
आलू की खेती करने वाले किसानों के लिए यह खबर बड़े काम की है. अगर आप इस सीजन आलू की खेती करने की योजना बना रहे हैं, तो हालैंड आलू की प्रजाति आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है. सबसे खास बात है कि हालैंड आलू अन्य लाल आलू से महंगा बिकता है. बाराबंकी जिले के हरख ब्लॉक स्थित दौलतपुर गांव में पद्मश्री किसान रामसरन वर्मा 30 एकड़ में हालैंड आलू की खेती कर रहे हैं, वहीं रामसरन आधुनिक तकनीक से खेती कर पूरे प्रदेश में किसानों के लिए आज रोल मॉडल बन गए है. प्रगतिशील किसान रामसरन वर्मा ने बताया कि हालैंड आलू को हम लोग कार्टनर के भी नाम से जानते हैं. इसकी उपज प्रति एक एकड़ में 140-160 क्विंटल है. इस आलू की सबसे ज्यादा सप्लाई पड़ोसी देश नेपाल में है. उन्होंने बताया कि देश के अलग-अलग राज्यों में भी इस आलू की डिमांड बढ़ती जा रही हैं.
उन्होंने बताया कि हालैंड आलू का रंग लाल होता है. वहीं ये लंबा ठोस चमक दार आलू होता है. रामसरन बताते हैं कि आज की डेट में इसकी मांग बिहार, झारखंड, नेपाल और उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा होती है. वहीं हालैंड आलू का ताजा भाव ₹950 प्रति क्विंटल है, जबकि यह आलू बाकी प्रजाति के आलू से दो से तीन रुपया किलो ज्यादा महंगा बिकता है. बाराबंकी जिले के प्रगतिशील किसान रामसरन वर्मा ने बताया कि यह एक उच्च गुणवत्ता वाली आकर्षक लाल या हल्के भूरे रंग की त्वचा और पीले गूदे वाली आलू की किस्म है. जो अपने चपटे अंडाकार और कम चेचक के लिए प्रसिद्ध है.
यह सामान्य आलू की तुलना में थोड़ा महंगा होता है, जिसकी कीमत लगभग 10-12 रुपये प्रति किलो तक है. जो बेहतर स्वाद के लिए पसंद किया जाता है. क्योंकि हालैंड आलू में विटामिन C, B6 और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर है. पद्मश्री किसान रामसरन ने बताया कि वह वर्ष 2007 से आलू की फसल उगा रहे हैं और उन्हें एक लंबा अनुभव है. वह 30 एकड़ में प्रतिवर्ष हालैंड आलू की फसल उगाते हैं.
आधुनिक खेती करने वाले दौलतपुर निवासी प्रगतिशील किसान पद्मश्री रामसरन वर्मा आलू के बारे में अच्छी जानकारी रखते हैं. उन्होंने करीब 150 एकड़ में चार तरह के आलू की फसल उगाते है. बताया कि हालैंड आलू के लिए 18 से 20 डिग्री सेल्सियस तापमान चाहिए. आलू सर्दी व गर्मी के संतुलन वाले समय में बेहतर उत्पादन देता है. पद्मश्री ने बताया कि इस बार आलू का उत्पादन 10 से 20 प्रतिशत कम हुआ है.
आलू की खेती करने वाले किसान रामसरन ने बताया कि आलू लगाने के लिए पौधों से पौधों की दूरी 56 इंच नाली पर बुआई करना चाहिए. इसे लाइन में लगाकर मिट्टी डाल देना चाहिए. इसके अलावा आलू में पोषक तत्व के लिए सड़ी गोबर की खाद लगभग 20 से 25 टन प्रति हेक्टेयर डालना चाहिए. वहीं इसकी बुआई 20 से 30 अक्टूबर के बीच में करनी चाहिए. यह समय सबसे बेहतर होता है. पद्मश्री रामसरन वर्मा ने बताया कि आज उत्तर प्रदेश में हजारों की संख्या में किसान हालैंड आलू की खेती करने मोटी कमाई कर रहे है.
बता दें कि 32 वर्ष पहले 6 एकड़ से खेती शुरू करने वाले किसान रामसरन वर्मा आज 275 एकड़ में वैज्ञानिक और सहकारिता आधारित कृषि का मॉडल तैयार कर चुके हैं. वे केला, टमाटर, आलू, तरबूज,खरबूजा, मेंथा और गेहूं सहित अनेक फसलों की उन्नत खेती कर रहे हैं. वहीं पूरे प्रदेश में हजारों किसानों को नई दिशा दे रहे है.
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