
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह राज्य मध्य प्रदेश में पराली जलाने के मामले एक साल में चार गुना से ज्यादा हो गए हैं. ICAR-IARI की CREAMS लैब की सैटेलाइट रिपोर्ट के मुताबिक, 15 सितंबर से 13 अक्टूबर 2026 के बीच राज्य में 340 घटनाएं दर्ज हुईं. पिछले साल इसी अवधि में 79 मामले थे. यानी 261 घटनाओं का इजाफा, जो करीब 330.4 फीसदी की बढ़ोतरी है. रिपोर्ट में दर्ज 2020 से 2026 के आंकड़ों में यह इस अवधि का सबसे ऊंचा स्तर है. 2020 में इसी अवधि में 275 घटनाएं थीं.
रिपोर्ट के दैनिक आंकड़ों में 10 अक्टूबर को 39 और 11 अक्टूबर को 44 घटनाएं दर्ज हैं. 12 अक्टूबर को यह संख्या 60 पर पहुंच गई. 13 अक्टूबर को राज्य में 3 घटनाएं (जबलपुर, रायसेन और विदिशा में एक-एक) दर्ज हुईं. जिलेवार तस्वीर में गुना 45 घटनाओं के साथ सबसे ऊपर है. इसके बाद सीहोर में 35, उज्जैन में 33, धार में 27 और अशोकनगर में 25 घटनाएं दर्ज की गईं.
वहीं, राजस्थान में 15 सितंबर से 13 अक्टूबर के बीच 81 घटनाएं दर्ज हुईं. पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 28 था. यानी 53 घटनाएं ज्यादा, करीब 189.3 फीसदी की बढ़ोतरी. राज्य में पिछले तीन दिन से रोज घटनाएं बढ़ रही हैं. 11 अक्टूबर को 10, 12 अक्टूबर को 15 और 13 अक्टूबर को 21 घटनाएं दर्ज हुईं. कुल मामलों में बारां 40 और कोटा 16 घटनाओं के साथ आगे हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक 13 अक्टूबर को सैटेलाइट ने कुल 81 घटनाएं पकड़ीं. पंजाब में 51, राजस्थान में 21, उत्तर प्रदेश में 4, मध्य प्रदेश में 3 और उत्तराखंड में 2 घटनाएं दर्ज हुईं. हरियाणा और दिल्ली में इस दिन कोई घटना दर्ज नहीं हुई.
पंजाब में 15 सितंबर से 13 अक्टूबर तक 174 घटनाएं दर्ज हुईं, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 134 थीं. यह करीब 29.9 फीसदी की बढ़ोतरी है. जिलों में अमृतसर में 77 और तरनतारन में 61 घटनाएं दर्ज हैं.
13 अक्टूबर को तरनतारन में 21 और अमृतसर में 16 घटनाएं सामने आईं. रिपोर्ट के दैनिक आंकड़ों के अनुसार 12 अक्टूबर तक पंजाब में 123 घटनाएं थीं, जबकि पिछले साल इस तारीख तक 126. 13 अक्टूबर की 51 घटनाओं ने तुलना को उलट दिया.
उत्तर प्रदेश में 127 घटनाएं दर्ज हुईं, जबकि 2025 में इसी अवधि में 200 थीं. यानी 73 घटनाएं कम, करीब 36.5 फीसदी की गिरावट. जिलों में मथुरा में 42, अलीगढ़ में 27 और गौतमबुद्ध नगर में 11 घटनाएं दर्ज हैं.
हरियाणा में 7 घटनाएं दर्ज हुईं, जबकि पिछले साल 16 थीं. यह करीब 56.3 फीसदी की कमी है. उत्तराखंड में 5 घटनाएं दर्ज हुईं, जबकि पिछले साल 18 थीं. यह करीब 72.2 फीसदी की कमी है और सभी घटनाएं उधम सिंह नगर जिले में दर्ज हुईं. दिल्ली में इस बार 1 घटना दर्ज हुई, जो 19 सितंबर को हुई थी. पिछले साल भी इस अवधि में दिल्ली में 1 घटना दर्ज हुई थी.
रिपोर्ट के मुताबिक 15 सितंबर से 13 अक्टूबर के बीच सातों क्षेत्रों में कुल 735 घटनाएं दर्ज हुईं. मध्य प्रदेश में 340, पंजाब में 174, उत्तर प्रदेश में 127, राजस्थान में 81, हरियाणा में 7, उत्तराखंड में 5 और दिल्ली में 1. पिछले साल इसी अवधि में कुल 476 घटनाएं थीं.
वहीं, बीते दिन नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में पराली प्रबंधन पर उच्चस्तरीय अंतर-मंत्रालयी बैठक हुई. इसकी सह-अध्यक्षता केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने की.
बैठक में कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, कृषि सचिव अतीश चंद्रा और पर्यावरण सचिव नरेंद्र भूषण मौजूद रहे. दिल्ली-NCR, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री भी बैठक में शामिल हुए. दोनों मंत्रियों ने कहा कि कटाई और रबी की बुवाई के बीच समय बहुत कम है और अफसर फाइलों से निकलकर जमीन पर काम करें.
बैठक में पेश आंकड़ों पर बोलते हुए शिवराज ने कहा कि 15 सितंबर से 12 अक्टूबर के बीच पिछले साल की तुलना में हरियाणा में घटनाएं 53.3 फीसदी और उत्तर प्रदेश में करीब 32 फीसदी घटी हैं. पंजाब में भी कुछ गिरावट दर्ज हुई. उन्होंने मध्य प्रदेश और राजस्थान में बढ़ोतरी पर चिंता जताई और दोनों राज्यों से प्रभावित जिलों और गांवों की पहचान कर तुरंत विशेष कार्ययोजना लागू करने को कहा. शिवराज ने यह भी कहा कि कटाई का बड़ा हिस्सा बाकी है, इसलिए जिन राज्यों में घटनाएं कम हुई हैं, वे भी ढिलाई न बरतें.
शिवराज ने बताया कि केंद्र अब तक राज्यों को 3.54 लाख से ज्यादा फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें दे चुका है. चालू वित्त वर्ष 2026-27 में 26,109 नई मशीनें दी गई हैं. उन्होंने पुरानी बंद पड़ी मशीनों की तुरंत मरम्मत कराने को कहा. कस्टम हायरिंग सेंटर सक्रिय करने और छोटे व सीमांत किसानों को सस्ती दरों पर मशीनें उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए.
बैठक में बताया गया कि फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) योजना के तहत 2018-19 से 2025-26 के बीच केंद्र ने राज्यों को 4,266.47 करोड़ रुपये जारी किए. इसमें पंजाब को 2,056.50 करोड़, हरियाणा को 1,171.71 करोड़, उत्तर प्रदेश को 868.67 करोड़ और मध्य प्रदेश को 59 करोड़ रुपये मिले.
2026-27 के लिए 592.57 करोड़ रुपये का आवंटन है, जिसमें से 430.87 करोड़ रुपये जारी हो चुके हैं. शिवराज ने राशि के धीमे इस्तेमाल पर चिंता जताई और पंजाब से उपयोगिता प्रमाण पत्र (UC) जल्द भेजने को कहा, ताकि अगली किस्त जारी हो सके.
भूपेंद्र यादव ने पंजाब के संगरूर, तरनतारन, अमृतसर, पटियाला और गुरदासपुर तथा हरियाणा के कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र, अंबाला और फतेहाबाद में विशेष निगरानी की बात कही. उन्होंने पराली के आंकड़ों को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) से जोड़ने पर जोर दिया. यादव ने कहा कि निगरानी सिर्फ सैटेलाइट डेटा पर निर्भर न रहे. दोपहर 3 बजे के बाद, जब सैटेलाइट पास नहीं होता, ग्राउंड पेट्रोलिंग और फ्लाइंग स्क्वॉड से सख्त निगरानी रखी जाए.