
महाराष्ट्र सरकार ने खरीफ सीजन के दौरान बीज, खाद और कीटनाशकों की क्वालिटी से जुड़ी किसानों की शिकायतों के निपटारे के लिए नई व्यवस्था लागू की है. कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने कहा कि अब ऐसी हर शिकायत की जांच और समाधान सात दिनों के भीतर करने का लक्ष्य तय किया गया है. इसके लिए राज्य सरकार ने तहसील (तालुका) स्तर की शिकायत निवारण समितियों का फिर से गठन किया है.
कृषि विभाग की ओर से जारी नए सरकारी आदेश के अनुसार, शिकायत मिलने के एक हफ्ते के अंदर संबंधित समिति को खेत का निरीक्षण करना होगा. निरीक्षण पूरा होने के बाद तय फॉर्मेट में अंतिम रिपोर्ट तैयार कर आगे की कार्रवाई की जाएगी. राज्य सरकार ने कहा कि इससे शिकायतों के निपटारे में देरी कम होगी और प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी बनेगी.
नई व्यवस्था के तहत तहसील कृषि अधिकारी समिति के अध्यक्ष होंगे. समिति में कृषि विश्वविद्यालय, कृषि अनुसंधान केंद्र या कृषि विज्ञान केंद्र के प्रतिनिधि, महाबीज के अधिकारी और कृषि विभाग के अन्य अधिकारी भी शामिल किए जाएंगे. सरकार का मानना है कि तकनीकी विशेषज्ञों की मौजूदगी से जांच अधिक निष्पक्ष और वैज्ञानिक आधार पर होगी.
शिकायत की जांच के समय संबंधित बीज, खाद या कीटनाशक कंपनी के प्रतिनिधि और विक्रेता को भी उपस्थित रहना होगा. किसान की ओर से पेश खरीद रसीदों (परचेज़ बिल) का वेरिफिकेशन किया जाएगा, निर्धारित फॉर्मेट में पंचनामा तैयार होगा और संबंधित बीज बैच के नमूने मान्यता प्राप्त लैब में टेस्टिंग के लिए भेजे जाएंगे.
कृषि मंत्री दत्तात्रेय भराणे ने कहा कि नई व्यवस्था का उद्देश्य किसानों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना और नियमों के अनुसार दोषी निर्माता या विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई करना है. उन्होंने कहा कि अगर किसी तालुका में शिकायतों की संख्या 100 से अधिक हो जाती है तो वहां अतिरिक्त शिकायत निवारण समितियां भी बनाई जा सकेंगी.
राज्य सरकार ने जिला अधीक्षक कृषि अधिकारियों को जरूरत पड़ने पर तुरंत अतिरिक्त समितियां गठित करने के निर्देश दिए हैं. कृषि विभाग सभी शिकायतों की नियमित निगरानी करेगा, ताकि किसानों को समय पर राहत मिल सके और कम क्वालिटी वाले कृषि इनपुट की सप्लाई करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके. (पीटीआई)