
देश में हाल के रबी सीजन ने किसानों के सामने एक नई चिंता खड़ी कर दी है. ज्यादा कमाई देने वाली हाई-वैल्यू फसलें यानी फल, सब्जियां, मसाले और प्रीमियम चावल अब जलवायु परिवर्तन की सबसे बड़ी मार झेल रही हैं. मौसम का मिजाज बदलते ही किसानों की पैदावार, फसल की क्वालिटी और आमदनी तीनों पर असर पड़ रहा है. महाराष्ट्र में बेमौसम बारिश ने अंगूर के बागानों को नुकसान पहुंचाया, तो हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में गर्म सर्दियों ने सेब उत्पादकों की चिंता बढ़ा दी. ठंड कम पड़ने से सेब की पैदावार घट गई.
वहीं, कई राज्यों में लंबी चली हीटवेव ने सब्जियों की खेती पर असर डाला और फलों की क्वालिटी भी बिगाड़ दी. विशेषज्ञों का कहना है कि ये सिर्फ अलग-अलग घटनाएं नहीं हैं, बल्कि बदलते मौसम का साफ संकेत हैं. अगर यही हाल रहा, तो आने वाले समय में किसानों के लिए हाई-वैल्यू फसलों से मुनाफा कमाना और मुश्किल हो सकता है.
पिछले कुछ वर्षों में किसान पारंपरिक गेहूं-धान जैसी फसलों से हटकर ज्यादा कमाई देने वाली फसलों की तरफ बढ़े हैं. महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात और उत्तर भारत के कई राज्यों में फल, सब्जियां, मसाले और बासमती चावल का रकबा बढ़ा है. कई इलाकों में बागवानी अब अनाज से ज्यादा कमाई का जरिया बन चुकी है. पानी की कमी, धान की खेती की मुश्किलें और गेहूं जैसी फसलों में कम मुनाफे के कारण किसान नई फसलों की ओर जा रहे हैं.
लेकिन इन फसलों की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि ये मौसम के प्रति ज्यादा संवेदनशील होती हैं. अनाजों में जहां मात्रा ज्यादा मायने रखती है. वहीं, फल और सब्जियों में आकार, रंग, स्वाद, बनावट और टिकाऊपन ज्यादा जरूरी होता है. अगर फूल आने के समय गर्मी बढ़ जाए या कटाई के समय बारिश हो जाए, तो फसल की क्वालिटी गिर जाती है और बाजार में दाम कम मिलते हैं.
अंगूर और बासमती जैसी निर्यात फसलों में तो हल्का-सा गुणवत्ता बदलाव भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में असर डालता है. सेब वाले इलाकों में ठंड कम पड़ने से फूल आने का समय बिगड़ रहा है. महाराष्ट्र के अंगूर और अनार क्षेत्रों में तेज गर्मी से फल झुलसने और असमान पकने की समस्या बढ़ रही है. टमाटर और शिमला मिर्च जैसी सब्जियों में गर्मी से फूल झड़ना आम हो गया है.
बारिश का पैटर्न भी बदल रहा है. कम समय में ज्यादा बारिश से खेतों में जलभराव और मिट्टी के पोषक तत्व बह जाते हैं. लंबे सूखे से सिंचाई पर दबाव बढ़ता है. कटाई के समय बारिश होने पर फल फट जाते हैं और अनाज की गुणवत्ता खराब होती है. ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को बचाने के लिए मजबूत मौसम सलाह प्रणाली, क्षेत्र आधारित शोध, बेहतर फसल बीमा, माइक्रो-इरिगेशन और कोल्ड स्टोरेज जैसी सुविधाओं को तेजी से बढ़ाने की जरूरत है. तभी किसानों की आय सुरक्षित रह सकेगी.