UP में तेज पछुआ हवाएं चलने की संभावना, कृषि विशेषज्ञों ने किसानों के लिए जारी की एडवाइजरी

UP में तेज पछुआ हवाएं चलने की संभावना, कृषि विशेषज्ञों ने किसानों के लिए जारी की एडवाइजरी

कृषि विशेषज्ञों ने विभिन्न फसलों के लिए विशिष्ट प्रबंधन तकनीकें साझा की हैं. आलू की खुदाई से 10 दिन पहले बेल काटने और उसके बाद मक्के की बुआई करने का सुझाव दिया गया है. साथ ही, गन्ने की बसंतकालीन बुआई के लिए उन्नत किस्मों और अंत:फसल के रूप में गन्ना-उर्द या गन्ना-भिंडी की खेती करने की सलाह दी गई है.

फरवरी के महीने में मौसम में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं फरवरी के महीने में मौसम में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं
नवीन लाल सूरी
  • LUCKNOW,
  • Feb 13, 2026,
  • Updated Feb 13, 2026, 7:34 AM IST

मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों के दौरान तेज पछुआ हवाएं चलने की संभावना है. बदलते मौसम को लेकर उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) ने किसानों के लिए की खेती से जुड़ी अहम सलाह जारी की है. इसी क्रम में उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) के महानिदेशक डॉ. संजय सिंह की अध्यक्षता में संपन्न क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप की 23वीं बैठक में प्रदेश के किसानों के लिए अगले दो सप्ताह के लिए मौसम आधारित कृषि परामर्श और महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं.

यूपी में 17 फरवरी से बदलेगा मौसम

बैठक में मौसम पूर्वानुमान के आधार पर बताया गया कि आगामी सप्ताह में उत्तर प्रदेश के उत्तरार्ध हिस्सों में छिटपुट वर्षा की संभावना है, जबकि 17 फरवरी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं. वहीं बुंदेलखंड और दक्षिण-पश्चिमी मैदानी क्षेत्रों में तापमान सामान्य से 2 से 4 डिग्री सेल्सियस अधिक रहने का अनुमान है.

लखनऊ में हुई क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप की 23वीं बैठक

परिषद ने किसानों को सलाह दी है कि वे रबी फसलों में नमी बनाए रखने के लिए आवश्यकतानुसार सिंचाई करें और जनवरी में बोई गई गेहूं की फसल में उचित नमी की दशा में यूरिया की टॉप ड्रेसिंग सुनिश्चित करें.

गन्ना-उर्द या गन्ना-भिंडी की खेती की सलाह

कृषि विशेषज्ञों ने विभिन्न फसलों के लिए विशिष्ट प्रबंधन तकनीकें साझा की हैं. आलू की खुदाई से 10 दिन पहले बेल काटने और उसके बाद मक्के की बुआई करने का सुझाव दिया गया है. साथ ही, गन्ने की बसंतकालीन बुआई के लिए उन्नत किस्मों और अंत:फसल के रूप में गन्ना-उर्द या गन्ना-भिंडी की खेती करने की सलाह दी गई है ताकि किसान अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकें. जबकि टमाटर और मिर्च जैसी सब्जियों में विषाणु रोग (लीफ कर्ल) के प्रसार को रोकने हेतु फिप्रोनिल या इमिडाक्लोप्रिड के छिड़काव का निर्देश दिया गया है.

पशुपालन और मत्स्य पालन के लिए ज़रूरी सुझाव

उधर, पशुपालन और मत्स्य पालन के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण सुझाव जारी किए गए हैं. राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत पशुओं में एफएमडी टीकाकरण अभियान संचालित किया जा रहा है, जिसका लाभ किसान अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय से प्राप्त कर सकते हैं. इसके अलावा, मत्स्य पालकों को मत्स्य बीज उत्पादन के लिए कॉमन कार्प ब्रीडिंग की तैयारी शुरू करने का परामर्श दिया गया है. इस अवसर पर किसानों की सुविधा के लिए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र द्वारा विकसित एक विशेष पोर्टल का भी उद्घाटन किया गया, जो कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगा.

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