ओडिशा में बारिश रहेगी कमजोर: बंगाल की खाड़ी में चक्रवात बनने के संकेत, किसानों को सतर्क रहने की सलाह

ओडिशा में बारिश रहेगी कमजोर: बंगाल की खाड़ी में चक्रवात बनने के संकेत, किसानों को सतर्क रहने की सलाह

ओडिशा में 15 से 22 अक्टूबर तक बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है, जबकि बंगाल की खाड़ी और निकोबार क्षेत्र में चक्रवात बनने की आशंका जताई गई है. मौसम विभाग ने धान, दलहन, भिंडी, बैंगन और गन्ना उत्पादक किसानों के लिए सिंचाई, जल निकासी और कीट-रोग प्रबंधन को लेकर विशेष कृषि सलाह जारी की है.

Cyclone Arnab El-nino Cyclone Arnab El-nino
क‍िसान तक
  • भुवनेश्वर ,
  • Oct 13, 2026,
  • Updated Oct 13, 2026, 11:44 AM IST

ओडिशा में अक्टूबर के दूसरे और तीसरे सप्ताह के दौरान बारिश की गतिविधियां सीमित रहने का अनुमान है. मौसम पूर्वानुमान के अनुसार 15 अक्टूबर तक राज्य में केवल छिटपुट बारिश होने की संभावना है. इस दौरान आंतरिक ओडिशा में बारिश सामान्य से कम और तटीय क्षेत्रों में सामान्य रह सकती है. वहीं 16 से 22 अक्टूबर के बीच भी अधिकांश इलाकों में केवल हल्की और छिटपुट बारिश के आसार हैं.

बंगाल की खाड़ी में चक्रवात!

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार पहले सप्ताह में राज्य के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है. न्यूनतम तापमान भी अधिकांश क्षेत्रों में 22 से 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रह सकता है. दूसरे सप्ताह में भी तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिख रहा है और मौसम सामान्य रहने की संभावना है.

हालांकि किसानों और प्रशासन की चिंता बढ़ाने वाली बात यह है कि बंगाल की खाड़ी के मध्य भाग में चक्रवाती सिस्टम विकसित होने की मध्यम संभावना जताई गई है. इसके अलावा 16 से 22 अक्टूबर के दौरान निकोबार द्वीप समूह के आसपास भी चक्रवात बनने की आशंका जताई गई है. पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में भी कम संभावना के साथ चक्रवाती गतिविधि विकसित हो सकती है.

इसी को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को मौसम अपडेट पर लगातार नजर रखने की सलाह दी है. किसानों से कहा गया है कि बारिश वाले दिनों में फसल सुरक्षा रसायनों का छिड़काव न करें और खेतों में उचित जल निकासी की व्यवस्था बनाए रखें. विशेष रूप से निचले क्षेत्रों के धान खेतों में जलभराव रोकने पर जोर दिया गया है.

धान किसानों के लिए विशेष सलाह

धान उत्पादक किसानों को खेत में 2 से 5 सेंटीमीटर पानी बनाए रखने की सलाह दी गई है. यलो स्टेम बोरर और ब्लास्ट रोग के खतरे को देखते हुए कीट और रोग प्रबंधन के लिए अनुशंसित दवाओं के उपयोग की सलाह दी गई है. वहीं ब्राउन प्लांट हॉपर (BPH) और व्हाइट बैक्ड प्लांट हॉपर (WBPH) के प्रकोप की संभावना को देखते हुए अधिक नाइट्रोजन उर्वरकों के इस्तेमाल से बचने को कहा गया है.

दलहन फसलों में सूखे की स्थिति बनने पर हल्की सिंचाई करने और फूल और फली बनने के समय नमी बनाए रखने की सलाह दी गई है. भिंडी और बैंगन की फसलों में भी जल निकासी पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है, ताकि जड़ों में सड़न और रोगों का खतरा न बढ़े.

गन्ना किसानों को फसल में नियमित सिंचाई, जल निकासी और कीट प्रबंधन अपनाने की सलाह दी गई है. साथ ही मधुमक्खियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कीटनाशकों का छिड़काव शाम के समय करने की सिफारिश की गई है.

कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि संभावित चक्रवाती गतिविधियों और बदलते मौसम को देखते हुए फसलों की नियमित निगरानी करें और स्थानीय कृषि अधिकारियों और मौसम विभाग की सलाह के अनुसार ही कृषि कार्यों की योजना बनाएं.

MORE NEWS

Read more!