर-तरीकों (Good Agricultural Practices) को अपनाना, फसल की जांच और ट्रेसबिलिटी सिस्टम मजबूत करना और वैकल्पिक और कम विषैले कीटनाशकों का उपयोग करना सबसे बेहतर उपाय हैं. मेथामिडोफोस का मुद्दा केवल एक कीटनाशक का नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा, लोगों की सेहत और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़ा बड़ा सवाल है. अगर समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो भारतीय मसालों की वैश्विक मांग पर असर पड़ सकता है और किसानों की आय भी संकट में आ सकती है.

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