Summer Paddy: उत्‍तराखंड के तराई क्षेत्र में गरमा धान की बुवाई पर लगेगा बैन! क्‍या बोले जिला कलेक्‍टर?

Summer Paddy: उत्‍तराखंड के तराई क्षेत्र में गरमा धान की बुवाई पर लगेगा बैन! क्‍या बोले जिला कलेक्‍टर?

उत्तराखंड के तराई इलाके में इस बार गर्मी के धान पर रोक लग सकती है. भूजल स्तर में गिरावट को देखते हुए प्रशासन सख्त कदम के संकेत दे रहा है. अगर फैसला लागू हुआ, तो हजारों किसानों की अतिरिक्त फसल और आमदनी पर सीधा असर पड़ सकता है.

Summer Paddy Ban Uttarakhand Terai RegionSummer Paddy Ban Uttarakhand Terai Region
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jan 14, 2026,
  • Updated Jan 14, 2026, 4:45 PM IST

उत्तराखंड के तराई क्षेत्र में इस बार किसानों को ग्रीष्‍मकालीन धान (गरमा धान) की बुवाई को लेकर बड़ा झटका लग सकता है. भूजल स्तर में लगातार हो रही गिरावट को देखते हुए प्रशासन ऑफ-सीजन यानी ग्रीष्‍मकालीन धान (Summer Paddy) की खेती पर फिर से रोक लगाने की तैयारी में है. संकेत हैं कि यह प्रतिबंध 1 फरवरी से 30 अप्रैल तक लागू किया जा सकता है. उधम सिंह नगर के जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने बयान दिया है कि इस साल गर्मी के धान की खेती के लिए अनुमति नहीं दी जाएगी. 

ग्रीष्‍मकालीन धान से बढ़ेगा जलसंकट का खतरा

प्रशासन ने कहा है कि तराई क्षेत्र में लगातार बढ़ता भूजल दोहन भविष्य में गंभीर जल संकट पैदा कर सकता है. यही वजह है कि इस बार पिछली बार जैसी ढील देने के मूड में प्रशासन नजर नहीं आ रहा है. अगर फैसला लागू होता है तो इसका असर सिर्फ उधम सिंह नगर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नैनीताल और हरिद्वार जिले के तराई इलाकों में भी गर्मी के धान की खेती पर रोक लग सकती है. 

बैन लगने से 15 हजार किसान होंगे प्रभावित

इस फैसले से करीब 15 हजार किसान प्रभावित होंगे. यह जिला उत्तराखंड का प्रमुख धान उत्पादक क्षेत्र माना जाता है और इसे राज्य का अन्न भंडार भी कहा जाता है. इससे पहले साल 2024 में भी प्रशासन ने ग्रीष्‍मकालीन धान पर प्रतिबंध लगाया था, लेकिन किसानों के दबाव और मांग के बाद उसे अस्थायी रूप से हटा लिया गया था. इस बार हालात अलग बताए जा रहे हैं और जल संरक्षण को लेकर सख्त रुख अपनाने के संकेत मिल रहे हैं.

बैन की चर्चा से किसान चिंत‍ित

वहीं, किसान इस संभावित फैसले से चिंतित हैं. किसानों का कहना है कि वे वर्षों से गर्मी के धान की खेती करते आ रहे हैं, जिससे उन्हें साल में एक अतिरिक्त फसल का फायदा मिलता है. प्रतिबंध लगने की स्थिति में उनकी आमदनी पर सीधा असर पड़ेगा और आर्थिक हालात बिगड़ सकते हैं.

प्रशासन ने जारी नहीं किया औपचारिक आदेश

फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई औपचारिक आदेश जारी नहीं हुआ है, लेकिन लगातार मिल रहे संकेतों ने किसानों को असमंजस में डाल दिया है. बोनी का समय नजदीक है और तराई क्षेत्र के किसान अब प्रशासन के अंतिम फैसले का इंतजार कर रहे हैं. (पीटीआई)

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