सीजफायर से खाद सप्लाई को राहत की उम्मीद, कच्चे माल की कीमतों में धीरे-धीरे आएगी गिरावट

सीजफायर से खाद सप्लाई को राहत की उम्मीद, कच्चे माल की कीमतों में धीरे-धीरे आएगी गिरावट

अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर के बाद भारतीय खाद उद्योग को हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने से कच्चे माल, LNG और तैयार खाद की सप्लाई में सुधार की उम्मीद है. हालांकि कीमतों में कमी धीरे-धीरे दिखेगी. खरीफ सीजन से पहले सरकार और कंपनियां यूरिया उत्पादन, आयात और वितरण को मजबूत करने में जुटी हैं, जबकि सब्सिडी और स्थिर कीमतों से किसानों को राहत मिलने की संभावना है.

Urea Price Hike and Subidy Pattern Change SuggestionUrea Price Hike and Subidy Pattern Change Suggestion
क‍िसान तक
  • New Delhi ,
  • Apr 09, 2026,
  • Updated Apr 09, 2026, 2:38 PM IST

भारतीय खाद उद्योग ने उम्मीद जताई है कि अमेरिका और ईरान के बीच जिस सीजफायर और बातचीत पर सहमति बनी है, उससे हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने के बाद कच्चे माल, गैस और तैयार प्रोडक्ट की सप्लाई में धीरे-धीरे सुधार होगा, हालांकि कीमतों में कमी का असर धीरे-धीरे ही दिखेगा.

सीजफायर का समय बहुत अहम है, क्योंकि अप्रैल और मई दो ऐसे महीने हैं जिनमें यूरिया का जितना हो सके उतना उत्पादन और स्टोरेज करना जरूरी होता है. ऐसा इसलिए क्योंकि जून में मॉनसून के आने के साथ ही खरीफ की बुवाई का मौसम शुरू हो जाएगा.

खादों की सप्लाई सुचारू रहेगी

उद्योग के एक अधिकारी ने कहा, "यह एक स्वागत योग्य कदम है और इससे भारत को सप्लायर देशों से कच्चे माल, गैस, फॉस्फोरिक एसिड और सल्फ्यूरिक एसिड जैसे कच्चे माल, और DAP, यूरिया जैसे तैयार प्रोडक्ट की आपूर्ति मिलने के मामले में फायदा होगा."

उन्होंने कहा कि हालांकि वैश्विक स्तर पर ऊंची कीमतों को लेकर चिंता कुछ समय तक बनी रह सकती है, लेकिन जैसे ही सप्लाई में सुधार होगा, यह चिंता तुरंत कम हो जाएगी. उन्होंने यह भी जोड़ा कि कीमतों में कितनी गिरावट आएगी, यह कच्चे तेल की कीमतों पर भी निर्भर करेगा.

सीजफायर पर टिप्पणी करते हुए, इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL) के प्रबंध निदेशक पी.एस. गहलोत ने कहा कि कंपनी समय पर आयात और राज्यों में खाद बांटने की तैयारियों को मजबूत करने पर लगातार ध्यान लगा रही है, ताकि इसकी उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके.

सीजफायर से फायदा

गहलोत ने कहा, "सीजफायर एक सही कदम है, क्योंकि इससे खाड़ी क्षेत्र से LNG की उपलब्धता में सुधार होने और खरीफ की बुवाई से पहले खादों की सप्लाई सुचारू करने में मदद मिलने की उम्मीद है. चूंकि प्राकृतिक गैस यूरिया उत्पादन के लिए मुख्य कच्चा माल है और भारत आयातित LNG पर काफी हद तक निर्भर है, इसलिए यह घरेलू उत्पादन को स्थिर करने, आयात से जुड़ी लागत के दबाव को कम करने और कीमतों में सट्टेबाजी के कारण होने वाली बढ़ोतरी पर रोक लगाने में मददगार होगा."

उन्होंने कहा कि इस सीजफायर से सब्सिडी के मोर्चे पर भी राहत मिली है और खाद क्षेत्र के लिए supply-chain में भरोसा मजबूत हुआ है.

सरकार की ओर से IPL ने 4 अप्रैल को 2.5 मिलियन टन (mt) यूरिया के आयात के लिए एक tender जारी किया जो सरकार द्वारा किसी एक बोली में मंगाई गई अब तक की सबसे बड़ी मात्रा है और यह टेंडर 15 अप्रैल को खोली जाएगी. इस टेंडर में यह शर्त रखी गई है कि यूरिया की लोडिंग पूरी होने के बाद, जहाजों को 15 जून से पहले लोडिंग-बंदरगाह से रवाना हो जाना चाहिए. इससे भारत को 31 जुलाई तक यह खाद पाने में मदद मिलेगी.

यूरिया प्लांटों को LNG की आपूर्ति

सरकार ने बुधवार को यह भी घोषणा की कि यूरिया प्लांटों को LNG की आपूर्ति बढ़ाकर, उनके पिछले छह महीनों की औसत खपत के 95 प्रतिशत तक कर दी जाएगी. सोमवार को यह घोषणा की गई थी कि प्लांटों को उनकी LNG जरूरत का 90 प्रतिशत मिलना शुरू हो गया है.

Grant Thornton Bharat के पार्टनर - Agri and Allied Sector, चिराग जैन के अनुसार, भारत की फर्टिलाइजर इकोनॉमी वैश्विक सप्लाई चेन से गहराई से जुड़ी हुई है. पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण हालात और भी ज्यादा गंभीर और अस्थिर हो गए हैं, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र भारत की यूरिया जरूरत का 20–30 प्रतिशत और DAP आयात का 30 प्रतिशत पूरा करता है, और साथ ही भारत के LNG आयात का लगभग 50 प्रतिशत भी यहीं से आता है, जो यूरिया उत्पादन के लिए एक मुख्य कच्चा माल है.

जैन ने बुधवार को कैबिनेट की ओर से खरीफ 2026 के लिए 41,500 करोड़ रुपये की खाद सब्सिडी को मंजूरी देने के फैसले को ईरान लड़ाई से पैदा हुई सप्लाई में रुकावटों और कीमतों में उतार-चढ़ाव के बढ़ते असर को कम करने के लिए एक समझदारी भरा और सही समय पर उठाया गया कदम बताया. उन्होंने कहा, "स्थिर कीमतों पर मुख्य खादों की लगातार उपलब्धता बनाए रखने का यह फैसला खरीफ के अहम मौसम के दौरान किसानों के लिए इनपुट की लागत को कुछ कम रखने में मदद करेगा. इस कदम से बुवाई की तेजी को बनाए रखने, लागत के कारण होने वाली परेशानी को रोकने और किसानों की आय की रक्षा करने में मदद मिलेगी."

सरकार ने कंपनियों को यूरिया और DAP (जो सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले उर्वरक हैं) की खुदरा कीमतें बढ़ाने की इजाजत नहीं दी है, जबकि पिछले एक साल में MOP और कॉम्पलेक्स खादों की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी देखी गई है.

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