
सर्दी बढ़ने के साथ शीतलहर और पाले का खतरा बढ़ता जा रहा है. कई राज्यों में तापमान सामान्य से नीचे है जिससे शीतलहर और पाले की संभावना बढ़ गई है. इसका सबसे अधिक खतरा रबी फसलों को होता है जिसकी पत्तियां, फूल और तने मुरझा सकते हैं. इसे देखते हुए कृषि विभागों की ओर से किसानों के नाम सुझाव जारी किए जा रहे हैं. इन सुझावों पर अमल कर किसान अपनी फसलों को बचा सकते हैं.
जिन राज्यों में शीतलहर और पाले की मार अधिक देखी जाती है, उनमें एक प्रांत राजस्थान भी है. राजस्थान में मौसम विभाग की ओर से आगामी दिनों में तापमान में बहुत अधिक गिरावट या शीतलहर या पाला की संभावना व्यक्त की गई है. ऐसी स्थिति में कई जिलों में रबी और सब्जी फसलों को संभावित नुकसान से बचाने के लिए किसानों को कुछ सुझाव जारी किए गए हैं. आइए जान लेते हैं कि ये सुझाव क्या हैं-
शीतलहर या पाला पड़ने की संभावना से एक दिन पहले हल्की सिंचाई की जानी चाहिए. जिन क्षेत्रों में सुविधा उपलब्ध हो वहां स्प्रिंकलर सिंचाई को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. इससे रबी फसलों का बहुत फायदा होगा.
शीतलहर और पाले से सुरक्षा में धुआं बहुत काम आता है. रात में खेत की मेड़ों पर सूखी घास, पुआल, कृषि अपशिष्ट जलाकर धुआं किया जाए तो फसलें बच सकती हैं. इससे फसल क्षेत्र के ऊपर तापीय परत बनती है, जिससे पाले का प्रभाव कम होता है. आग पर नियंत्रण और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए वरना फसलें जल भी सकती हैं.
सब्जी और नरम एवं मुलायम फसलों में पौधों की जड़ों के पास सूखी घास, भूसा या पॉलिथीन शीट बिछाने की सलाह दी जाती है. इससे मिट्टी का तापमान संतुलित रहता है. मिट्टी अधिक ठंडी नहीं होती जिससे फसल की जड़ें ठंड और पाले से बची रहती हैं.
कृषि विभाग की ओर से किसानों सलाह है कि वे कृषि विशेषज्ञों की सलाह से रबी फसलों में 0.5% पोटाश (KNO₃) या
0.1% सल्फ्यूरिक एसिड का छिड़काव कर सकते हैं. इससे फसलों को पाले और शीतलहर से बड़ी राहत मिलती है.
खेत की मेड़ों पर उतर पूर्व की ओर अस्थायी पर्दे, झाड़ियां या फसल अवशेष लगाकर ठंडी हवा के प्रभाव को कम किया जा सकता है. शीतलहर और पाला में ठंडी हवाएं फसलों को बहुत नुकसान पहुंचाती हैं. फसलें सूख भी सकती हैं, इसलिए पर्दे और झाड़ियां लगाकर बचाव कर सकते हैं.
किसानों को जान लेना चाहिए कि रबी फसलों में विशेष सावधानी वाली फसलें कौन सी हैं जिन पर शीतलहर और पाले का असर अधिक होता है. इनमें आलू, सरसों, चना, मटर और सब्जी फसलें पाले के प्रति अधिक संवेदनशील हैं. इन फसलों में अग्रिम सिंचाई और मल्चिंग जरूर किया जाना चाहिए ताकि उन्हें बचाया जा सके.