
तेलंगाना सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए ज्वार और सूरजमुखी की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP पर करने का फैसला लिया है. बाजार में दोनों फसलों के दाम MSP से काफी नीचे चले जाने के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है. राज्य सरकार का कहना है कि किसानों को नुकसान से बचाने के लिए अब वह खुद आगे आकर खरीद करेगी. राज्य के कृषि मंत्री तुम्मला नागेश्वर राव ने कहा कि केंद्र सरकार से MSP पर खरीद के लिए आर्थिक सहयोग मांगा गया था, लेकिन सकारात्मक जवाब नहीं मिला. इसके बाद राज्य सरकार ने अपने स्तर पर ही खरीद करने का निर्णय लिया. राज्य सरकार ने कहा कि किसानों को बाजार की गिरती कीमतों के भरोसे नहीं छोड़ा जाएगा.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य सरकार ने हाइब्रिड ज्वार की खरीद भी MSP पर करने का ऐलान किया है. बाजार में ज्वार का भाव करीब 2,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है, जबकि इसका MSP 3,699 रुपये प्रति क्विंटल है. अनुमान के मुताबिक, राज्य में करीब 4 लाख टन ज्वार उत्पादन हुआ है. इसकी खरीद पर लगभग 1,100 करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना जताई गई है.
वहीं, सूरजमुखी किसानों को भी MSP का फायदा पहुंचाने का फैसला लिया गया है. बाजार में सूरजमुखी का भाव करीब 5,376 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है, जबकि MSP 7,721 रुपये प्रति क्विंटल तय है. सरकार ने कहा कि किसानों को घाटे से बचाने के लिए MSP पर खरीद की जाएगी.
केंद्र सरकार की ओर से MSP खरीद की एक सीमा तय की गई है, लेकिन तेलंगाना सरकार ने संकेत दिए हैं कि किसानों के हित में वह इस सीमा से आगे जाकर भी खरीद कर सकती है. राज्य सरकार का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में किसानों को बाजार के भरोसे छोड़ना सही नहीं होगा.
तेलंगाना में रबी सीजन 2025-26 के दौरान मक्का का रिकॉर्ड उत्पादन होने का अनुमान है. राज्य सरकार ने मक्का खरीद के लिए अतिरिक्त 1,867.77 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी मंजूर की है. इसके साथ ही इस सीजन में कुल खर्च करीब 6,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. राज्य सरकार के मुताबिक, अब तक करीब 13 लाख टन मक्का खरीदा जा चुका है और आगे 6.50 लाख टन अतिरिक्त खरीद की तैयारी है.
राज्य में इस बार करीब 43 लाख टन मक्का उत्पादन का अनुमान लगाया गया है. दरअसल, मक्का की बाजार कीमतों में भारी गिरावट ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. जहां मक्का का MSP ₹2,400 प्रति क्विंटल तय है, वहीं बाजार में यह करीब ₹1,700 प्रति क्विंटल बिक रहा है. ऐसे में किसानों को सीधे नुकसान का सामना करना पड़ रहा है. इसी वजह से सरकार ने खरीद बढ़ाने का फैसला किया है.