धान की फसल में कीट से बचाव: नर्सरी से ही अपनाएं आसान देसी उपाय, बिना दवा कम होगा नुकसान

धान की फसल में कीट से बचाव: नर्सरी से ही अपनाएं आसान देसी उपाय, बिना दवा कम होगा नुकसान

धान की फसल में तना छेदक और पत्ती मोड़क कीट से कैसे बचें? जानें नर्सरी से लेकर फसल बढ़ने तक के आसान देसी उपाय, जिससे बिना महंगी दवाइयों के कम हो सके नुकसान और बढ़े उत्पादन.

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क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Jun 26, 2026,
  • Updated Jun 26, 2026, 6:06 PM IST

धान की नर्सरी के पौधे अधिक लंबे हो जाने पर रोपाई से पहले उनके ऊपरी हिस्से (लगभग 30%) को काट देना एक फायदेमंद तरीका है. इससे पत्तियों पर मौजूद हानिकारक कीटों (जैसे तना छेदक या सुंडी) का प्रकोप मुख्य खेत में जाने से रुक जाता है  और पौधे भी मजबूत होते हैं. यदि नर्सरी 25-30 दिन से अधिक की हो जाती है और पौधे 1 से 1.5 फीट तक लंबे हो जाते हैं, तब उन्हें ऊपर से काटने की सलाह दी जाती है. इससे पत्तियों के ऊपरी हिस्से पर जमा कीट (जैसे पत्ती लपेटक) कटाई के साथ ही नष्ट हो जाते हैं, जिससे मुख्य फसल सुरक्षित रहती है.

विशेषज्ञों के मुताबिक, नर्सरी की कटाई के बाद पौधों में फुटाव अच्छा होता है और वे रोपाई के तनाव को आसानी से सहन कर लेते हैं. हालांकि इस काम में कुछ खास बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है. पौधों की कटाई हमेशा रोपाई से ठीक एक-दो दिन पहले या नर्सरी उखाड़ते समय करें. कटाई के लिए साफ और तेज औजार (जैसे हंसिया या दरांती) का उपयोग करें ताकि पौधे कुचले न जाएं. नर्सरी उखाड़ने से एक दिन पहले खेत में पर्याप्त पानी भर दें  ताकि पौधों को नुकसान न पहुंचे.

कीटों की बात करें तो धान की फसल में तना छेदक (टॉप बोरर) और पत्ती मोड़क कीट का प्रकोप अक्सर नर्सरी से ही शुरू हो जाता है. यदि किसान समय रहते सावधानी बरतें, तो बिना महंगे कीटनाशकों के भी इस समस्या पर काबू पाया जा सकता है.

नर्सरी से ही बचाव जरूरी

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, धान की पौध जब नर्सरी से उखाड़कर रोपाई के लिए तैयार की जाती है, उसी समय कीट के अंडे पौध के ऊपरी हिस्से में मौजूद होते हैं. ऐसे में किसानों को सलाह दी जाती है कि पौध की करीब एक इंच ऊपरी चोटी तोड़ दें और इस हिस्से को खेत में न फेंकें बल्कि इसे पॉलीथीन में इकट्ठा कर गड्ढे में दबा दें. इससे तना छेदक के अंडे नष्ट हो जाते हैं और आगे फैलाव रुक जाता है. 

शाम और सुबह में दिखता है कीट

जानकार बताते हैं कि तना छेदक दिन में कम दिखाई देता है. सुबह 5-6 बजे के समय पौध के ऊपर देखा जा सकता है. दिन चढ़ने के बाद यह नजर नहीं आता. यह कीट मुख्य रूप से रात में सक्रिय रहता है. इसलिए कीट को रोकने की कोशिश भी शाम के समय ही की जानी चाहिए.

खेत में रोपाई के बाद अपनाएं देसी तरीका

जब धान की पौध करीब एक फीट ऊंची हो जाए, तब कीट नियंत्रण के लिए किसान एक सरल उपाय अपना सकते हैं—एक बांस का टुकड़ा लेकर उसमें रस्सी बांधें और खेत में इसे चारों ओर घुमाएं. इससे कीटों का प्रभाव कम होता है और पौधों की बढ़वार (टिलरिंग) भी बेहतर होती है.

पत्ती मोड़क कीट से नुकसान

पत्ती मोड़क कीट पत्तियों को मोड़कर उसमें छिप जाता है और भीतर से रस चूसता है. ऐसे में ऊपर से दवा छिड़कने का असर नहीं होता. यही वजह है कि इस कीट को पहचानना और इसका समाधान निकालना मुश्किल काम है.

रस्सी या झाड़ू से समाधान

पत्ती मोड़क कीट के नियंत्रण के लिए किसान यह उपाय कर सकते हैं—करीब 10 मीटर लंबी रस्सी लेकर दो लोग खेत में घुमाएं. या अकेले किसान नारियल की झाड़ू को डंडे में बांधकर फसल के ऊपर फेरें. इससे पत्तियों में छिपे कीट गिरकर पानी में चले जाते हैं और नष्ट हो जाते हैं.

विशेषज्ञों का मानना है कि धान की फसल को कीटों से बचाने के लिए जरूरी है कि किसान शुरुआत से ही सतर्क रहें. समय पर पहचान और देसी उपाय अपनाकर न केवल लागत कम की जा सकती है, बल्कि उत्पादन भी बेहतर किया जा सकता है.

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