
मध्य प्रदेश के गाडरवारा क्षेत्र में सघन बागवानी करने वाले किसान विजयपाल सिंह इन दिनों मौसम की मार से परेशान हैं. 50 एकड़ क्षेत्रफल में दशहरी और केसर आम की उन्नत खेती करने वाले विजयपाल का कहना है कि इस वर्ष जलवायु परिवर्तन का सीधा असर उनकी फसल पर दिखाई दे रहा है. उन्होंने बताया कि जनवरी महीने में ही उनके आम के पेड़ों पर बौर (मंजरी) आ गए थे, लेकिन अब तक पर्याप्त फल सेट नहीं हो पाया है. पिछले साल जहां उनके बाग से भरपूर उत्पादन हुआ था और सालाना टर्नओवर 2.5 से 3 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था, वहीं इस बार उत्पादन घटने की आशंका बनी हुई है.
इस वर्ष लगभग दो महीने बीतने के बाद भी पेड़ों पर पर्याप्त फल नहीं लग पाए हैं. विजयपाल सिंह का कहना है कि अगर यही स्थिति रही तो पिछले साल की तुलना में उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है. जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में असामान्य उतार-चढ़ाव और बे मौसम बारिश ने बौर और परागण की प्रक्रिया को प्रभावित किया है.
केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. प्रभात कुमार शुक्ला के अनुसार आम में फल लगने के लिए न्यूनतम तापमान लगभग 16 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 35 डिग्री से कम होना चाहिए. उन्होंने बताया कि जिन पेड़ों पर जनवरी में ही बौर आ गए थे, उनमें फल सेट में देरी हो सकती है, लेकिन अभी भी संभावना बनी हुई है.
वैज्ञानिकों का कहना है कि किसान घबराकर कीटनाशकों का छिड़काव न करें, क्योंकि इससे मित्र कीट (परागण करने वाले कीट) नष्ट हो जाते हैं। मित्र कीटों की मदद से ही परागण की प्रक्रिया पूरी होती है और बेहतर फल सेट होता है. डॉ. शुक्ला का कहना है कि अगले 15 दिनों में स्थिति सुधर सकती है और उचित तापमान रहने पर उत्पादन बेहतर हो सकता है.
किसान विजयपाल सिंह का मानना है कि अगर इस बार पेड़ों पर पर्याप्त फल नहीं आए तो इसका असर सीधे बाजार पर दिखाई देगा. आम की उपलब्धता कम होगी तो दाम बढ़ना तय है. उन्होंने कहा, “इस बार लोगों को आम तो मिलेंगे, लेकिन संभव है कि उन्हें ज्यादा कीमत चुकानी पड़े. आम की मिठास का स्वाद इस साल महंगा हो सकता है.”
विजयपाल सिंह ने 50 एकड़ में दशहरी और केसर किस्म के आम की सघन बागवानी की है, उनके पेड़ अभी मात्र 5 साल के हैं और तीसरे साल से ही उत्पादन देने लगे थे. पिछले वर्ष एक पेड़ से 50 से 100 किलो तक आम का उत्पादन हुआ. खास बात यह है कि वे जैविक विधि से खेती करते हैं और फलों को बड़ा व आकर्षक बनाने के लिए बैगिंग तकनीक का उपयोग करते हैं. बैगिंग तकनीक के चलते पिछले साल उन्हें लगभग डेढ़ गुना अधिक मुनाफा हुआ. इस वर्ष भी वे पूरे बाग में बैगिंग करने की तैयारी में हैं. उनकी उन्नत बागवानी के लिए मध्य प्रदेश सरकार द्वारा उन्हें कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं.