Gehu Gyan: 15 जनवरी तक गेहूं किसान कर लें ये जरूरी काम, नहीं तो होगा भारी नुकसान

Gehu Gyan: 15 जनवरी तक गेहूं किसान कर लें ये जरूरी काम, नहीं तो होगा भारी नुकसान

देश के अधिकांश हिस्सों में गेहूं की बुवाई अब संपन्न हो गई है. वहीं, अभी पड़ रही ठंड और कोहरा गेहूं की फसल के लिए संजीवनी साबित हो रहा है. ऐसे में जिन किसानों ने अभी तक बुआई के बाद खाद नहीं डाला है उन्हें भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल ने सलाह दी है.

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संदीप कुमार
  • Noida,
  • Jan 03, 2026,
  • Updated Jan 03, 2026, 11:52 AM IST

देश के अधिकांश हिस्सों में गेहूं की बुवाई अब पूरी हो गई है. वहीं, अभी पड़ रही ठंड और कोहरा गेहूं की फसल के लिए संजीवनी साबित हो रहा है, यानी कुल मिलाकर ये मौसम गेहूं की फसल में टिलरिंग के लिए अनुकूल है. ऐसे में जिन किसानों ने अभी तक बुआई के बाद खाद नहीं डाला है उन्हें भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल ने सलाह दी है कि वे अच्छी पैदावार के लिए सही मात्रा में खाद डालें और सही समय पर सिंचाई करें. बता दें कि ये सलाह 1 जनवरी से 15 जनवरी तक के लिए दी गई है.

किसानों के लिए दिया गया सुझाव

  • पानी बचाने और लागत कम करने के साथ-साथ अधिक उपज के लिए सही मात्रा में खाद का उपयोग करें और समझदारी से सिंचाई करें.
  • किसानों को इस अवस्था में खरपतवार प्रबंधन का ठीक से पालन किया जाना चाहिए.
  • सिंचाई से पहले मौसम पर नज़र रखें और अगर बारिश का पूर्वानुमान है, तो सिंचाई से बचें ताकि ज्यादा पानी की स्थिति से बचा जा सके.
  • फसल में रतुआ रोग की नियमित निगरानी करें और लक्षण दिखने पर नज़दीकी अनुसंधान संस्थान, राज्य कृषि विश्वविद्यालय या कृषि विज्ञान केंद्र से तत्काल सलाह लें.
  • गेहूं की फसल में यूरिया की टॉप-ड्रेसिंग हमेशा सिंचाई से ठीक पहले करें, ताकि पौधों द्वारा पोषक तत्वों का उपयोग अधिकतम हो सके.

किसान इन सुझावों का भी रखें ध्यान

  • नाइट्रोजन की पूरी मात्रा बुवाई के 40-45 दिन के भीतर पूरी कर लें और यूरिया हमेशा सिंचाई से ठीक पहले दें, ताकि इसकी क्षमता बढ़े.
  • इनपुट (उर्वरक, सिंचाई, कीटनाशक/शाकनाशी) का संतुलित उपयोग करें और सिंचाई सोच-समझकर करें, जिससे पानी की बचत के साथ अधिकतम उत्पादन मिल सके.
  • फसल में पीलापन दिखाई देने पर अतिरिक्त यूरिया न डालें, कोहरे या लगातार बादल वाली परिस्थितियों में भी नाइट्रोजन का प्रयोग टालें क्योंकि इससे नुकसान का जोखिम बढ़ता है.
  • सिंचाई से पहले मौसम पूर्वानुमान अवश्य देखें और बारिश की संभावना होने पर सिंचाई न करें.
  • कुछ क्षेत्रों में गेहूं की फसल में पीलापन एक समस्या है, जो अत्यधिक सिंचाई, अवशेषों को मिट्टी में मिलाने से पोषक तत्वों के निष्क्रिय होने, नाइट्रोजन (निचली पतियों), सल्फर (नई पत्तियों), मैग्नीशियम (पुरानी पत्तियों में शिराओं के बीच क्लोरोसिस) की कमी या धुंध भरे मौसम के कारण हो सकती है.
  • यदि पाला पड़ता है, तो हल्की सिंचाई की जा सकती है.
  • सल्फर की कमी के लिए सिंचाई से पहले 3 किलो सल्फर उर्वरक डालें.
  • मैग्नीशियम की कमी के लिए 35-40 दिन बाद 0.5% मैग्नीशियम सल्फेट को 3% यूरिया के साथ मिलाकर छिड़काव करें.

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