
हरियाणा में अचानक बढ़ते तापमान ने गेहूं की फसल को लेकर चिंता बढ़ा दी है. किसानों और कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर फसल की पैदावार पर पड़ सकता है. इसी को देखते हुए गेहूं और जौ अनुसंधान से जुड़े वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए एक सलाह जारी की है, ताकि वे अपनी फसल को गर्मी से बचा सकें.
मौसम विभाग के अनुसार, हरियाणा में पिछले कुछ दिनों में तापमान अचानक बढ़ गया है. राज्य का औसत अधिकतम तापमान सामान्य से लगभग 0.7 डिग्री सेल्सियस ज्यादा दर्ज किया गया है. सबसे ज्यादा तापमान नारनौल में 37.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया.
इसके अलावा कई जिलों में भी तापमान काफी ज्यादा रहा. हिसार में 36.4 डिग्री, भिवानी में 37.2 डिग्री, गुरुग्राम में 37 डिग्री, मेवात में 36.9 डिग्री और पलवल में 36.2 डिग्री तापमान दर्ज किया गया. वहीं चरखी दादरी, रोहतक, अंबाला, करनाल, सोनीपत, सिरसा और यमुनानगर में भी तापमान सामान्य से ज्यादा रहा.
हालांकि न्यूनतम तापमान में थोड़ी गिरावट देखी गई है, लेकिन वह भी सामान्य से करीब 5.1 डिग्री ज्यादा है. सबसे कम न्यूनतम तापमान सोनीपत में 14.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया.
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि इस समय गेहूं की फसल में दाना बनने की प्रक्रिया चल रही होती है. अगर इस समय बहुत ज्यादा गर्मी पड़ती है तो दाना ठीक से नहीं बन पाता. इससे फसल कमजोर हो सकती है और पैदावार भी कम हो सकती है.
वैज्ञानिकों के अनुसार, अचानक गर्मी बढ़ने से गेहूं की फसल जल्दी पक भी सकती है. इससे दाने छोटे रह सकते हैं और किसानों को नुकसान हो सकता है.
वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे अपनी फसल का खास ध्यान रखें और खेत में मिट्टी की नमी बनाए रखें. अगर खेत में पानी की कमी हो जाएगी तो गर्मी का असर फसल पर और ज्यादा पड़ेगा.
किसानों को जरूरत के अनुसार सिंचाई करने की सलाह दी गई है. सिंचाई करने का सबसे अच्छा समय शाम का बताया गया है, क्योंकि उस समय हवा की गति कम होती है और पानी सही तरह से मिट्टी में समा जाता है.
अगर तीन दिन तक लगातार ज्यादा गर्मी पड़ती है तो किसानों को फसल पर पोषक तत्वों का छिड़काव करने की भी सलाह दी गई है. इसके लिए किसान म्यूरेट ऑफ पोटाश या पोटेशियम नाइट्रेट को पानी में मिलाकर फसल पर छिड़क सकते हैं. इससे पौधों को गर्मी से लड़ने की ताकत मिलती है.
वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले दिनों में पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम में थोड़ा बदलाव आ सकता है. इससे तापमान की बढ़त थोड़ी धीमी हो सकती है और किसानों को कुछ राहत मिल सकती है.
वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर गेहूं की फसल समय पर बोई गई है तो ज्यादा नुकसान होने की संभावना कम है. लेकिन फिर भी किसानों को सावधान रहने की जरूरत है.
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मार्च में अचानक तापमान बढ़ने से गेहूं की पैदावार पर असर पड़ सकता है. समय पर बोई गई गेहूं की किस्मों में लगभग 5 से 7 प्रतिशत तक नुकसान हो सकता है. वहीं देर से बोई गई फसल में 10 प्रतिशत तक पैदावार कम हो सकती है.
इसके अलावा गर्मी बढ़ने से गेहूं की फसल सामान्य समय से 10 से 15 दिन पहले पक सकती है. इसलिए किसानों को अपनी फसल पर नजर रखने और समय पर सही कदम उठाने की सलाह दी गई है.
अगर किसान वैज्ञानिकों की इन सलाहों का पालन करेंगे, तो वे अपनी गेहूं की फसल को गर्मी के असर से काफी हद तक बचा सकते हैं.
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