
खरीफ सीजन में अगस्त का महीना मक्का किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है. इस समय कई खेतों में मक्का की फसल तेजी से बढ़ रही है और लगातार हो रही बारिश से पौधों को पर्याप्त नमी भी मिल रही है. हालांकि, ज्यादा बारिश के कारण खेतों में जलभराव, खरपतवार और कीटों का खतरा भी बढ़ सकता है. ऐसे में सिर्फ समय पर बुवाई करना ही अच्छी पैदावार के लिए काफी नहीं है. अभी किसानों को फसल में संतुलित पोषण देने, समय पर खरपतवार नियंत्रण करने और कीटों की नियमित निगरानी करने की जरूरत है. बिहार कृषि विभाग ने भी किसानों को इन 3 कामों को समय पर करने की सलाह दी है. जिससे मक्का की बढ़वार बेहतर होगी और अच्छी पैदावार के साथ किसानों की आमदनी बढ़ाने में भी मदद मिलेगी.
मक्का की फसल में नाइट्रोजन की जरूरत अधिक होती है. इसलिए पूरी यूरिया एक साथ देने के बजाय फसल की जरूरत के अनुसार अलग-अलग समय पर देना अधिक उपयोगी होता है. कृषि विभाग की सलाह के मुताबिक, बाली निकलने से पहले यूरिया की बची हुई मात्रा का इस्तेमाल करें. इससे फसल को जरूरी नाइट्रोजन मिलती रहेगी और पौधों की बढ़वार अच्छी होगी.
नाइट्रोजन की कमी होने पर मक्का के पौधों की पत्तियां पीली पड़ सकती हैं और पौधों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है. वहीं जरूरत से ज्यादा यूरिया का इस्तेमाल भी फसल के लिए नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए किसान अपने खेत की स्थिति और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही यूरिया का इस्तेमाल करें.
इस समय मक्का के खेत में खरपतवार फसल के लिए बड़ी समस्या बन सकते हैं. खरपतवार होने से फसलों को मिट्टी से पानी, पोषक तत्व और धूप नहीं मिलता जिसका सीधा असर फसल की बढ़वार और उत्पादन पर पड़ सकता है. इसलिए खेत में समय-समय पर निगरानी करते रहें और खरपतवार दिखाई देने पर उचित तरीके से उनका नियंत्रण करें. शुरुआती अवस्था में खरपतवार पर नियंत्रण करना खास तौर पर जरूरी है, क्योंकि इस समय मक्का के पौधे कमजोर होते हैं और खरपतवार तेजी से बढ़ सकते हैं. किसान खेत की स्थिति के अनुसार निराई-गुड़ाई या कृषि विशेषज्ञ की सलाह से अनुशंसित खरपतवारनाशी का इस्तेमाल कर सकते हैं.
मक्का की फसल में तना छेदक (Stem Borer) एक महत्वपूर्ण कीट है. यह पौधे के तने के अंदर जाकर नुकसान पहुंचाता है. इसके कारण पौधे कमजोर हो सकते हैं और फसल की बढ़वार प्रभावित हो सकती है. इसलिए किसान नियमित रूप से खेत का निरीक्षण करें और शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही नियंत्रण के उपाय करें. समय पर निगरानी करने से कीट के ज्यादा फैलने से पहले उसे नियंत्रित करना आसान होता है. किसानों को बिना जरूरत कीटनाशक का इस्तेमाल करने के बजाय पहले कीट की पहचान करनी चाहिए और कृषि विभाग या कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही उचित दवा का इस्तेमाल करना चाहिए.
खरीफ मक्का में अच्छी पैदावार के लिए तीनों काम एक-दूसरे से जुड़े हैं. पौधों को सही समय पर पोषण मिलने से उनकी बढ़वार बेहतर होती है, खरपतवार नियंत्रण से फसल को पर्याप्त पानी और पोषक तत्व मिलते हैं और कीटों की समय पर रोकथाम से पौधों को नुकसान से बचाया जा सकता है. वहीं, खेत में यूरिया या कीटनाशक का इस्तेमाल केवल मात्रा देखकर न करें. मिट्टी, फसल की अवस्था और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहेगा.