
लहसुन की खेती करने वाले कई किसानों को एक आम समस्या का सामना करना पड़ता है—लहसुन का तना नीचे या बीच से फट जाना. इससे लहसुन की चमक खराब हो जाती है, भंडारण के दौरान जल्दी सड़न आती है और मंडी में सही दाम भी नहीं मिल पाता. अधिकांश इस समस्या से जूझते हुए पाए जाते हैं जिनकी शिकायत लहसुन की पैदावार को लेकर होती है.
लहसुन के तने को मजबूत बनाने के लिए बोरॉन बहुत जरूरी है. इसकी कमी से तना कमजोर हो जाता है और दबाव पड़ते ही फटने लगता है. इसलिए लहसुन की खेती में बोरॉन का ज्यादा से ज्यादा ध्यान रखें.
कई किसान 70–80 दिन की फसल में भी यूरिया डालते रहते हैं. इससे पौधा ऊपर से तो हरा-भरा दिखता है, लेकिन अंदर से कच्चा रह जाता है और तना फट जाता है. इसलिए किसान यूरिया डालते वक्त सावधान रहें और जब जरूरी हो तभी उसे डालें.
लंबे समय तक खेत सूखा रखना और फिर एक साथ ज्यादा पानी देना तना फटने की बड़ी वजह है. अचानक पानी मिलने से पौधे के अंदर दबाव बढ़ जाता है. इसे देखते हुए कृषि विशेषज्ञ सावधानी और जरूरत के मुताबिक सिंचाई करने की सलाह देते हैं.
कंद बनने के समय अगर तापमान अचानक बढ़ जाए, तो भी तना और छिलका फटने लगता है. जनवरी अंत और फरवरी की शुरुआत में किसानों को सावधान रहना चाहिए क्योंकि इसी अवधि में अचानक तापमान बढ़ता है.
बोरॉन का छिड़काव करें
किसानों को सलाह है कि वे 15 लीटर पानी वाले पंप में 25–30 ग्राम बोरॉन (20%) मिलाकर स्प्रे करें. इससे तना मजबूत होगा और लहसुन में चमक आएगी.
यूरिया देना बंद करें
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, फसल 60–65 दिन की होते ही यूरिया डालना पूरी तरह रोक दें. नहीं रोकने पर फसल खराब हो सकती है.
पोटाश का इस्तेमाल करें
कंद को मजबूत और छिलका सख्त बनाने के लिए 0:0:50 (पोटाश) का स्प्रे करें. इससे लहसुन का कंद बड़ा होगा और मजबूत भी.
सिंचाई संतुलित रखें
खेत में लगातार हल्की नमी बनाए रखें. ज्यादा सूखने के बाद भारी सिंचाई न करें. खेत में पानी जमा होने से लहसुन की फसल चौपट हो सकती है.
बढ़वार रोकने की दवा
अगर पौधा जरूरत से ज्यादा मोटा हो रहा है, तो ‘लिहोसिन’ या ‘चमत्कार’ दवा 25–30 ml प्रति पंप के हिसाब से छिड़कें. इससे फालतू बढ़वार रुकेगी और ताकत कंद में जाएगी. जो ताकत फसल बढ़ाने में लग रही है, वह ताकत कंद बढ़ाने में लगेगी.
किसानों के लिए खास सलाह
लहसुन पक जाने पर उसे समय पर उखाड़ना बहुत जरूरी है. ज्यादा देर खेत में छोड़ने से तना और छिलका फट जाता है, जिससे क्वालिटी और कीमत दोनों घट जाती हैं.