Tips: खेत से आवारा पशुओं को दूर भगाएंगे ये देसी उपाय, अभी अपना लें तो बच जाएंगी फसलें

Tips: खेत से आवारा पशुओं को दूर भगाएंगे ये देसी उपाय, अभी अपना लें तो बच जाएंगी फसलें

अगर आप भी नीलगाय और आवारा पशुओं के आतंक से परेशान हैं तो उनको भगाने का एक बेहतरीन उपाय है, जो बहुत ही आसान और सस्ता है. इसे कोई भी किसान अपनाकर अपनी फसलों को बर्बाद होने से बचा सकता है.

पशुओं को दूर भगाएंगे ये देसी उपायपशुओं को दूर भगाएंगे ये देसी उपाय
संदीप कुमार
  • Noida,
  • Feb 12, 2026,
  • Updated Feb 12, 2026, 6:01 PM IST

किसान दिन-रात मेहनत करके अपनी फसल तैयार करता है, लेकिन खेतों में आवारा पशुओं की वजह से उसकी सारी मेहनत मिट्टी में मिल जाती है. चाहे कितनी भी रखवाली कर लो, नीलगाय, गाय, सांड, जंगली सुअर और बंदर मौका मिलते ही खेत में घुसकर फसलों को बर्बाद कर देते हैं. वहीं, महंगी तारबंदी लगाना या हर रात पहरा देना हर किसान के बस की बात नहीं होती, जिससे फसलों को नुकसान होता है. लेकिन अब उन किसानों को घबराने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि इसका एक देसी, सस्ता और असरदार उपाय मौजूद है, जिसे किसान खुद घर पर आसानी से बना सकता है यानी अब खेत की रखवाली सिर्फ लाठी और पहरे पर नहीं, बल्कि अक्ल और देसी जुगाड़ पर होगी. आइए जानते हैं कैसे.

देसी घोल से फसल की करें सुरक्षा

किसान अपनी फसल को बचाने के लिए सबसे पहले फिनायल का लिक्विड और पीसी लाल मिर्च और नीम का तेल घोल काफी कारगर है. इस घोल को सूती कपड़े या जूट के बोरे में उसे भीगाकर खेत के मेड़ों के चारो तरफ बांस में बांध दें. इससे आवारा नीलगाय और पशुओं के खेत में आने से पहले उनके नाक तक यह दुर्गंध पहुंच जाएगी, जिससे जानवर खेतों मे नहीं घुसेंगे. यह किसानों के लिए सरल और आसान उपाय है. इससे किसानों की फसल सुरक्षित रह सकती है.

इतने दिन तक असरदार है ये उपाय

इसके लिए किसान खेत के मेंड़ों के चारों तरफ बांस के डंडे गाड़ दें. इसके बाद लाल मिर्च का पाउडर, नीम का तेल, फिनायल का लिक्विड आवश्यकतानुसार पानी में घोल बना लें. फिर उसे सूती कपड़े या जूट के बोरे पर डालकर बांस में  चारों तरफ बांध दें. इस उपाय को अपनाने से लगभग 20 से 25 दिनों तक कपड़ों में गंध का असर रहता है. इस गंध के कारण जानवर खेतों में प्रवेश नहीं कर पाते हैं और फसल भी सुरक्षित रहती है.

इसके अलावा ये उपाय भी है कारगर

नीम की खली: नीम की खली से किसान फसलों को बचा सकते हैं. इसके लिए तीन किलो नीम की खली और तीन किलो ईंट भट्टे की राख का पाउडर बनाकर प्रति बीघा के हिसाब से खेतों में छिड़काव करें. इससे फसल को भी फायदा होता है, नीम की खली से कीट और रोगों की लगने की समस्या भी कम हो जाती है और नीलगाय खेत के आसपास भी नहीं आते हैं. नीम की गंध से जानवर फसलों से दूर रहते हैं.

मुर्गी का अंडा: फसल को बचाने क़े लिए मुर्गी के 10-12 अंडों और 50 ग्राम वाशिंग पाउडर को 25 लीटर पानी में मिलाकर घोल बनाएं और खड़ी फसल के मेड़ों पर छिड़काव कर दीजिए. इसकी गंध से छुट्टा जानवर और नीलगाय खेत में नहीं आते. यानी इस उपाय को अपनाने से किसान अपनी फसलों को बचा सकते हैं.

राख का करें इस्तेमाल: जंगली जानवर और नीलगाय से फसल को बचाने के लिए राख का इस्तेमाल कर सकते हैं. इस समय किसान ठंड से बचने के लिए अपने घर में आग जलाते हैं और कुछ लोगों के घर में तो खाना भी चूल्हे पर पकता है. जहां से लकड़ी जलने के बाद राख मिल जाएगी. उस राख को अच्छे से ठंडा करके गेहूं, चना, मटर, मक्का और सब्जियों की फसल में छिड़क दें. नीलगाय और जंगली जानवर इसे एक बार तो खाएंगे, लेकिन दोबारा खेत में नहीं घुसेंगे.

मट्ठा और लहसुन का घोल: नीलगाय को खेतों की ओर आने से रोकने के लिए 4 लीटर मट्ठे में आधा किलो छिला हुआ लहसुन पीसकर मिला लें. इसमें 500 ग्राम बालू डालें. इस घोल को पांच दिन बाद छिड़काव करें. इसकी गंध से करीब 20 दिन तक नीलगाय खेतों में नहीं आएगी. इसे 15 लीटर पानी के साथ भी प्रयोग किया जा सकता है.

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