वैज्ञानिक खेती से बदली महिला किसान की किस्मत: मचान विधि से बरबटी उगाकर विमला दीदी बनीं पूरे इलाके की प्रेरणा

वैज्ञानिक खेती से बदली महिला किसान की किस्मत: मचान विधि से बरबटी उगाकर विमला दीदी बनीं पूरे इलाके की प्रेरणा

छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले की महिला किसान विमला दीदी ने आईएफसी के प्रशिक्षण के बाद मचान विधि से बरबटी की खेती अपनाकर उत्पादन और आय दोनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है.उनकी सफलता अब अन्य महिला किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है.

धर्मेंद्र सिंह
  • Raipur ,
  • Aug 05, 2026,
  • Updated Aug 05, 2026, 8:04 AM IST

छत्तीसगढ़ में वैज्ञानिक एवं आधुनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार और कृषि विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयास अब ग्रामीण क्षेत्रों में सकारात्मक परिणाम देने लगे हैं. आधुनिक कृषि तकनीकों का लाभ केवल बड़े किसान ही नहीं, बल्कि महिला किसान भी सफलतापूर्वक उठा रही हैं. मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के ग्राम घुटरा की महिला किसान विमला दीदी इसकी एक प्रेरक मिसाल बनकर उभरी हैं.उन्होंने इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर (आईएफसी) के प्रशिक्षण के बाद बरबटी की खेती में मचान विधि अपनाई और कम समय में उत्पादन, गुणवत्ता तथा आय तीनों में उल्लेखनीय वृद्धि हासिल की.

पारंपरिक खेती छोड़ अपनाई वैज्ञानिक पद्धति

विमला दीदी पहले पारंपरिक तरीके से सब्जियों की खेती करती थीं. इस पद्धति में बेलों का जमीन पर फैलना, कीट एवं रोगों का अधिक प्रकोप, फलियों का खराब होना तथा उत्पादन कम मिलना जैसी समस्याएं आम थीं. इन चुनौतियों के कारण खेती में अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता था.

इसी दौरान इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर 

(आईएफसी) द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी गई.प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने बरबटी की खेती में मचान विधि अपनाने की सलाह दी. विमला दीदी ने इस तकनीक को अपने खेत में अपनाया और परिणाम उम्मीद से कहीं बेहतर मिले.

मचान विधि से बढ़ी फसल की गुणवत्ता

मचान विधि के तहत बरबटी की बेलों को मजबूत बांस, तार और रस्सियों के सहारे ऊपर की ओर बढ़ाया गया.इससे पौधों को पर्याप्त धूप और हवा मिलने लगी, जिससे उनकी वृद्धि तेज हुई.बेलों का जमीन से संपर्क कम होने के कारण फसल में सड़न, फफूंद और अन्य रोगों का खतरा काफी घट गया। कीटों का प्रकोप भी पहले की तुलना में कम देखने को मिला.

इस वैज्ञानिक पद्धति का सीधा असर उत्पादन पर दिखाई दिया. बरबटी की फलियां अधिक लंबी, सीधी, चमकदार और आकर्षक बनीं. उच्च गुणवत्ता के कारण बाजार में फसल की अच्छी मांग रही और उन्हें बेहतर कीमत प्राप्त हुई.

उत्पादन बढ़ा, आय में हुआ इजाफा

मचान विधि अपनाने के बाद विमला दीदी की खेती अधिक लाभकारी साबित हुई. फसल की गुणवत्ता बढ़ने से उन्हें बाजार में बेहतर दाम मिला, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। वहीं, फसल स्वस्थ रहने के कारण दवाइयों पर होने वाला खर्च भी कम हुआ.कम लागत में अधिक उत्पादन मिलने से खेती का लाभांश पहले की तुलना में काफी बढ़ गया.

तुड़ाई हुई आसान, श्रम और समय की बचत

इस तकनीक का एक बड़ा लाभ फसल की तुड़ाई में भी देखने को मिला. बेलें जमीन पर फैलने के बजाय ऊपर रहने से फलियां आसानी से दिखाई देती हैं और उन्हें तोड़ने में कम समय लगता है.इससे मजदूरी की आवश्यकता भी कम हुई तथा श्रम की बचत हुई. खेती अधिक व्यवस्थित और सुविधाजनक बन गई.

विमला दीदी ने साझा किया अनुभव

विमला दीदी बताती हैं कि आईएफसी के प्रशिक्षण ने उनकी खेती करने की सोच पूरी तरह बदल दी.पहले वे पारंपरिक तरीकों पर निर्भर थीं, लेकिन अब आधुनिक तकनीकों की मदद से कम संसाधनों में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर रही हैं.

उनका कहना है कि यदि किसान समय-समय पर कृषि विभाग और विशेषज्ञों द्वारा दिए जाने वाले प्रशिक्षण में भाग लें तथा नई तकनीकों को अपनाएं, तो खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है.उनका मानना है कि वैज्ञानिक खेती आज की आवश्यकता है और इससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है.

अन्य महिला किसानों के लिए बनीं प्रेरणा

आज विमला दीदी की सफलता आसपास के गांवों की महिला किसानों के लिए प्रेरणा बन गई है. उनकी उपलब्धि को देखकर कई अन्य किसान भी बरबटी सहित बेल वाली सब्जियों की खेती में मचान विधि अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं. इससे क्षेत्र में वैज्ञानिक खेती के प्रति जागरूकता बढ़ रही है और महिलाएं भी आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं.

 

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