तमिलनाडु के मेट्टूर बांध में घटा पानी, धान की खेती पर संकट, किसानों के लिए मुआवजे की मांग तेज

तमिलनाडु के मेट्टूर बांध में घटा पानी, धान की खेती पर संकट, किसानों के लिए मुआवजे की मांग तेज

तमिलनाडु के मेट्टूर बांध में जल भंडार घटने से कावेरी डेल्टा में सांबा और थालाडी धान की खेती पर संकट गहराया है. पीएमके अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने पानी की कमी से प्रभावित किसानों के लिए 25 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजे की मांग की है.

Mettur Dam Low Water LevelMettur Dam Low Water Level
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Sep 22, 2026,
  • Updated Sep 22, 2026, 6:31 PM IST

तमिलनाडु में कावेरी डेल्टा क्षेत्र की आगामी सांबा धान फसल पर पानी की कमी का संकट गहराता जा रहा है. पीएमके अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद अंबुमणि रामदास ने मेट्टूर बांध में तेजी से घटते जल भंडार पर चिंता जताई है. उन्होंने राज्य सरकार से प्रभावित किसानों के लिए तत्काल राहत पैकेज घोषित करने की मांग की है. अंबुमणि रामदास ने पार्टी की ओर से जारी बयान में कहा कि कर्नाटक के जलाशयों से कावेरी नदी में पानी छोड़े जाने की मात्रा में भारी कमी आने के बाद मेट्टूर बांध में पानी की आवक घटकर 2,281 क्यूसेक रह गई है. इसके चलते बांध का जलस्तर 120 फीट की अधिकतम क्षमता के मुकाबले घटकर 84 फीट पर पहुंच गया है.

35 दिन की सिंचाई का पानी बचने का दावा

पीएमके अध्यक्ष ने दावा किया क‍ि मेट्टूर बांध में फिलहाल करीब 46 टीएमसी पानी उपलब्ध है, जबकि इसकी कुल क्षमता 93.47 टीएमसी है. यानी बांध में उसकी पूरी क्षमता का करीब 49.21 फीसदी पानी ही बचा है. अंबुमणि रामदॉस ने कहा कि मौजूदा जल भंडार से सिंचाई की जरूरत करीब 35 दिनों तक ही पूरी हो सकती है. ऐसे में आगामी सांबा धान की खेती को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. उन्होंने यह भी आशंका जताई कि अगर अक्टूबर से दिसंबर के बीच सामान्य स्तर का उत्तर-पूर्वी मानसून भी आता है, तब भी मौजूदा स्थिति को संभालना आसान नहीं होगा.

कर्नाटक से पानी की सप्‍लाई में कमी का दावा

अंबुमणि रामदास ने कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि 22 सितंबर तक कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए 113.33 टीएमसी पानी छोड़ना था. उनके मुताबिक अब तक तमिलनाडु को केवल 43 टीएमसी पानी मिला है, जिससे करीब 70 टीएमसी की कमी बनी हुई है.

उन्होंने कहा कि कर्नाटक के जलाशयों में करीब 60 टीएमसी पानी मौजूद है, जिसमें से लगभग 37 टीएमसी ही इस्‍तेमाल योग्य है. कर्नाटक के जलाशयों में कुल आवक करीब 6,695 क्यूसेक रह गई है, जबकि वहां से पानी की निकासी करीब 14,000 क्यूसेक है. ऐसी स्थिति में आने वाले दिनों में तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ना पूरी तरह बंद होने का जोखिम है.

40 फीसदी जमीन पर खेती प्रभावित होने की आशंका

पीएमके अध्यक्ष ने दावा किया कि पानी की गंभीर कमी के कारण कावेरी डेल्टा क्षेत्र की करीब 40 फीसदी कृषि भूमि पर इस साल खेती नहीं हो पाएगी. उन्होंने कहा कि किसान पहले ही कुरुवई धान की खेती का सीजन गंवा चुके हैं. 

अब पानी की उपलब्धता नहीं होने पर उनकी पूरे साल की कृषि आय प्रभावित हो सकती है. उन्होंने राज्य सरकार से उन किसानों के लिए प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता की मांग की है, जो पानी की कमी के कारण सांबा या थालाडी धान की खेती नहीं कर पाएंगे.

किसानों को 25 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजे की मांग

अंबुमणि रामदास ने तमिलनाडु सरकार से सांबा और थालाडी की खेती नहीं कर पाने वाले प्रभावित किसानों को 25,000 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने की मांग की है. इसके अलावा उन्होंने सांबा की खेती करने वाले किसानों के लिए 10,000 रुपये प्रति एकड़ का विशेष इनपुट सहायता पैकेज देने की मांग रखी है.

उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में किसान भूजल के सहारे सिंचाई कर रहे हैं, वहां फरवरी 2027 तक लगातार तीन-फेज बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित की जानी चाहिए. कावेरी डेल्टा की बाकी करीब 60 फीसदी जमीन में सिंचाई के लिए यह व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी.

पीएमके अध्यक्ष ने राज्य सरकार से धान की देर से होने वाली बुवाई को देखते हुए किसानों के लिए स्पष्ट कृषि सलाह जारी करने की भी मांग की है. उन्होंने कहा कि सितंबर के अंतिम दौर में मॉनसून से पहले नर्सरी तैयार करना व्यावहारिक नहीं रह गया है. ऐसे में किसानों को डायरेक्ट सीडिंग तकनीक के बारे में साफ दिशा-निर्देश दिए जाने चाहिए. उन्होंने सरकार से किसानों के लिए धान के बीज, उर्वरक और सूक्ष्म पोषक तत्वों की पर्याप्त और निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग भी की है. (पीटीआई)

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