किसानों के लिए फायदे का सौदा बनी मल्चिंग विधि, कम पानी में बंपर प्याज उत्पादन

किसानों के लिए फायदे का सौदा बनी मल्चिंग विधि, कम पानी में बंपर प्याज उत्पादन

महाराष्ट्र के नासिक जिले में किसान प्याज की खेती के लिए मल्चिंग पेपर तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं. यह अनोखा प्रयोग उन इलाकों में काफी कारगर साबित हो रहा है जहां बारिश कम होती है और पानी की समस्या रहती है. मल्चिंग पेपर पर प्याज लगाने से सिंचाई में 70 से 80 प्रतिशत तक पानी की बचत हो रही है. इसके साथ ही फसल में लगने वाली बीमारियों में भी कमी आई है जिससे खेती की लागत घटी है. सह्याद्री बायोटेक के विशेषज्ञों के अनुसार, इस तकनीक से माइक्रोन्यूट्रिएंट्स और सिंचाई का सटीक प्रबंधन संभव हो पाता है.

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क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • May 04, 2026,
  • Updated May 04, 2026, 1:04 PM IST

महाराष्ट्र के नासिक जिले में किसान अब परंपरागत खेती छोड़कर मल्चिंग विधि से प्याज की खेती कर रहे हैं और इससे उन्हें जबरदस्त फायदा मिल रहा है. इस नई तकनीक की मदद से किसानों को कम खर्च में ज्यादा उत्पादन मिल रहा है, साथ ही प्याज की क्वालिटी भी पहले से बेहतर हो गई है.

किसान बताते हैं कि मल्चिंग विधि से प्याज की बुवाई करने पर गांठें बड़ी और मजबूत बनती हैं. साथ ही फसल में बीमारी लगने की संभावना भी काफी कम हो जाती है. इससे किसान को नुकसान का डर नहीं रहता और फसल सुरक्षित रहती है.

लागत कम, मुनाफा ज्यादा

मल्चिंग तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे खेती की लागत काफी हद तक कम हो जाती है. किसानों का कहना है कि इस विधि में खाद, पानी और मेहनत तीनों की बचत होती है. कम खर्च में भरपूर उत्पादन मिलने से किसानों की आमदनी बढ़ रही है.

जिन किसानों ने इस साल मल्चिंग विधि से प्याज की बुवाई की है, उन्हें उम्मीद है कि इस बार पैदावार ज्यादा होगी और प्याज की क्वालिटी भी बेहतर रहेगी. अगर प्याज समय पर पककर बाजार में पहुंचता है, तो किसानों को अच्छे दाम मिलने की पूरी संभावना है.

पानी की 70–80% तक बचत

किसानों के मुताबिक, मल्चिंग से प्याज की खेती में 70 से 80 फीसदी तक पानी की बचत हो जाती है. फसल को बार‑बार सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहती है. एक किसान ने समाचार एजेंसी ANI को बताया कि इस बार प्याज की क्वालिटी अच्छी है और बाकी खर्च भी पहले के मुकाबले काफी कम हो गया है.

कम बारिश वाले इलाकों में कारगर तकनीक

नासिक में देश की सबसे ज्यादा प्याज की खेती होती है. यहां किसानों ने मल्चिंग पेपर से प्याज लगाने का नया तरीका अपनाया है. इस तकनीक को खासतौर पर उन इलाकों में उपयोगी माना जा रहा है, जहां बारिश कम होती है और सिंचाई की समस्या बनी रहती है.

इस बारे में किसान राजेंद्र हंडोरे ने बताया कि महाराष्ट्र के कई जिले ऐसे हैं, जहां पानी की कमी रहती है. ऐसे इलाकों में सिंचाई की समस्या से निपटने के लिए मल्चिंग पेपर पर प्याज की बुवाई की जा रही है.

पिछले 5–7 साल से कर रहे प्रयोग

राजेंद्र हंडोरे ने कहा कि वे पिछले पांच से सात सालों से इस तकनीक से प्याज की खेती कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि कम पानी में भी प्याज की अच्छी फसल मिल रही है. मल्चिंग विधि से उगाया गया प्याज आकार में बड़ा और क्वालिटी में बेहतर होता है.

किसानों का कहना है कि इस तकनीक से प्रति एकड़ क्विंटल से लेकर टनों तक उत्पादन मिल रहा है. इस बार मल्चिंग की मदद से उत्पादन में काफी बढ़ोतरी हुई है, जिससे किसान बेहद खुश हैं.

भंडारण और बाजार भाव भी बेहतर

मल्चिंग विधि का एक और फायदा यह है कि इससे फसल को पोषक तत्व और पानी सटीक मात्रा में मिलता है. इससे प्याज की क्वालिटी सुधरती है और उसका भंडारण भी ज्यादा समय तक किया जा सकता है. अच्छी क्वालिटी होने की वजह से बाद में बाजार में प्याज के अच्छे दाम मिलते हैं.

नासिक जिले के कई किसान अब इस नई पद्धति को अपना रहे हैं और लगातार सफलता हासिल कर रहे हैं. मल्चिंग विधि से प्याज की खेती किसानों के लिए अब मुनाफे का मॉडल बनती जा रही है.

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