Innovative Farmer: किसान का कमाल! बनाई अनाज साफ करने की सस्ती जुगाड़ वाली मशीन

Innovative Farmer: किसान का कमाल! बनाई अनाज साफ करने की सस्ती जुगाड़ वाली मशीन

असम के रहने वाले गोपेन राय ने छोटे किसानों की बड़ी समस्या का एक बहुत ही सस्ता और असरदार हल निकाला है. पारंपरिक तरीके से अनाज की सफाई यानि ओसावनी करने में बहुत मेहनत लगती है और किसान को हवा चलने का इंतज़ार करना पड़ता है, जिससे वक्त और सेहत दोनों का नुकसान होता है. गोपेन ने म कम लागत में एक लकड़ी का ओसावनी यंत्र तैयार किया है, जो बिजली के पंखे की मदद से चलता है.

सस्ती जुगाड़ वाली मशीनसस्ती जुगाड़ वाली मशीन
जेपी स‍िंह
  • नई दिल्ली,
  • Apr 18, 2026,
  • Updated Apr 18, 2026, 12:14 PM IST

अक्सर जब हम खेती में तरक्की की बात करते हैं, तो हमारे जहन में बड़े-बड़े ट्रैक्टर और लाखों रुपये की कम्बाइन मशीनों की तस्वीर उभरती है. लेकिन हकीकत यह है कि हमारे देश के ज्यादातर किसान 'छोटे जोत' वाले हैं, जिनके पास जमीन के छोटे टुकड़े हैं. इन किसानों के लिए भारी-भरकम मशीनें खरीदना न तो मुमकिन है और न ही उनकी जरूरत. बड़ी मशीनें बड़े खेतों और भारी पूंजी वाले किसानों के लिए तो ठीक हैं, लेकिन एक आम किसान के लिए वह महज एक सपना बनकर रह जाती हैं. इसी कमी को महसूस करते हुए असम के गोलपारा जिले के गोपेन राय ने एक ऐसा देसी और किफायती जुगाड़ तैयार किया है, जो कम लागत में बड़े कमाल करता है. गोपेन का यह लकड़ी का ओसावनी यंत्र उन किसानों के लिए एक वरदान साबित हो रहा है, जिन्हें फसल की सफाई के लिए घंटों पसीना बहाना पड़ता था.

जुगाड़ मशीन से किसानों को मिलेगा निजात 

अनाज को भूसे से अलग करने यानी 'ओसावनी' का पुराना तरीका सदियों से चला आ रहा है. किसान टोकरी में अनाज भरकर हवा के रुख का इंतज़ार करते हैं और उसे ऊंचाई से गिराते हैं. इसमें सबसे बड़ी मुसीबत यह है कि अगर हवा न चले, तो काम ठप हो जाता है. खासकर मॉनसून के मौसम में या पहाड़ी इलाकों में जहां हवा का भरोसा नहीं होता, वहां किसान बेबस हो जाते हैं. इसके अलावा, घंटों हाथ चलाने से थकावट बहुत ज़्यादा होती है और उड़ने वाली धूल फेफड़ों में जाकर सांस की बीमारियां पैदा करती है. गोपेन राय ने इसी तकलीफ को अपनी आंखों से देखा और एक ऐसा लकड़ी का फ्रेम तैयार किया जिसमें तिरछे प्लेटफॉर्म लगे हैं. जब इसे एक बिजली वाले स्टैंड फैन के साथ इस्तेमाल किया जाता है, तो यह बनावटी हवा के जरिए अनाज और भूसे को पलक झपकते ही अलग कर देता है. अब किसान को हवा के भरोसे हाथ पर हाथ धरे बैठने की ज़रूरत नहीं है.

कमाल की जुगाड़ मशीन,  कम लागत में शानदार नतीजे

इस मशीन की सबसे खूबसूरत बात इसकी सादगी और कम खर्च है. जहां बाजार में मिलने वाली मशीनें हजारों-लाखों की आती हैं, वहीं गोपेन का यह लकड़ी का ढांचा महज 3500 रुपये की मामूली लागत में तैयार हो जाता है. अगर हम काम की रफ़्तार की तुलना करें, तो फर्क साफ नजर आता है. पारंपरिक तरीके से 6.5 क्विंटल अनाज साफ करने में कम से कम 3 से 4 लोगों को घंटों कड़ी करनी पड़ती थी. लेकिन गोपेन की इस 'स्माल यूनिट' की मदद से यही काम महज एक अकेला इंसान सिर्फ एक घंटे में अंजाम दे सकता है. यानी यह न सिर्फ वक्त की बचत करता है, बल्कि मजदूरी का खर्च भी बचाता है. इसमें इस्तेमाल होने वाली लकड़ी और सामान स्थानीय तौर पर आसानी से मिल जाते हैं, जिससे इसकी मरम्मत या दोबारा बनाना बहुत आसान है.

धूल और थकान से निजात दिलाएगी ये मशीन

खेती में सिर्फ पैदावार मायने नहीं रखती, बल्कि किसान की सेहत भी उतनी ही अहम है. ओसावनी के दौरान निकलने वाली बारीक धूल और धान का गर्दा अक्सर किसानों को दमा या सांस की तकलीफें दे जाता है. गोपेन राय का यह खोज इस खतरे को काफी हद तक कम कर देता है. मशीन का डिजाइन ऐसा है कि धूल और भूसा एक खास दिशा में उड़ जाते हैं और साफ अनाज सीधे नीचे गिरता है. इससे किसान को धूल के बीच खड़े होने की जरूरत नहीं पड़ती. यह मशीन पोर्टेबल है, यानी इसे आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है. 

इस तकनीक ने बदली ओसावनी की सूरत

छोटे और सीमांत किसानों के लिए, जो ऊबड़-खाबड़ या पहाड़ी इलाकों में रहते हैं, यह छोटी और हल्की मशीन किसी बड़ी मशीन से कहीं ज्यादा कारगर साबित हो रही है. गोपेन राय की  इस देसी तकनीक का वैज्ञानिक तरीके से प्रमाणीकरणकिया जाए ताकि इसकी कार्यक्षमता को और बेहतर बनाया जा सके. अगर इस मॉडल को देशभर के गांवों तक पहुंचाया जाए, तो यह छोटे किसानों की ज़िंदगी बदल सकता है. यह साबित करता है कि बड़े बदलाव के लिए हमेशा और पेचीदा तकनीक की जरूरत नहीं होती; कभी-कभी लकड़ी के कुछ तख्ते और एक इंसान की नेक नीयती ही खेती की मुश्किलों का हल निकाल लेती है. गोपेन का यह लकड़ी का विनूअरआत्मनिर्भर ग्रामीण इनोवेशन की एक बेहतरीन मिसाल है.

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