Urea Usage: ज्यादा यूरिया करते हैं प्रयोग तो जान लें कितना है नुकसान, समझें इसके साइड इफेक्‍ट्स 

Urea Usage: ज्यादा यूरिया करते हैं प्रयोग तो जान लें कितना है नुकसान, समझें इसके साइड इफेक्‍ट्स 

हाल में अलग-अलग जिलों से जुटाए गए आंकड़ों के विश्लेषण में सामने आया है कि कई किसान जरूरत से 50 से 100 प्रतिशत तक अधिक यूरिया का प्रयोग कर रहे हैं. किसानों में यह गलत धारणा बनी हुई है कि ज्यादा यूरिया डालने से उत्पादन बढ़ेगा जबकि इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है. अतिरिक्त यूरिया के कारण फसलों में केमिकल अवशेष रह सकते हैं. इससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ता है. साथ ही इससे मिट्टी प्रदूषित होती है और अनाज की गुणवत्ता भी गिरती है.

क‍िसान तक
  • New Delhi ,
  • Jan 05, 2026,
  • Updated Jan 05, 2026, 10:04 AM IST

खेतों में ज्यादा पैदावार की चाहत में किसान अक्सर जरूरत से ज्‍यादा यूरिया का इस्तेमाल कर लेते हैं. यही आदत धीरे-धीरे मिट्टी और फसल दोनों को नुकसान पहुंचाती है. बहुत ज्‍यादा यूरिया से मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता खत्म होने लगती है. अब तो कृषि विशेषज्ञ भी यही बात कहने लगे हैं कि ज्‍यादा यूरिया की वजह से गुड माइक्रो बैक्‍टीरिया खत्‍म  हो जाते हैं और जमीन सख्त होती चली जाती है. फसलों की बढ़वार तो दिखती है लेकिन दाने कमजोर और रोगों की आशंका ज्यादा हो जाती है. इतना ही नहीं ज्यादा यूरिया से भूजल प्रदूषण बढ़ता है और लागत भी बेवजह बढ़ जाती है जिससे मुनाफा घटने लगता है. 

किसानों की गलत धारणा 

प्रोफेसर जयशंकर तेलंगाना एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (PTAU) के वाइस-चांसलर एल्डस जनैया ने साफ-साफ कहा है कि यूरिया के बहुत ज्‍यादा प्रयोग से फसलों की पैदावार में कोई अतिरिक्त बढ़ोतरी नहीं होती, बल्कि इससे स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं. उन्होंने बताया कि हाल में अलग-अलग जिलों से जुटाए गए आंकड़ों के विश्लेषण में सामने आया है कि कई किसान जरूरत से 50 से 100 प्रतिशत तक अधिक यूरिया का प्रयोग कर रहे हैं. किसानों में यह गलत धारणा बनी हुई है कि ज्यादा यूरिया डालने से उत्पादन बढ़ेगा जबकि इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है.

फसलों में रह जाते हैं केमिकल 

उन्होंने कहा कि अतिरिक्त यूरिया के कारण फसलों में केमिकल अवशेष रह सकते हैं. इससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ता है. साथ ही इससे मिट्टी प्रदूषित होती है और अनाज की गुणवत्ता भी गिरती है. उन्‍होंने कई रिसर्च का हवाला दिया और कहा कि यूरिया के गलत इस्तेमाल से पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है. इसकी वजह से कीट और बीमारियों का खतरा बढ़ता है. नाइट्रोजन की जरूरत स्वीकार करते हुए उन्होंने किसानों से संतुलित और समझदारी से यूरिया के उपयोग की अपील की. 

सुधर सकती है मिट्टी की हेल्‍थ 

साफ है कि कम कीमत के कारण यूरिया सबसे ज्‍यादा प्रयोग किया जाने वाला उर्वरक बन गया है लेकिन इसका असंतुलित प्रयोग किसानों, उपभोक्ताओं और पर्यावरण तीनों के लिए नुकसानदेह है. अगर किसान मिट्टी परीक्षण के आधार पर और विशेषज्ञों की सलाह से संतुलित मात्रा में यूरिया व बाकी उर्वरकों का उपयोग करें तो न सिर्फ लागत घटाई जा सकती है बल्कि फसलों की गुणवत्ता, मिट्टी की सेहत और लोगों के स्वास्थ्य की भी प्रभावी रूप से रक्षा की जा सकती है.

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