फ्रूट फ्लाई ट्रैप से आम के बागों को सुरक्षा, 80% तक कम हुआ कीटों का हमला

फ्रूट फ्लाई ट्रैप से आम के बागों को सुरक्षा, 80% तक कम हुआ कीटों का हमला

आम के बागों में फ्रूट फ्लाई (Bactrocera dorsalis) के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए IIHR बेंगलुरु द्वारा विकसित फ्रूट फ्लाई ट्रैप किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है. मेल एनीहिलेशन टेक्नीक (MAT) पर आधारित यह पर्यावरण-अनुकूल और रेसिड्यू-फ्री तकनीक कीटों के हमले को 80 प्रतिशत तक कम करती है, जिससे आम की क्वालिटी, पैदावार और निर्यात क्षमता में वृद्धि होती है. देशभर में 6000 से अधिक किसान इस तकनीक का लाभ उठा रहे हैं.

Mango Fruit Fly TrapMango Fruit Fly Trap
क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Jul 09, 2026,
  • Updated Jul 09, 2026, 1:15 PM IST

आम के बागों में फ्रूट फ्लाई (Bactrocera dorsalis) के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए IIHR बेंगलुरु द्वारा विकसित फ्रूट फ्लाई ट्रैप किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है. मेल एनीहिलेशन टेक्नीक (MAT) पर आधारित यह पर्यावरण-अनुकूल और रेसिड्यू-फ्री तकनीक कीटों के हमले को 80 प्रतिशत तक कम करती है, जिससे आम की क्वालिटी, पैदावार और निर्यात क्षमता में वृद्धि होती है. देशभर में 6000 से अधिक किसान इस तकनीक का लाभ उठा रहे हैं.

आम, जिसे फलों का राजा कहा जाता है, अपने बेहतरीन स्वाद और खुशबू के कारण निर्यात के लिए बहुत अच्छा है. हमारा देश आम के उत्पादन और खेती के रकबे (क्षेत्रफल) के मामले में पहले स्थान पर है, जहां 2.31 मिलियन (23 लाख से अधिक) हेक्टेयर में खेती होती है और 12.75 MT उत्पादन होता है. लेकिन ओरिएंटल फ्रूट फ्लाई (बैक्टोसेरा डोरसालिस) का हमला आम के निर्यात में एक बड़ी बाधा रहा है. फसल कटाई के समय होने वाले कुल नुकसान में से लगभग 27 प्रतिशत नुकसान इसी कीट के कारण होता है.

कीटों का किफायती ट्रैप

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हॉर्टिकल्चरल रिसर्च, हेसरघट्टा, बैंगलोर द्वारा विकसित एक आसान, पर्यावरण के अनुकूल और किफायती ट्रैप (कीट पकड़ने का यंत्र) देश भर के आम निर्यातकों और उत्पादकों के लिए एक बड़ी राहत बनकर आया है. इस ट्रैप के इस्तेमाल से आम की पैदावार बढ़ी है और उत्पादकों को बेहतर मुनाफा हुआ है. आम के बागों में किए गए फील्ड ट्रायल में इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट (IPM) सिस्टम के तहत उत्साहजनक रिजल्ट मिले हैं.

यह ट्रैप 'मेल एनीहिलेशन टेक्नीक' (MAT) यानी नर कीटों को खत्म करने की तकनीक पर काम करता है. इस ट्रैप में प्लास्टिक का एक छोटा डिब्बा होता है, जिसके अंदर मिथाइल यूजेनॉल और डाइक्लोरवोस से उपचारित प्लाईवुड का एक टुकड़ा लगा होता है. इसे पेड़ पर लटका दिया जाता है. यह ट्रैप नर फ्रूट फ्लाई को अपनी ओर आकर्षित करता है. नर कीटों की अनुपस्थिति में मादा कीट प्रजनन नहीं कर पातीं, जिससे फल कीटों के हमले से सुरक्षित रहते हैं. प्रति एकड़ छह से आठ ट्रैप की जरूरत होती है.

इस तकनीक को अपनाने से नुकसान में काफी कमी आई है. इससे अमेरिका, जापान, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे कई देशों में आम का निर्यात आसान हो गया है, जिन्होंने पहले फ्रूट फ्लाई के कारण भारतीय आमों पर प्रतिबंध लगा दिया था. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हॉर्टिकल्चरल रिसर्च इस किसान-अनुकूल तकनीक का पेटेंट कराने की प्रक्रिया में है.

80 परसेंट तक सुरक्षा

इस नई तकनीक से आम के बागों में 80 परसेंट तक कीटों का हमला कम हुआ है. इस नई तकनीक ने आम पर कीटों के आक्रमण को कम किया है जिससे पौधे सेहतमंद रहते हैं. कीटों का हमला जितना कम होगा, पौधे स्वस्थ रहेंगे और और उन पर फल भी ज्यादा आएंगे. ICAR ने बताया है कि फ्रूट फ्लाई ट्रैप की इस नई तकनीक को 6000 से अधिक किसानों ने अपनाया है. ये सभी किसान इस नई तकनीक का फायदा लेकर आम के बाग में कीटों का हमला रोक रहे हैं.

यह तकनीक पूरी तरह से 'रेसीड्यू फ्री’ है. यानी इसमें किसी तरह का अवशेष नहीं बचता और सारी चीजें प्राकृतिक होती हैं. इसका ये भी फायदा होता है कि इससे किसी तरह का प्रदूषण नहीं होता. इस लिहाज से फ्रूट फ्लाई ट्रैप को इस्तेमाल करना पूरी तरह से सुरक्षित है. इससे किसी तरह का कोई खतरा नहीं और प्रकृति पर भी कोई नुकसान नहीं पहुंचता.

चूंकि इस तकनीक में किसी तरह के केमिकल का प्रयोग नहीं होता, इसलिए आम की क्वालिटी उच्च बनी रहती है. इस तरह के उच्च क्वालिटी के आम निर्यात के लिहाज से अच्छे होते हैं क्योंकि विदेशी मानकों पर खरे उतरते हैं. कई देशों में केमिकल को लेकर सख्त नियम हैं जहां काम जैसे फलों में जरा भी मात्रा पाए जाने पर पूरी खेप लौटा दी जाती है. इस लिहाज से यह फ्रूट फ्लाई ट्रैप पूरी तरह से सुरक्षित है.

MORE NEWS

Read more!